नई दिल्ली: PM Mudra Yojana (PMMY) के 11 साल पूरे हो गए हैं। इस योजना ने करोड़ों लोगों के जीवन में बदलाव लाया है, खासतौर पर महिलाओं, अनुसूचित जाति, जनजाति के साथ-साथ पिछड़े वर्ग के लोगों को सशक्त बनाया है।
PM Mudra Yojana का प्रारंभ
यह योजना 8 अप्रैल, 2015 को शुरू की गई थी। इसका उद्देश्य गैर-कॉर्पोरेट तथा गैर-कृषि लघु एवं सूक्ष्म उद्यमों को ऋण उपलब्ध कराना है। योजना के तहत अब अधिकतम ऋण सीमा ₹10 लाख से बढ़ाकर ₹20 लाख कर दी गई है।
PM Mudra Yojana से ऋण की सुविधाः
मुद्रा ऋण वाणिज्यिक बैंक, क्षेत्रीय ग्रामीण बैंक, लघु वित्त बैंक, सहकारी बैंक, माइक्रो फाइनेंस संस्थान और गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों के जरिए दिए जाते हैं। इच्छुक व्यक्ति सीधे इन संस्थानों से संपर्क कर सकते हैं या ऑनलाइन आवेदन भी कर सकते हैं।
PM Mudra Yojana के तहत ऋण की श्रेणीः
योजना के तहत ऋण को चार श्रेणियों में बांटा गया है। ‘शिशु’ के तहत ₹50 हजार तक, ‘किशोर’ में ₹50 हजार से ₹5 लाख, ‘तरुण’ में ₹5 लाख से ₹10 लाख और ‘तरुण प्लस’ में ₹10 लाख से ₹20 लाख तक का ऋण मिलता है। ‘तरुण प्लस’ श्रेणी 2024-25 के बजट में जोड़ी गई है।
PM Mudra Yojana में गारंटी रहित ऋणः
इस योजना की खास बात यह है कि इसमें बिना किसी गारंटी के ऋण मिलता है। ब्याज दर बैंक और आवेदक की क्रेडिट हिस्ट्री के अनुसार तय होती है, जो आमतौर पर 8 से 12 प्रतिशत के बीच होती है। ऋण चुकाने की अवधि 1 से 7 साल तक हो सकती है।
PM Mudra Yojana में पोषित क्षेत्रः
निर्माण, व्यापार, सेवा और कृषि से जुड़ी गतिविधियों जैसे डेयरी, मुर्गी पालन और मधुमक्खी पालन से जुड़े सूक्ष्म उद्यम इस योजना के लिए पात्र हैं।
(Input from Agency)
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