लखनऊ/नई दिल्लीः केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने आज लखनऊ में आयोजित Utter Kshetriya Krishi Samallan में कहा कि देश की कृषि नीति को अब क्षेत्रवार जरूरतों के अनुसार तैयार करना होगा। उन्होंने बताया कि पहले खरीफ एवं रबी सम्मेलन पूरे देश के लिए एक दिन में आयोजित होते थे, लेकिन अब उन्हें अधिक प्रभावी बनाने के लिए दो दिन और फिर अलग-अलग कृषि-जलवायु क्षेत्रों के आधार पर क्षेत्रीय सम्मेलन आयोजित किए जा रहे हैं। जयपुर के बाद यह दूसरी क्षेत्रीय बैठक है, जिसमें उत्तर भारत के राज्यों के मंत्री, अधिकारी, वैज्ञानिक और किसान प्रतिनिधि शामिल हुआ।
उन्होंने कहा कि उत्तर क्षेत्र देश के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। पंजाब और हरियाणा ने हरित क्रांति की शुरुआत की, जबकि उत्तर प्रदेश आज खाद्यान्न उत्पादन में देश में प्रथम स्थान पर है। हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड तथा जम्मू-कश्मीर फल, फूल और सब्जियों के लिए विशेष पहचान रखते हैं। उन्होंने कहा कि भारत आज खाद्यान्न के मामले में आत्मनिर्भर है। चावल उत्पादन में भारत अब विश्व में पहले स्थान पर पहुंच चुका है और गेहूं निर्यात की भी अनुमति दी गई है।
Central Agriculture Minister ने कृषि के तीन प्रमुख लक्ष्य बताए—देश की खाद्य सुरक्षा सुनिश्चित करना, किसानों की आय बढ़ाना और नागरिकों को पोषणयुक्त आहार उपलब्ध कराना। इसके लिए छह सूत्रीय रणनीति पर जोर देते हुए उन्होंने उत्पादन बढ़ाने, लागत घटाने, किसानों को उचित मूल्य दिलाने, फसल नुकसान की भरपाई, कृषि विविधीकरण तथा टिकाऊ खेती को बढ़ावा देने की बात कही।
उन्होंने कहा कि उर्वरकों की बढ़ती खपत चिंता का विषय है। बिना मिट्टी की जरूरत समझे अत्यधिक खाद उपयोग से भूमि स्वास्थ्य प्रभावित हो सकता है। इसलिए प्राकृतिक खेती, जैविक खेती और संतुलित पोषण प्रबंधन की दिशा में आगे बढ़ना आवश्यक है।
SEED की गुणवत्ता और उपलब्धता को उन्होंने कृषि का आधार बताया। ICAR द्वारा पिछले दस वर्षों में 3400 नई किस्में विकसित की गई हैं। अल नीनो के संभावित प्रभाव और कम वर्षा की आशंका को देखते हुए राज्यों से जलवायु अनुकूल बीजों और रणनीतियों पर काम करने का आग्रह किया गया।
उन्होंने नकली खाद, बीज और कीटनाशकों की समस्या को गंभीर बताते हुए कहा कि इसके लिए नए कानून तैयार किए गए हैं, जिन्हें संसद के अगले सत्र में लाने का प्रयास है। दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाएगी।
Central Agriculture Minister ने प्रत्येक राज्य के लिए कृषि रोडमैप तैयार करने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि ICAR, कृषि विज्ञान केंद्रों और विश्वविद्यालयों के 16 हजार वैज्ञानिक राज्यों के साथ मिलकर उनकी कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुसार दीर्घकालिक योजना बनाने को तैयार हैं।
उन्होंने Farmer ID और किसान क्रेडिट कार्ड योजना को भी प्राथमिकता बताया। Farmer ID से किसानों को ऋण सहित 17 प्रकार की सुविधाएं मिल सकेंगी। वहीं अभी देश में लगभग साढ़े सात करोड़ किसान क्रेडिट कार्ड बने हैं, जबकि किसानों की संख्या करीब 13 करोड़ है। उन्होंने वंचित किसानों तक KCC पहुंचाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर UP के CM श्री योगी आदित्यनाथ; श्री रामनाथ ठाकुर तथा श्री भागीरथ चौधरी, केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री; श्री अतिस चन्द्र, सचिव, केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय; श्री सूर्य प्रताप शाही, कृषि मंत्री, UP; डॉ. एम.एल. जाट, सचिव (डेयर) एवं महानिदेशक (ICAR) तथा अधिकारीगण उत्तर क्षेत्रीय कृषि के विकास पर अपना विचार साझा किया। यहां किसान की भी उल्लेखनीय भागीदारी रहेगी।
सम्मेलन में विकसित कृषि संकल्प अभियान, वैज्ञानिकों की गांव-गांव चौपाल, एकीकृत खेती, पशुपालन, मत्स्य पालन, मधुमक्खी पालन और वृक्ष आधारित खेती जैसे विषयों पर भी विस्तृत चर्चा आज दिन भर की जाएगी और उसके आधार पर नए कृषि रोड मैप का खाका तैयार किया जाएगा।
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