भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (ICAR-CPRI), शिमला में "बीज आलू उत्पादन हेतु आधारभूत मानक संचालन प्रक्रियाएं " विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय दक्षता विकास कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया।
शिमला । भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद-केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान (ICAR-CPRI), शिमला में "बीज आलू उत्पादन हेतु आधारभूत मानक संचालन प्रक्रियाएं " विषय पर तीन दिवसीय राष्ट्रीय दक्षता विकास कार्यक्रम का शुभारंभ किया गया। 27 से 29 जुलाई, 2026 तक आयोजित इस कार्यक्रम में देशभर में स्थित संस्थान के ब्रीडर सीड उत्पादन केन्द्रों के वैज्ञानिक एवं तकनीकी कार्मिक भाग ले रहे हैं।
इस कार्यक्रम का उद्देश्य ब्रीडर बीज आलू उत्पादन में वैज्ञानिक एकरूपता, गुणवत्ता तथा मानकीकरण को सुदृढ़ करना है। ब्रीडर बीज उत्पादन संस्थान की प्रमुख वैज्ञानिक जिम्मेदारियों में से एक है, जो देश की संपूर्ण बीज आलू उत्पादन प्रणाली की आधारशिला है। बीज की गुणवत्ता, आनुवंशिक शुद्धता तथा उत्पादन प्रक्रियाओं में एकरूपता बनाए रखने के लिए सभी ब्रीडर सीड उत्पादन केन्द्रों में मानक संचालन प्रक्रियाओं (FPO) का प्रभावी अनुपालन सुनिश्चित करना इस कार्यक्रम का मुख्य लक्ष्य है।
कार्यक्रम का उद्घाटन करते डॉ. ब्रजेश सिंह, निदेशक, केन्द्रीय आलू अनुसंधान संस्थान, शिमला ने कहा कि वैज्ञानिक दृढ़ता, खेत एवं प्रयोगशाला स्तर पर मानकीकृत कार्यप्रणालियों तथा वैज्ञानिक एवं तकनीकी कार्मिकों के सतत क्षमता संवर्धन के माध्यम से ब्रीडर बीज उत्पादन प्रणाली को और अधिक सुदृढ़ बनाने की आवश्यकता है।
उन्होंने कहा कि Breeder Seed की गुणवत्ता एवं शुद्धता बनाए रखना न केवल किसानों और अन्य हितधारकों को उच्च गुणवत्ता वाला विश्वसनीय बीज उपलब्ध कराने के लिए आवश्यक है, बल्कि आलू अनुसंधान एवं विकास के क्षेत्र में संस्थान की वैज्ञानिक प्रतिष्ठा और नेतृत्व को बनाए रखने के लिए भी अत्यंत महत्वपूर्ण है। डॉ. सिंह ने कहा कि वैज्ञानिकों की नई पीढ़ी को तैयार करने तथा अनुसंधान एवं ब्रीडर बीज उत्पादन में उत्कृष्टता की निरंतरता बनाए रखने के लिए व्यवस्थित दक्षता विकास, ज्ञान साझाकरण एवं मार्गदर्शन अत्यंत आवश्यक हैं।
डॉ. विनोद कुमार, कार्यक्रम निदेशक ने बताया कि प्रतिभागियों को ब्रीडर बीज आलू उत्पादन से संबंधित मानक संचालन प्रक्रियाओं पर व्यापक सैद्धांतिक ज्ञान के साथ-साथ व्यावहारिक प्रशिक्षण भी प्रदान किया जाएगा। उन्होंने कहा कि इस कार्यक्रम से सभी ब्रीडर सीड उत्पादन केन्द्रों में उत्पादन प्रक्रियाओं में एकरूपता स्थापित होगी, जिससे राष्ट्रीय Breeder Seed उत्पादन कार्यक्रम को और अधिक मजबूती मिलेगी तथा किसानों को बेहतर गुणवत्ता का बीज आलू उपलब्ध कराने में सहायता मिलेगी।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम डॉ. विनोद कुमार के मार्गदर्शन में आयोजित किया जा रहा है, जबकि डॉ. ध्रुव कुमार, डॉ. अश्वनी शर्मा एवं डॉ. तनुजा बक्सेठ कार्यक्रम के समन्वयक हैं। इस अवसर पर डॉ. जगदेव शर्मा, डॉ. संजीव शर्मा, डॉ. आलोक कुमार, डॉ. सोम दत्त, डॉ. विनय सागर एवं डॉ. कैलाश नागा सहित संस्थान के वैज्ञानिक, तकनीकी अधिकारी तथा देश के विभिन्न ब्रीडर सीड उत्पादन केन्द्रों से आए प्रतिभागी उपस्थित रहे।
(Input from PB Shabd)
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