Ministry of Steel । Green Steel Initiative । Finished Steel । Crude Steel: अप्रैल-जुलाई में भारत का तैयार स्टील उत्पादन 4.7% बढ़ा, खपत 7.9% बढ़ी

Ministry of Steel । Green Steel Initiative । Finished Steel । Crude Steel: अप्रैल-जुलाई में भारत का तैयार स्टील उत्पादन 4.7% बढ़ा, खपत 7.9% बढ़ी

नई दिल्ली । भारत में तैयार इस्पात (Finished Steel) का उत्पादन अप्रैल-जुलाई 2026 के दौरान सालाना आधार पर 4.7 फीसदी से बढ़कर 54.7 मिलियन टन (MT) हो गया, जबकि खपत इससे तेज गति से 7.9 फीसदी बढ़कर 56 मिलियन टन हो गई। इससे घरेलू इस्पात मांग में लगातार मजबूती के संकेत मिलते हैं। यह जानकारी इस्पात मंत्रालय द्वारा जारी अनंतिम आंकड़ों में दी गई है।

चार महीने की अवधि के दौरान कच्चे इस्पात (Crude Steel) का उत्पादन 2.4 फीसदी बढ़कर 56.2 MT हो गया, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 54.9 MT था। हॉट मेटल का उत्पादन भी 2.7 फीसदी बढ़कर 31.9 MT हो गया, जो पिछले वर्ष 31.1 MT था।

केवल जुलाई में तैयार इस्पात का उत्पादन 14 MT रहा, जो जुलाई 2025 के 13.5 MT की तुलना में 3.9 फीसदी अधिक है। महीने के दौरान तैयार इस्पात की खपत 6.8 फीसदी बढ़कर 14.4 MT हो  गया।

खपत में तेज वृद्धि के साथ व्यापार में भी उल्लेखनीय बढ़ोतरी हुई। अप्रैल-जुलाई के दौरान तैयार इस्पात का आयात 36.6 फीसदी बढ़कर 2.77 MT हो गया, जबकि निर्यात 35 फीसदी बढ़कर 2.29 MT हो गया। इस प्रकार मात्रा के लिहाज से भारत तैयार इस्पात का शुद्ध आयातक बना रहा।

मूल्य के लिहाज से तैयार इस्पात का आयात 43.1 फीसदी बढ़कर 28,330.8 करोड़ रुपये हो गया, जबकि निर्यात 29.4 फीसदी बढ़कर 18,105.4 करोड़ रुपये रहा।

चीन तैयार इस्पात के आयात का सबसे बड़ा स्रोत बना रहा और कुल आयात में उसकी हिस्सेदारी 30.9 फीसदी रही। इसके बाद दक्षिण कोरिया की 30.2 फीसदी और जापान की 14.9 फीसदी हिस्सेदारी रही। निर्यात के मोर्चे पर वियतनाम सबसे बड़ा गंतव्य रहा, जिसकी हिस्सेदारी 15.4 फीसदी थी। इसके बाद संयुक्त अरब अमीरात (UAE) की 14.8 फीसदी, बेल्जियम की 8 फीसदी, इटली की 7 फीसदी और नेपाल की 6.6 फीसदी हिस्सेदारी रही।

हॉट-रोल्ड कॉइल और स्ट्रिप आयात तथा निर्यात दोनों में सबसे बड़ी श्रेणी बने रहे, जिनमें प्रत्येक की हिस्सेदारी 36.7 फीसदी रही। कोल्ड-रोल्ड कॉइल और शीट्स की आयात में हिस्सेदारी 17.7 फीसदी रही, जबकि निर्यात में पाइप की हिस्सेदारी 15.6 फीसदी रही।

अलॉय स्टील की मांग में मजबूती

इस अवधि के दौरान अलॉय स्टील क्षेत्र में विशेष रूप से मजबूत वृद्धि दर्ज की गई। उत्पादन 26.7 फीसदी बढ़कर 3.71 MT हो गया, जबकि एक साल पहले यह 2.93 MT था। वहीं, खपत 22.1 फीसदी बढ़कर 4.02 MT हो गई।

अप्रैल-जुलाई के दौरान अलॉय स्टील का निर्यात 150.7 फीसदी उछलकर 1,22,200 टन हो गया, जबकि पिछले वर्ष की इसी अवधि में यह 48,700 टन था। हालांकि, आयात केवल 9.4 फीसदी बढ़कर 4,19,300 टन हुआ।

स्टेनलेस स्टील में इसके विपरीत रुझान देखने को मिला। उत्पादन 4.2 फीसदी घटकर 1.38 MT हो गया, लेकिन खपत 25 फीसदी बढ़कर 1.77 MT हो गई। स्टेनलेस स्टील का आयात दोगुने से अधिक बढ़कर 111.4 फीसदी की वृद्धि के साथ 4,97,000 टन हो गया, जबकि निर्यात 30.7 फीसदी घटकर 1,66,700 टन रह गया।

इस्पात की कीमतें मजबूत बनी हुई हैं

अगस्त में घरेलू इस्पात कीमतों में मिला-जुला रुख देखने को मिला। 10-मिमी टीएमटी बार की औसत कीमत महीने-दर-महीने 2.3 फीसदी बढ़कर 58,003 रुपये प्रति टन हो गई, जबकि हॉट-रोल्ड कॉइल की कीमत 0.9 फीसदी बढ़कर 70,448 रुपये प्रति टन हो गई।

कोल्ड-रोल्ड कॉइल की कीमत 0.2 फीसदी की मामूली गिरावट के साथ 76,463 रुपये प्रति टन रही, जबकि गैल्वनाइज्ड प्लेन शीट की कीमत 0.3 प्रतिशत बढ़कर 86,668 रुपये प्रति टन हो गई।

इन कीमतों में जीएसटी शामिल है और ये कोलकाता, दिल्ली, मुंबई तथा चेन्नई की औसत कीमतों को दर्शाती हैं।

कच्चे माल की सुरक्षा मजबूत करने के उद्देश्य से नीतिगत उपाय

इस्पात मंत्रालय ने कहा कि हाल ही में अधिसूचित खान और खनिज (विकास एवं विनियमन) संशोधन अधिनियम, 2026 से खनन के लिए निवेश माहौल में सुधार, खदानों के विकास में सहयोग और लौह अयस्क सहित प्रमुख खनिजों की घरेलू उपलब्धता बढ़ाकर इस्पात उद्योग के लिए कच्चे माल की सुरक्षा मजबूत होने की उम्मीद है।

संशोधन को 17 अगस्त को अधिसूचित किया गया था।

मंत्रालय ने इस्पात और खनन क्षेत्र में डिजिटलीकरण पर केंद्रित मासिक वेबिनार श्रृंखला भी शुरू की है। पहला वेबिनार 21 अगस्त को आयोजित किया गया, जिसमें उद्योग जगत के नेताओं, केंद्रीय सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों, स्टार्टअप और प्रौद्योगिकी प्रदाताओं ने डिजिटल समाधानों और उनके कार्यान्वयन पर चर्चा की।

इस पहल का उद्देश्य डिजिटल प्रौद्योगिकियों को अपनाने में तेजी लाना और इस्पात एवं खनन पारिस्थितिकी तंत्र में अधिक सहयोग को बढ़ावा देना है।

इस बीच, एनएमडीसी के बचेली स्थित 2.0 MTPA लौह अयस्क बेनेफिशिएशन संयंत्र में परीक्षण परिचालन शुरू हो गया है। संयंत्र ने स्लरी उत्पादन के लिए लौह अयस्क फाइन्स का उपयोग करते हुए अपना पहला हॉट ट्रायल पूरा किया, जो एकीकृत बेनेफिशिएशन क्षमताओं को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।

मेकॉन और एनएमडीसी स्टील लिमिटेड ने आगामी परियोजनाओं के लिए परामर्श सेवाओं को लेकर समझौता ज्ञापन (Memorandum of Agreement) पर भी हस्ताक्षर किए हैं। इस साझेदारी से परियोजना नियोजन, क्षमता विस्तार और तकनीकी प्रगति में सहयोग मिलने की उम्मीद है।

ग्रीन स्टील को अपनाने में विस्तार

भारत में ग्रीन स्टील को बढ़ावा देने के प्रयासों में भी तेजी आ रही है। Ministry of Steel की Green Steel Initiative के तहत 15 राज्यों के 98 इस्पात उत्पादकों को ग्रीन स्टील प्रमाणपत्र प्राप्त हुए हैं।

इस प्रमाणन में टीएमटी बार, हॉट- और कोल्ड-रोल्ड कॉइल, प्लेट, वायर रॉड और पाइप जैसे उत्पाद शामिल हैं। प्रमाणित अधिकांश उत्पादों को सर्वोच्च पांच सितारा रेटिंग मिली है, जो द्वितीयक और मध्यम आकार के इस्पात उत्पादकों के बीच कम-उत्सर्जन वाली इस्पात निर्माण प्रक्रियाओं को अपनाने की बढ़ती प्रवृत्ति को दर्शाती है।

(Input from DD News)

 

Sanjay Sharan

Sanjay Sharan

I am senior editor of this News Portal. Me and my team verify all news with trusted sources and publish here.

Comments ( 0)

Leave a Comment

No comments yet. Be the first to comment!