नई दिल्ली । India and Japan ने Paris Agreement के अनुच्छेद 6.2 के अंतर्गत संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र (JCM) के लिए कार्यान्वयन नियमों को अपनाया है, जो Climate Action lतथा Carbon Market तंत्र पर द्विपक्षीय सहयोग की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
इन नियमों को 8 जून को अपनाया गया और ये इस तंत्र के कार्यान्वयन के लिए परिचालन ढांचा प्रदान करते हैं। इस तंत्र का उद्देश्य ऐसी परियोजनाओं को समर्थन देना है जो Greenhouse Gas Emission को कम करें या उसे हटाएं, साथ ही दोनों देशों के जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति में योगदान दें।
यह विकास पिछले वर्ष India और Japan के बीच हस्ताक्षरित सहयोग ज्ञापन (MoC) के बाद हुआ है, जिसने शमन गतिविधियों पर सहयोग के लिए एक रूपरेखा स्थापित की थी। यह तंत्र भारत में उत्सर्जन में कमी लाने वाली परियोजनाओं को सुगम बनाने के लिए तैयार किया गया है, साथ ही सतत विकास को बढ़ावा देने और पेरिस समझौते के अंतर्गत दोनों देशों के राष्ट्रीय स्तर पर निर्धारित योगदान (एनडीसी) के लक्ष्यों को पूरा करने में सहायता करेगा।
कार्यांवयन नियम इस तंत्र के लिए शासन संबंधी व्यवस्थाओं को निर्धारित करते हैं, जिनमें दोनों सरकारों के प्रतिनिधियों से युक्त एक संयुक्त समिति की स्थापना भी शामिल है। यह ढांचा परियोजनाओं की स्वीकृति प्रक्रियाओं, तृतीय-पक्ष सत्यापन और प्रमाणीकरण प्रक्रियाओं, सतत विकास सुरक्षा उपायों तथा Carbon Credit के निर्गमन और हस्तांतरण की निगरानी के लिए राष्ट्रीय रजिस्ट्रियों का भी प्रावधान करता है।
संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र से निम्न-कार्बन और डीकार्बोनाइजेशन प्रौद्योगिकियों में निवेश को प्रोत्साहन मिलने की अपेक्षा है, क्योंकि यह उत्सर्जन में कमी से संबंधित क्रेडिट के सृजन और हस्तांतरण के लिए एक रूपरेखा उपलब्ध कराता है। इसका उद्देश्य प्रौद्योगिकी हस्तांतरण, क्षमता निर्माण तथा ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में योगदान देने वाले क्षेत्रों में जलवायु-अनुकूल समाधानों के प्रसार को बढ़ावा देना भी है।
Paris Agreement का अनुच्छेद 6.2 देशों को सहमति-आधारित लेखांकन और पारदर्शिता नियमों के अधीन, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्यता प्राप्त कार्बन क्रेडिट के हस्तांतरण के माध्यम से अपने जलवायु लक्ष्यों की प्राप्ति हेतु स्वैच्छिक सहयोग की अनुमति देता है।
कार्यान्वयन नियमों को अपनाए जाने से भारत-जापान संयुक्त क्रेडिटिंग तंत्र के अंतर्गत परियोजनाओं की पहचान और स्वीकृति का मार्ग प्रशस्त होने की अपेक्षा है, जिससे जलवायु-केन्द्रित निवेश और दोनों देशों के बीच सहयोग के नए अवसर खुलेंगे।
(Input from DD News)
Comments ( 0)
Leave a Comment
No comments yet. Be the first to comment!