Fertilizer Production । Department of Fertilizer: मोदी सरकार के 12 साल ने रिकॉर्ड फर्टिलाइजर प्रोडक्शन से भारत की कृषि सुरक्षा को किया मजबूत

Fertilizer Production । Department of Fertilizer: मोदी सरकार के 12 साल ने रिकॉर्ड फर्टिलाइजर प्रोडक्शन से भारत की कृषि सुरक्षा को किया मजबूत

नई दिल्ली । भारत ने पिछले 12 वर्षों में घरेलू Fertilizer Production में तेज़ी से वृद्धि की है और आगामी खरीफ सीजन के लिए रिकॉर्ड भंडार तैयार किया है, जिससे किसानों को वैश्विक आपूर्ति व्यवधानों तथा मूल्य झटकों से बचाने में मदद मिली है। केन्द्र सरकार ने रविवार को यह जानकारी दी।

Department of Fertilizer के अनुसार, 2014 से अब तक छह नए यूरिया संयंत्र चालू किए गए हैं, जिससे वार्षिक उत्पादन क्षमता में 76.2 लाख मीट्रिक टन (एलएमटी) की वृद्धि हुई है, जबकि दो और संयंत्र जल्द ही शुरू होने वाले हैं। यूरिया उत्पादन 2014-15 के 225 एलएमटी से बढ़कर 2023-24 में रिकॉर्ड 314.07 एलएमटी हो गया और 2024-25 में भी 306 एलएमटी से अधिक बना रहा। फॉस्फेटिक और पोटाश (पी एंड के) उर्वरकों का उत्पादन भी 2024-25 में रिकॉर्ड 211.22 एलएमटी तक पहुंच गया, जो एक दशक पहले 159.54 एलएमटी था।

सरकार ने कहा कि पश्चिम एशिया में संघर्षों और वैश्विक शिपिंग मार्गों में देरी से उत्पन्न व्यवधानों से निपटने के लिए उसने तेजी से कदम उठाए। इसके तहत वैकल्पिक आपूर्ति चैनलों को सुरक्षित किया गया और अंतरराष्ट्रीय उत्पादकों के साथ समन्वय किया गया। परिणामस्वरूप, खरीफ 2026 के लिए उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त बनी हुई है। अनुमानित मौसमी आवश्यकता 383.9 एलएमटी के मुकाबले लगभग 196 एलएमटी का भंडार पहले से उपलब्ध है, जो अनुमानित मांग का 51 प्रतिशत से अधिक है।

केन्द्र ने यह भी रेखांकित किया कि वैश्विक कीमतों में भारी वृद्धि के बावजूद किसानों के लिए उर्वरकों की कीमतों में कोई बदलाव नहीं किया गया है। 45 किलोग्राम का एक बैग यूरिया अब भी ₹266.50 में बेचा जा रहा है, जबकि 50 किलोग्राम का डीएपी बैग सरकारी सब्सिडी के माध्यम से ₹1,350 में उपलब्ध है।

साथ ही, टिकाऊ कृषि की दिशा में प्रयासों ने भी गति पकड़ी है। फोर्टिफाइड ऑर्गेनिक मैन्योर, लिक्विड एफओएम और फॉस्फेट-समृद्ध ऑर्गेनिक मैन्योर जैसे जैविक विकल्पों की बिक्री 2025-26 में पिछले वर्ष की तुलना में सात गुना बढ़ गई, जबकि कृषि विज्ञान केंद्रों के मार्गदर्शन में 1.84 लाख हैक्टर क्षेत्र में हरित खाद (ग्रीन मैन्योरिंग) को अपनाया गया।

सरकार ने कहा कि घरेलू उत्पादन में वृद्धि, रणनीतिक आयात और मजबूत भंडार के कारण उर्वरकों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित हुई है। इससे आयात पर निर्भरता कम हुई है और इस क्षेत्र में भारत की आत्मनिर्भरता की दिशा को और मजबूती मिली है।

(Input from DD News)

Sanjay Sharan

Sanjay Sharan

I am senior editor of this News Portal. Me and my team verify all news with trusted sources and publish here.

Comments ( 0)

Leave a Comment

No comments yet. Be the first to comment!