नई दिल्ली । शंघाई सहयोग संगठन (SCO) के सदस्य देशों के विदेश आर्थिक और व्यापार गतिविधियों के लिए जिम्मेदार मंत्रियों की 25वीं बैठक गुरुवार को ताजिकिस्तान के दुशांबे में आयोजित हुई, जिसमें भारत ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने के लिए सुरक्षा, संपर्क और अवसर के महत्व पर प्रकाश डाला।
बैठक में SCO के सदस्य देशों के बीच आर्थिक और व्यापारिक गतिविधियों में जारी सहयोग की समीक्षा की गई और एससीओ के ढांचे के तहत व्यापार और आर्थिक जुड़ाव को गहरा करने के उपायों पर चर्चा की गई।
भारत का प्रतिनिधित्व करते हुए Department of Commerce, के अतिरिक्त सचिव यशवीर सिंह ने SCO की महत्वपूर्ण आर्थिक क्षमता को रेखांकित किया और एससीओ के भीतर बढ़ते व्यापार, व्यापार लागत में कमी, लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं और बेहतर संपर्क के माध्यम से इस क्षमता को ठोस परिणामों में बदलने की आवश्यकता पर जोर दिया।
भारत ने आर्थिक सहयोग के लिए तीन स्तंभों पर प्रकाश डाला
बिश्केक में एससीओ शिखर सम्मेलन में PM नरेन्द्र मोदी द्वारा व्यक्त दृष्टिकोण का उल्लेख करते हुए भारत ने सुरक्षा, संपर्क और अवसर के तीन स्तंभों पर प्रकाश डाला।
भारत ने इन स्तंभों की आर्थिक प्रासंगिकता को रेखांकित किया, विशेष रूप से आपूर्ति-श्रृंखला की मजबूती, कुशल और विश्वसनीय संपर्क विकसित करने तथा बाजार तक अधिक पहुंच के माध्यम से कारोबारी अवसरों के विस्तार के लिए।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय व्यापार में लगने वाले समय और लागत को कम करने में व्यापार सुविधा और डिजिटलीकरण के महत्व पर भी जोर दिया।
इस संदर्भ में, भारत ने सरल सीमा शुल्क प्रक्रियाओं, कागज रहित व्यापार और व्यापार दस्तावेजों के इलेक्ट्रॉनिक आदान-प्रदान के साथ-साथ मजबूत बहु-मॉडल संपर्क और पारगमन समय में कमी का आह्वान किया।
लचीली आपूर्ति श्रृंखलाओं और उभरते क्षेत्रों पर ध्यान
भारत ने कृषि, महत्वपूर्ण खनिजों, फार्मास्यूटिकल्स, विनिर्माण और इलेक्ट्रॉनिक्स सहित रणनीतिक और उभरते क्षेत्रों में आपूर्ति श्रृंखलाओं में विविधता लाने और उन्हें मजबूत करने के लिए एससीओ सदस्य देशों के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया।
देश ने ऊर्जा सुरक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा और हरित हाइड्रोजन में बढ़े हुए सहयोग के अवसरों पर भी प्रकाश डाला।
भारत ने छोटे व्यवसायों को क्षेत्रीय और वैश्विक व्यापार में अधिक प्रभावी ढंग से भाग लेने में सक्षम बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया। इसने विशेष रूप से एमएसएमई और स्टार्ट-अप के लिए डिजिटल भुगतान, सीमा-पार भुगतान और सुलभ व्यापार वित्त की भूमिका पर प्रकाश डाला।
भारत ने वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में एससीओ अर्थव्यवस्थाओं की अधिक भागीदारी का भी आह्वान किया और विश्व व्यापार संगठन (WTO) को केन्द्र में रखते हुए एक खुले, समावेशी और नियम-आधारित बहुपक्षीय व्यापार प्रणाली के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
एससीओ ने वक्तव्य और कार्य योजना को अपनाया
मंत्रियों ने ‘शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों के Foreign Economic and Foreign Trade Activity गतिविधियों के लिए जिम्मेदार मंत्रियों का वक्तव्य’ अपनाया।
उन्होंने एससीओ सदस्य देशों के बहुपक्षीय व्यापार और आर्थिक सहयोग कार्यक्रम के कार्यान्वयन के लिए 2026–2030 की ‘कार्य योजना’ को भी एससीओ सदस्य देशों की सरकारों के प्रमुखों (प्रधानमंत्रियों) की परिषद द्वारा आगे अनुमोदन के लिए सहमति दी।
मंत्रियों ने ‘रचनात्मक अर्थव्यवस्था के विकास पर शंघाई सहयोग संगठन के सदस्य देशों के विशेष कार्य समूह के विनियम’ को मंजूरी दी।
उन्होंने एससीओ बिजनेस काउंसिल के प्रतिनिधि द्वारा उसकी गतिविधियों के संबंध में प्रस्तुत जानकारी और एससीओ आर्थिक विश्लेषण केंद्रों के संघ के कार्य पर ताजिक पक्ष द्वारा प्रदान की गई जानकारी का भी संज्ञान लिया।
मंत्रियों ने निर्णय लिया कि अगली मंत्रिस्तरीय बैठक 2027 में उज्बेकिस्तान में आयोजित की जाएगी।
(Input from DD News)
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