PM । Mann Ki Baat । AI । International Year of Millets: प्रधानमंत्री मोदी ने आकाशवाणी पर मन की बात कार्यक्रम में अपने विचार साझा किए

PM । Mann Ki Baat । AI । International Year of Millets: प्रधानमंत्री मोदी ने आकाशवाणी पर मन की बात कार्यक्रम में अपने विचार साझा किए

नई दिल्ली। PM नरेन्द्र मोदी ने आज कहा कि ‘Mann Ki Baat’ ने 12 वर्ष पूरे कर लिए हैं और यह यात्रा उनके लिए तीर्थयात्रा जैसी रही है। आकाशवाणी पर अपने ‘मन की बात’ कार्यक्रम के माध्यम से राष्ट्र को संबोधित करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि ‘Mann Ki Baat’ की शुरुआत 12 वर्ष पहले विजयादशमी के शुभ अवसर पर हुई थी। तब से यह यात्रा बिना किसी रुकावट के जारी है।

PM ने कहा कि ‘मन की बात’ के श्रोता उनके सहयात्री और मार्गदर्शक दोनों हैं। उन्होंने आगे कहा कि ‘Mann Ki Baat’ देश के आम लोगों की मेहनत, शौर्य, प्रतिबद्धता, समर्पण और सेवा भावना का गर्व के साथ उत्सव मनाने का एक शुभ अवसर रहा है। श्री मोदी ने कहा कि लोगों के प्रयासों को करीब से समझना और उनके योगदान को नमन करना उनके लिए तीर्थयात्रा जैसा रहा है। उन्होंने कहा कि जो लोग समाज और राष्ट्र के लिए जीते हैं, वे स्वयं एक ‘तीर्थ’ हैं। उन्होंने यह भी कहा कि ‘मन की बात’ के माध्यम से वह भारत के लोगों की सामूहिक शक्ति को नमन कर रहे हैं।

PM ने कहा कि ‘मन की बात’ उन्हें देश के प्रत्येक परिवार से जुड़ने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने कहा कि यह गहरा जुड़ाव और सभी श्रोताओं द्वारा दिखाया गया स्नेह एक अमूल्य खजाना है। यह कहते हुए कि देश में कई पारंपरिक कौशल हैं जो पीढ़ियों से उसकी पहचान का हिस्सा रहे हैं, प्रधानमंत्री मोदी ने पंजाब में चल रही एक पहल पर प्रकाश डाला। ‘खेती विरासत मिशन’ नामक एक संगठन ने जैविक खेती और पारंपरिक कृषि पद्धतियों में नई जान फूंकने की शुरुआत की है। टीम का उद्देश्य पंजाब के मालवा क्षेत्र में प्राकृतिक कपास की खेती को बढ़ावा देना था और इस पहल का नाम ‘नव-त्रिंजन’ रखा गया है।

इस परियोजना के तहत प्राकृतिक रंगों वाली जैविक कपास की खेती की जाती है, जिससे तैयार धागे या कपड़े को रंगने के लिए अतिरिक्त रसायनों की आवश्यकता समाप्त हो जाती है। ‘नव-त्रिंजन’ ने बुनाई की कला को अगली पीढ़ी तक पहुंचाने के उद्देश्य से एक बुनाई विद्यालय भी स्थापित किया। श्री मोदी ने बताया कि किस तरह एक मजदूर रामनदीप कौर, घरेलू सहायिका सुनेहा देवी और दिहाड़ी मजदूर रजनी कौर अब कुशल बुनकर के रूप में पहचानी जा रही हैं और इस नई अर्जित कुशलता के माध्यम से अपने परिवारों का सहारा बन रही हैं। उन्होंने यह भी बताया कि रेखा रानी द्वारा बुनी गई एक शॉल भारत की राष्ट्रपति को भेंट की गई है। उन्होंने कुछ महीने पहले राष्ट्रीय हथकरघा दिवस पर इस टीम से हुई अपनी मुलाकात को याद किया। उन्होंने पूरी टीम को उज्ज्वल भविष्य के लिए हार्दिक शुभकामनाएं दीं।

प्रकृति के संरक्षण की बात करते हुए श्री मोदी ने उत्तराखंड के टिहरी गढ़वाल क्षेत्र में ‘हेवल’ नदी और आसपास के प्राकृतिक जल स्रोतों में नई जान डालने के प्रयासों पर प्रकाश डाला। उन्होंने स्थानीय प्रशासन और उन ग्रामीणों की सराहना की, जिन्होंने हेवल नदी को बचाने के लिए अभियान शुरू किया। वर्षा जल को संचित करने, भूजल पुनर्भरण को बढ़ावा देने और बड़ी संख्या में पेड़ लगाने के उपाय किए गए। श्री मोदी ने संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि इन प्रयासों के कारण हेवल नदी को पुनर्जीवित किया गया है और दर्जनों प्राकृतिक जल स्रोतों के पुनरुद्धार में मदद मिली है।

PM ने कहा कि दीपावली और छठ जैसे त्योहारों से पहले कई स्थानों पर स्वच्छता अभियान चलाए जा रहे हैं। उन्होंने उन स्थानों की स्वच्छता बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया, जहां लोग रहते हैं। उन्होंने कहा कि छोटे-छोटे व्यक्तिगत प्रयास आसपास के वातावरण में महत्वपूर्ण बदलाव ला सकते हैं। प्रधानमंत्री ने खुशी व्यक्त की कि इस त्योहारी मौसम में खरीदारी के दौरान लोग स्वदेशी उत्पादों को बहुत महत्व दे रहे हैं। उन्होंने कहा कि ‘वोकल फॉर लोकल’ की यह भावना भारतीय उत्पादों को वैश्विक बाजारों तक पहुंचा रही है। उन्होंने बताया कि बिहार के पूर्णिया का मखाना अब ग्रीस पहुंच रहा है और कर्नाटक के कलबुर्गी की अरहर दाल मालदीव को निर्यात की जा रही है। उन्होंने रेखांकित किया कि भारतीय किसानों के लिए नए वैश्विक बाजार खुल रहे हैं।

श्री मोदी ने जोर देकर कहा कि किसी उत्पाद की पैकेजिंग उसकी गुणवत्ता जितनी ही महत्वपूर्ण है। उन्होंने महाराष्ट्र के जनजातीय समुदायों का उदाहरण दिया, जिन्होंने अपने द्वारा बनाए जाने वाले उत्पादों की पैकेजिंग पर विशेष ध्यान दिया है। ‘शबरी नेचुरल्स’ नामक पहल के माध्यम से शहद, महुआ, चिरौंजी और बांस से बने उत्पादों को ऐसी पैकेजिंग के साथ बाजार में लाया जा रहा है, जो उनकी जनजातीय कला को दर्शाती है। श्री मोदी ने बताया कि इस पैकेजिंग को जापान का प्रतिष्ठित ‘गुड डिजाइन अवॉर्ड’ मिला है। प्रधानमंत्री मोदी ने कर्नाटक के एक ‘बांस’ स्टार्ट-अप के बारे में भी बात की, जो बांस और कृषि अवशेषों से पैकेजिंग सामग्री तैयार कर रहा है।

श्री मोदी ने खुशी व्यक्त की कि इस वर्ष गांधी जयंती पर खादी ग्राम उद्योग के उत्पादों की बिक्री एक ही दिन में 28 करोड़ रुपये को पार कर गई। यह पिछले वर्ष की तुलना में 1.5 करोड़ रुपये की वृद्धि है। उन्होंने कहा कि खादी की लोकप्रियता लगातार बढ़ रही है और इसका लाभ उन लोगों तक पहुंच रहा है जो खादी और विभिन्न हस्तशिल्प को जीवंत बनाते हैं। श्री मोदी ने लोगों से त्योहारी मौसम में स्थानीय कारीगरों द्वारा बनाए गए उत्पादों को प्राथमिकता देने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि इससे ‘वोकल फॉर लोकल’ आंदोलन और मजबूत होगा और ‘आत्मनिर्भर भारत’ का सपना जल्द साकार होगा।

ई-संजीवनी योजना के बारे में बात करते हुए PM श्री मोदी ने संतोष व्यक्त किया कि लोगों का जीवन आसान बनाने के लिए अब तक इस मंच के माध्यम से लगभग 50 करोड़ टेली-परामर्श किए जा चुके हैं। श्री मोदी ने कहा कि यह प्रौद्योगिकी की शक्ति, डॉक्टरों के समर्पण और लोगों द्वारा इस प्रणाली में जताए गए विश्वास का उत्कृष्ट प्रमाण है। उन्होंने बताया कि अपने व्यापक नेटवर्क के माध्यम से ‘ई-संजीवनी’ सेवा देश के सबसे दूरदराज के इलाकों तक भी पहुंची है। उन्होंने इससे लाभान्वित हुए कुछ लोगों की कहानियां साझा कीं। अंडमान और निकोबार द्वीप समूह में बाराटांग द्वीप के जरावा जनजाति के ओहो-तहाने को तेज बुखार था। स्थानीय स्वास्थ्य कर्मियों ने ई-संजीवनी के माध्यम से एक विशेषज्ञ डॉक्टर से परामर्श किया। बच्चे को निमोनिया था। विशेषज्ञ डॉक्टर की देखरेख में आने के बाद मरीज की स्थिति तेजी से सुधरने लगी।

लक्षद्वीप के कल्पेनी में 60 वर्षीय कुन्ही कोया अचानक बीमार पड़ गए। ई-संजीवनी के माध्यम से कवरत्ती में समुद्र पार स्थित एक अनुभवी डॉक्टर से संपर्क स्थापित किया गया। अनुभवी डॉक्टर ने स्थानीय चिकित्सा टीम को मार्गदर्शन दिया, जिससे कुन्ही कोया को राहत मिली। लद्दाख के जांस्कर में कुंजांग डोलमा को गर्भावस्था के दौरान जटिलताओं का सामना करना पड़ा। एक विशेषज्ञ डॉक्टर ने ई-संजीवनी के माध्यम से उन्हें तत्काल सहायता प्रदान की। नगालैंड के पेरेन में 12 वर्षीय मुसहेम कान के संक्रमण और बुखार से पीड़ित था। ई-संजीवनी की मदद से विशेषज्ञ डॉक्टर उसकी स्थिति का तुरंत निदान करने और उचित दवा की सलाह देने में सक्षम हुए।

श्री मोदी ने कहा कि एक समय था जब सामान्य स्वास्थ्य जांच या डॉक्टर के पास जाना भी काफी समय लेता था और इसमें काफी कठिनाई होती थी। उन्होंने कहा कि आज देश भर में लगभग एक लाख नब्बे हजार ‘आयुष्मान आरोग्य मंदिर’ लोगों के जीवन में नई सुविधाएं लेकर आए हैं। उन्होंने कहा कि ये आरोग्य मंदिर एक तरह से ग्राम पंचायतों के लिए वेलनेस सेंटर के रूप में विकसित हो रहे हैं।

इस महीने की शुरुआत में चेन्नई की अपनी यात्रा को याद करते हुए श्री मोदी ने कहा कि उन्होंने देश के कई वैज्ञानिकों, शोधकर्ताओं और युवा प्रतिभाओं से मुलाकात की। उन्होंने कहा कि देश के युवा वर्तमान में ऐसे विषयों पर काम कर रहे हैं, जिनमें मानवता के भविष्य को बदलने की क्षमता है। उन्होंने ‘ब्रेन रिसर्च’ को ऐसे ही एक क्षेत्र के रूप में बताया। श्री मोदी ने IIT मद्रास में ‘सुधा गोपालकृष्णन ब्रेन सेंटर’ का उद्घाटन किया था। इस केन्द्र ने एक ब्रेन-इमेजिंग प्रौद्योगिकी मंच विकसित किया है, जो वैश्विक मानक के रूप में काम करता है। इसके माध्यम से मानव मस्तिष्क की उच्च-रिजॉल्यूशन वाली डिजिटल 3D छवियां बनाई जा रही हैं, जिसका उद्देश्य 100 मानव मस्तिष्कों का बारीकी से मानचित्रण और अध्ययन करना है।

PM ने कहा कि यह दुनिया में अपनी तरह का पहला मिशन है, जिसमें ‘परम शक्ति’ सुपरकंप्यूटर का उपयोग किया जा रहा है। उन्होंने कहा कि इस ब्रेन सेंटर की स्थापना में सरकार के सहयोग से देश के उद्योग जगत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। कई IIT पूर्व छात्र और शिक्षाविद भी इस शोध केंद्र को समर्थन देने के लिए एक साथ आए हैं। उन्होंने इस परियोजना के महत्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि मानव मस्तिष्क अभी भी एक प्रमुख वैज्ञानिक रहस्य बना हुआ है। उन्होंने कहा कि आज भी अल्जाइमर और डिमेंशिया जैसी बीमारियों का कोई निश्चित इलाज उपलब्ध नहीं है। यह भी तय किया गया है कि 100 मानव मस्तिष्कों से प्राप्त यह डेटा विभिन्न क्षेत्रों में अनुसंधान के लिए ओपन-सोर्स संसाधन के रूप में उपलब्ध कराया जाएगा।

अंगदान के विषय पर बात करते हुए प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस तरह के उन्नत अनुसंधान में इसकी महत्वपूर्ण भूमिका है। उन्होंने मध्य प्रदेश के नर्मदापुरम की शिवानी का उदाहरण दिया, जिनकी एक सड़क दुर्घटना हो गई थी और उनके परिवार ने उनके अंगदान का निर्णय लिया। श्री मोदी ने उनके परिवार की सराहना करते हुए कहा कि मानवता की ऐसी भावना किसी परिवार के जीवन में फिर से खुशियां ला सकती है और साथ ही अनुसंधान प्रयासों को महत्वपूर्ण सहायता प्रदान कर सकती है।

PM ने चेन्नई की अपनी यात्रा के कुछ अन्य अनुभव भी साझा किए। पहला अनुभव मेट्रो में युवाओं के साथ उनकी बातचीत का था, जबकि दूसरा IIT मद्रास की उनकी यात्रा का। श्री मोदी ने बताया कि जिन स्टार्ट-अप्स से उन्होंने मुलाकात की, उनमें से एक सोने की गुणवत्ता की जांच करने पर केन्द्रित है, जो सोने की खरीद में धोखाधड़ी को रोकने में मदद कर सकता है। उन्होंने कहा कि एक अन्य टीम ऐसा मंच विकसित कर रही है, जो बैंक धोखाधड़ी में खोई गई धनराशि की तेजी से वसूली में सक्षम बना सकता है। उन्होंने आगे कहा कि एक अन्य टीम यह पता लगा रही है कि सर्वाइकल कैंसर की जांच में AI किस प्रकार सहायता कर सकता है।

श्री मोदी ने कहा कि IIT में हुई बातचीत पूरी तरह ‘डीप-टेक’ पर केंद्रित थी। इन स्टार्ट-अप्स को IIT मद्रास के इनक्यूबेशन इकोसिस्टम का समर्थन मिल रहा है। उन्होंने बताया कि जहां एक स्टार्ट-अप समुद्र के ऊपर उड़ने में सक्षम इलेक्ट्रिक वाहन विकसित कर रहा है, वहीं एक अन्य स्टार्ट-अप ड्रोन और इलेक्ट्रिक वाहनों के लिए फास्ट-चार्जिंग बैटरियां विकसित कर रहा है। उन्होंने कहा कि एक टीम रक्षा प्रौद्योगिकी में AI के अनुप्रयोग पर काम कर रही है।

PM श्री मोदी ने कहा कि आज युवा ऐसी असाधारण उपलब्धियां सही माहौल और समर्थन के कारण हासिल कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि 31 अक्टूबर को राष्ट्र महान भारतीय वैज्ञानिक नरिंदर सिंह कपानी की 100वीं जयंती मनाएगा। दुनिया उन्हें ‘फाइबर ऑप्टिक्स के जनक’ के रूप में जानती है। उनका जन्म पंजाब के मोगा जिले में हुआ था। श्री मोदी ने कहा कि पतले रेशों के माध्यम से प्रकाश के संचार की तकनीक पर उनके उन्नत शोध ने संचार की दुनिया को नई दिशा दी। उन्होंने नरिंदर सिंह कपानी को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने देश के युवाओं से उनके जैसे वैज्ञानिकों के बारे में पढ़ने और जानने तथा उनसे प्रेरणा लेने का आग्रह किया।

सरदार वल्लभभाई पटेल की जयंती 31 अक्टूबर को मनाई जाएगी। इस दिन देश ‘एकता दिवस’ मनाता है। प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि इस दिन देश भर में ‘रन फॉर यूनिटी’ का आयोजन किया जाता है। उन्होंने कहा कि ‘रन फॉर यूनिटी’ राष्ट्र की एकता को मजबूत करने और राष्ट्र के प्रति प्रतिबद्धता को फिर से पुष्ट करने का अवसर प्रदान करता है। उन्होंने सभी से इस वर्ष की ‘रन फॉर यूनिटी’ में उत्साहपूर्वक भाग लेने का आग्रह किया।

‘मन की बात’ के इस एपिसोड में प्रधानमंत्री मोदी ने मिलेट्स के बारे में भी बात की और बताया कि भारत के आह्वान पर 2023 को ‘International Year of Millets’ के रूप में मनाया गया था। उन्होंने कहा कि इसे वैश्विक स्तर पर बहुत सकारात्मक प्रतिक्रिया मिली। इस पहल के माध्यम से लोगों ने जाना कि मिलेट्स देश की अपनी संस्कृति में कितनी गहराई से जड़ें जमाए हुए हैं। श्री मोदी ने कहा कि पूर्वोत्तर में भी मिलेट्स की खेती की समृद्ध परंपरा रही है। उन्होंने कहा कि लोग इससे दूर होने लगे थे, लेकिन अब स्थिति बदल रही है।

उन्होंने मेघालय के वेस्ट जैंतिया हिल्स जिले के खांडुली नामक एक गांव का उल्लेख किया, जहां कई पीढ़ियों से मिलेट्स खाद्य संस्कृति का अभिन्न हिस्सा रहे हैं। कुछ समय से मिलेट्स की खेती करने वाले किसानों की संख्या घट रही थी। श्री मोदी ने कहा कि गांव की दो महिलाओं ने मिलेट्स से नए उत्पाद बनाने की नई पहल शुरू की। इन अनाजों में मूल्य संवर्धन करते हुए उन्होंने कुकीज, केक और मफिन के साथ-साथ शिशु आहार जैसे उत्पाद विकसित किए। इससे मिलेट आधारित उत्पादों की बिक्री में वृद्धि हुई और इसके बाद खुद मिलेट्स की मांग भी बढ़ गई।

श्री मोदी ने मेघालय के वेस्ट गारो हिल्स जिले के सादोलपारा गांव के स्थानीय किसान चेकजिंग संगमा का भी उल्लेख किया। मिलेट्स के महत्व को समझते हुए चेकजिंग संगमा ने आधुनिक तरीकों से इसकी खेती शुरू की। इससे न केवल उनकी आय बढ़ी, बल्कि गांव में अधिक जागरूकता भी पैदा हुई। श्री मोदी ने नगालैंड के कोहिमा में केजोमा नामक एक गांव का भी उल्लेख किया, जहां एक दशक से अधिक समय से मिलेट्स की खेती बंद थी। 2024 में स्थानीय समुदाय ने फिर से मिलेट्स की खेती शुरू की। 2025 में केजोमा ने अपना पहला मिलेट्स महोत्सव मनाया। अब इस क्षेत्र में भी मिलेट्स से बने उत्पादों की मांग तेजी से बढ़ रही है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ये उदाहरण दर्शाते हैं कि भारत के युवा पारंपरिक फसलों को नए अवसरों से जोड़ रहे हैं और गांव अपनी विरासत को संरक्षित करते हुए समृद्धि के मार्ग पर आगे बढ़ रहे हैं।

महर्षि वाल्मीकि की जयंती कल, 26 अक्टूबर को मनाई जाएगी। प्रधानमंत्री ने कहा कि हालांकि हजारों वर्ष बीत चुके हैं, फिर भी महर्षि वाल्मीकि की रामायण आज भी नई अंतर्दृष्टि प्रदान करती है। उन्होंने कहा कि रामायण के माध्यम से महर्षि वाल्मीकि ने दृढ़ता, सेवा, करुणा और सामाजिक सद्भाव के मूल्य सहित जीवन के गहन पाठ दिए हैं। श्री मोदी ने कहा कि वाल्मीकि रामायण में भगवान राम का चरित्र इन मूल्यों का सुंदर प्रतिरूप प्रस्तुत करता है। उन्होंने कहा कि भगवान राम ने माता शबरी के प्रेम और भक्ति को स्वीकार किया तथा निषादराज की मित्रता का सम्मान किया।

PM ने कहा कि सभी को साथ लेकर चलने की भावना आज भी लोगों का मार्गदर्शन करती है। उन्होंने कहा कि यह भावना अयोध्या के भव्य राम मंदिर में भी दिखाई देती है, जहां महर्षि वाल्मीकि, निषादराज और माता शबरी को समर्पित मंदिर भी बनाए गए हैं। उन्होंने यह जानकर प्रसन्नता व्यक्त की कि अयोध्या के हवाई अड्डे का नाम महर्षि वाल्मीकि के नाम पर रखा गया है। PM ने कहा कि देश 4 नवंबर को भाई परमानंद की 150वीं जयंती मनाएगा। उन्होंने कहा कि आर्य समाज के साथ भाई परमानंद का जुड़ाव उनके लिए प्रेरणा और आदर्शों का एक प्रमुख स्रोत था। 20वीं सदी के बिल्कुल शुरुआती दौर में भाई परमानंद आर्य समाज के कार्य के लिए दक्षिण अफ्रीका गए थे, जहां उनकी महात्मा गांधी से भी मुलाकात हुई थी।

उन्होंने गुयाना में ‘गिरमिटिया’ समुदाय के बीच भी काम किया, जो उस समय आर्य समाज का एक महत्वपूर्ण केंद्र था। श्री मोदी ने कहा कि गुयाना की अपनी यात्रा के दौरान उन्हें आर्य समाज स्मारक जाने का सौभाग्य मिला। उन्होंने कहा कि भाई परमानंद ने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। वह गदर पार्टी के संस्थापक सदस्यों में से एक थे। स्वतंत्रता संग्राम पर उनका प्रभाव इतना गहरा था कि ब्रिटिश अधिकारियों ने उन्हें ‘काला पानी’ की सजा सुनाई।

उन्होंने ‘आपबीती: काले पानी की कारावास कहानी’ नामक पुस्तक लिखी। श्री मोदी ने इस पुस्तक को स्वतंत्रता सेनानियों द्वारा किए गए बलिदानों को सही मायने में समझने के लिए अवश्य पढ़ी जाने वाली पुस्तक बताया। अपनी सजा पूरी करने के बाद भाई परमानंद ने अपना ध्यान शिक्षा के क्षेत्र की ओर केंद्रित किया और भगत सिंह को भी पढ़ाया। बाद के वर्षों में वह कई वर्षों तक हिंदू महासभा से जुड़े रहे। श्री मोदी ने भाई परमानंद को श्रद्धांजलि अर्पित की और युवाओं से उनके बारे में जानने तथा दूसरों को भी प्रेरित करने का आग्रह किया।

अपने ‘मन की बात’ संबोधन के समापन पर प्रधानमंत्री ने लोगों को दीपावली और छठ सहित आगामी त्योहारों के लिए शुभकामनाएं दीं। उन्होंने आशा व्यक्त की कि लोग स्वस्थ और सुरक्षित रहते हुए इन त्योहारों को मनाएंगे। उन्होंने यह भी कहा कि वह ‘मन की बात’ के लिए लोगों के संदेश और सुझाव प्राप्त करने के लिए उत्सुक हैं।

(Input from News on Air) 

 

Sanjay Sharan

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