नई दिल्लीः उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग द्वारा गुरुवार को जारी आंकड़ों के अनुसार, भारत की थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित मुद्रास्फीति (Inflation) अप्रैल 2026 में वार्षिक आधार पर तेज़ी से बढ़कर 8.3 प्रतिशत के आंकड़े को छू लिया। यह वृद्धि मुख्य रूप से खनिज तेल, कच्चे पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस, बेसिक मेटल्स तथा विनिर्मित उत्पादों की कीमतों में बढ़ोतरी के कारण दर्ज की गई।
WPI आधारित मुद्रास्फीति मार्च 2026 में 3.88 फीसद तथा फरवरी 2026 में 2.26 फीसद रही थी।
आधिकारिक विज्ञप्ति के अनुसार, मुद्रास्फीति में वृद्धि का मुख्य कारण ईंधन एवं बिजली श्रेणी में कीमतों में तीव्र उछाल रहा, जहां अप्रैल में मुद्रास्फीति बढ़कर 24.71 फीसद हो गई, जबकि मार्च में यह 1.05 फीसद थी।
इस प्रकार समग्र WPI सूचकांक मार्च के 160.8 से बढ़कर अप्रैल में 167 हो गया, जो मासिक आधार पर 3.86 फीसद की वृद्धि को दर्शाता है।
प्राथमिक वस्तुओं की श्रेणी में अप्रैल के दौरान मुद्रास्फीति 9.17 फीसद दर्ज की गई, जबकि विनिर्मित उत्पादों में यह 4.62 फीसद रही।
ईंधन एवं ऊर्जा खंड में खनिज तेलों की कीमतों में तेज वृद्धि दर्ज की गई, जबकि बिजली की कीमतों में मासिक आधार पर मामूली गिरावट देखी गई है।
कच्चे पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस की मुद्रास्फीति अप्रैल में 67.18 फीसद रही, जबकि केवल कच्चे पेट्रोलियम की कीमतों में वार्षिक आधार पर 88.06 फीसद की वृद्धि दर्ज की गई।
खाद्य वस्तुओं में, WPI खाद्य सूचकांक मार्च के 1.85 फीसद से बढ़कर अप्रैल में 2.31 फीसद हो गया। सब्जियों, फलों, अंडों, मांस और मछली की कीमतों में वृद्धि दर्ज की गई, जबकि दालों एवं प्याज में नकारात्मक मुद्रास्फीति का रुझान जारी रहा।
रिपोर्ट के अनुसार, विनिर्मित उत्पादों की मुद्रास्फीति बढ़कर 4.62 फीसद हो गई, जिसका मुख्य कारण बेसिक मेटल्स, रसायन एवं रासायनिक उत्पाद, वस्त्र, खाद्य उत्पाद तथा मशीनरी एवं उपकरणों की कीमतों में वृद्धि रही है।
उद्योग और आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग ने बताया कि अप्रैल 2026 के लिए अस्थायी WPI आंकड़े 96.7 फीसद भारित प्रतिक्रिया दर के आधार पर संकलित किया गया, जबकि फरवरी 2026 के अंतिम आंकड़े 97.3 फीसद प्रतिक्रिया दर पर आधारित था।
मई 2026 के WPI आंकड़े 15 जून 2026 को जारी किए जाएंगे।
(Input from DD News)
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