नई दिल्लीः राजस्थान ने शुक्रवार को भारत के तेजी से विकसित हो रहे सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रवेश करते हुए राज्य के पहले सेमीकंडक्टर प्लांट और नए इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर (EMC) का उद्घाटन किया। यह परियोजना उत्तरी भारत में इलेक्ट्रॉनिक्स विनिर्माण को बड़े स्तर पर बढ़ावा देने वाली मानी जा रही है।
Union Electronics and Information Technology Minister श्री अश्विनी वैष्णव ने भीवाड़ी के खुशखेड़ा स्थित सालारपुर में सहस्रा सेमीकंडक्टर्स प्राइवेट लिमिटेड की सेमीकंडक्टर एटीएमपी/ओएसएटी इकाई और एल्सीना इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर प्राइवेट लिमिटेड द्वारा विकसित EMC का वर्चुअल उद्घाटन किया।
इस कार्यक्रम में राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजन लाल शर्मा और केन्द्रीय मंत्री श्री भूपेंद्र यादव भी मौजूद रहे।
श्री वैष्णव ने इसे राजस्थान के लिए “ऐतिहासिक दिन” बताते हुए कहा कि राज्य का सेमीकंडक्टर क्षेत्र में प्रवेश, “मेक इन इंडिया” और “डिजिटल इंडिया” पहल के तहत भारत को वैश्विक इलेक्ट्रॉनिक्स एवं चिप निर्माण केन्द्र बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम है।
केन्द्रीय मंत्री ने कहा कि पिछले 12 वर्षों में भारत का इलेक्ट्रॉनिक्स क्षेत्र तेजी से बढ़ा है। इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पादन लगभग छह गुना बढ़कर करीब 13 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि निर्यात बढ़कर लगभग 4.24 लाख करोड़ रुपये हो गया है। उन्होंने बताया कि मोबाइल फोन अब भारत का सबसे बड़ा निर्यात उत्पाद बन चुका है।
सहस्रा सेमीकंडक्टर्स की नई इकाई भारत की पहली सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम आधारित इकाई है, जिसने सेमीकंडक्टर चिप्स का व्यावसायिक उत्पादन शुरू किया है। यह परियोजना इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय की एसपीईसीएस योजना के तहत 150 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश से स्थापित की गई है।
57,000 वर्ग फुट में फैली इस इकाई में अत्याधुनिक क्लास 10K और 100K क्लीनरूम बनाए गए हैं। यहां माइक्रो एसडी कार्ड, फ्लैश स्टोरेज डिवाइस, एलईडी ड्राइवर आईसी, ई-सिम और आरएफआईडी उत्पादों में उपयोग होने वाली मेमोरी चिप्स की पैकेजिंग किये जाने की योजना है।
वर्तमान में इस इकाई की वार्षिक पैकेजिंग क्षमता 6 करोड़ Semiconductor यूनिट है, जिसे अगले दो से तीन वर्षों में बढ़ाकर 40 से 60 करोड़ यूनिट प्रतिवर्ष करने की योजना है। कंपनी के 60 प्रतिशत से अधिक उत्पाद पहले ही अमेरिका, जर्मनी, फ्रांस, पूर्वी यूरोप, चीन और नेपाल जैसे बाजारों में निर्यात किए जा रहे हैं।
कंपनी भविष्य में एलईडी ड्राइवर चिप्स तथा अन्य उन्नत Semiconductor उत्पादों के अनुसंधान एवं विकास में भी विस्तार करने की योजना बना रही है। साथ ही, यह Semiconductor पैकेजिंग एवं हाई-टेक विनिर्माण में कौशल विकास को भी बढ़ावा देगी।
Semiconductor इकाई के साथ-साथ ईएलसीआईएनए द्वारा विकसित इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग क्लस्टर भी क्षेत्र में एक बड़े इलेक्ट्रॉनिक्स हब के रूप में उभर रहा है। 50.3 एकड़ में फैले इस क्लस्टर की परियोजना लागत 46.09 करोड़ रुपये है, जिसमें केन्द्र सरकार ने EMC योजना के तहत 20.24 करोड़ रुपये की सहायता प्रदान की है।
इस क्लस्टर ने पहले ही 20 कंपनियों से 1,200 करोड़ रुपये से अधिक के प्रस्तावित निवेश आकर्षित किए हैं। ये कंपनियां Semiconductor पैकेजिंग, इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स, ईवी पार्ट्स, RFID तकनीक और औद्योगिक इलेक्ट्रॉनिक्स के क्षेत्र में कार्यरत हैं।
वर्तमान में 11 कंपनियां संचालन शुरू कर चुकी हैं, जिनका कुल निवेश 900 करोड़ रुपये से अधिक है और इससे 2,700 से अधिक लोगों को रोजगार मिला है।
क्लस्टर में कार्यरत प्रमुख कंपनियों में ऐसान फिएम इंडस्ट्रीज, ई-पैक ड्यूरेबल, सहस्र इलेक्ट्रॉनिक्स और इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर स्किल काउंसिल ऑफ इंडिया शामिल हैं।
मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि राजस्थान सरकार की हाल ही में शुरू की गई “Semiconductor नीति 2026” का उद्देश्य दिल्ली-एनसीआर के निकट क्षेत्र को एक प्रमुख विनिर्माण केन्द्र में बदलना है।
श्री यादव ने कहा कि भीवाड़ी, जो पहले ऑटोमोबाइल उद्योग के लिए जाना जाता था, अब Semiconductor और इलेक्ट्रॉनिक्स उद्योग के केन्द्र के रूप में भी उभर रहा है।
वैश्विक परिस्थितियों के मद्देनजर प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी द्वारा ईंधन की खपत कम करने की अपील के बाद यह उद्घाटन समारोह वर्चुअल माध्यम से आयोजित किया गया।
(Input from DD News)
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