नई दिल्ली । Union Agriculture Minister शिवराज सिंह चौहान ने मंगलवार को कहा कि केन्द्र ने प्रधानमंत्री राष्ट्रीय कृषि विकास योजना (PM-RKVY) के तहत 10 राज्यों को 1,200 करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंजूर की है। उन्होंने किसानों की आजीविका और खाद्य सुरक्षा में सुधार के लिए केन्द्र-राज्य के बीच बेहतर समन्वय और “Team Agriculture” दृष्टिकोण अपनाने का आह्वान किया।
मंगलवार को National Agriculture Conference – Rabi Campaign 2026 के दूसरे दिन को संबोधित करते हुए चौहान ने कहा कि कृषि क्षेत्र के सामने आने वाली चुनौतियों से निपटने के लिए केंद्र और राज्यों को राजनीतिक मतभेदों से ऊपर उठकर मिलकर काम करना चाहिए।
उन्होंने कहा, “सरकारें और राजनीतिक दल आते-जाते रहते हैं; दल बनते और भंग होते हैं, लेकिन देश और उसके किसान शाश्वत हैं।” उन्होंने जोर दिया कि सम्मेलन का ध्यान किसानों के हितों को आगे बढ़ाने के लिए व्यावहारिक समाधान पर होना चाहिए।
केन्द्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर और भागीरथ चौधरी, कृषि सचिव अतिश चंद्र, आईसीएआर के महानिदेशक डॉ. एम.एल. जाट के साथ-साथ वरिष्ठ अधिकारियों, वैज्ञानिकों और कृषि संस्थानों के प्रतिनिधियों ने सम्मेलन में भाग लिया।
10 राज्यों के लिए 1,200 करोड़ रुपये की PM-RKVY सहायता
PM-RKVY के तहत 10 राज्यों के कृषि मंत्रियों को स्वीकृति पत्र सौंपे गए। इसके तहत पश्चिम बंगाल को 290 करोड़ रुपये, हरियाणा को 198 करोड़ रुपये, छत्तीसगढ़ को 181 करोड़ रुपये, अरुणाचल प्रदेश को 154 करोड़ रुपये, बिहार को 114 करोड़ रुपये, कर्नाटक को 104 करोड़ रुपये, मिजोरम को 75 करोड़ रुपये, हिमाचल प्रदेश को 64 करोड़ रुपये, झारखंड को 58 करोड़ रुपये और पंजाब को 43 करोड़ रुपये आवंटित किए गए।
चौहान ने कहा कि केंद्र केवल नीतियां बनाने तक सीमित नहीं है, बल्कि राज्यों को समय पर संसाधनों की उपलब्धता भी सुनिश्चित कर रहा है, ताकि योजनाओं को बिना देरी के लागू किया जा सके।
कृषि वृद्धि बढ़कर 4.5 फीसदी हुई
कृषि क्षेत्र के प्रदर्शन को रेखांकित करते हुए चौहान ने कहा कि इसकी वृद्धि दर 2015 में 3 फीसदी से बढ़कर 4.5 फीसदी हो गई है।
उन्होंने कहा कि खाद्यान्न उत्पादन में औसत वार्षिक वृद्धि दोगुने से अधिक हो गई है, जो लगभग 40 लाख टन से बढ़कर 84 लाख टन प्रति वर्ष हो गई है।
मंत्री ने कहा कि 2023-24 और 2025-26 के बीच रबी खाद्यान्न उत्पादन में 205 लाख टन की वृद्धि हुई। उन्होंने इस वृद्धि का श्रेय राज्य कृषि विभागों, वैज्ञानिकों और किसानों के सामूहिक प्रयासों को दिया।
केन्द्र-राज्य समन्वय मजबूत करने के लिए मासिक समीक्षा
चौहान ने कृषि कार्यक्रमों की निगरानी और सहकारी संघवाद को मजबूत करने के लिए राज्यों के साथ नियमित मासिक वर्चुअल समीक्षा बैठकें आयोजित करने की घोषणा की।
राज्य स्तर पर एक राज्य कृषि टीम में कृषि मंत्री, कृषि सचिव, राज्य कृषि विश्वविद्यालयों, ICAR संस्थानों, कृषि विज्ञान केंद्रों (KVKs), ATMA, किसान उत्पादक संगठनों (FPOs), प्रगतिशील किसानों, प्रसंस्करणकर्ताओं, निर्यातकों और केंद्र सरकार के नोडल अधिकारियों को शामिल किया जाएगा।
जिला स्तर पर मासिक बैठकों में कलेक्टर, कृषि उप निदेशक, ATMA, KVKs, ICAR वैज्ञानिक, बैंकर और किसान शामिल होंगे।
खरीफ और रबी की तैयारियों के लिए वार्षिक कैलेंडर
कृषि अभियानों की अग्रिम योजना बनाने में सुविधा के लिए मंत्री ने सीजन से पहले होने वाली समन्वय बैठकों के लिए वार्षिक कैलेंडर की घोषणा की।
खरीफ अभियान के लिए हर वर्ष 10 मई को जिला स्तर की बैठकें और 17 मई को राज्य स्तर की बैठकें आयोजित की जाएंगी। रबी अभियान के लिए जिला स्तर की बैठकें 10 सितंबर को और राज्य स्तर की बैठकें 17 सितंबर को आयोजित की जाएंगी।
किसानों से संबंधित मुद्दों पर चर्चा के लिए कृषि मंत्रियों, अधिकारियों और कृषि वैज्ञानिकों को एक साथ लाते हुए देशभर में एक समान तिथि पर एक विशेष एक दिवसीय बैठक भी आयोजित की जाएगी।
22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक ‘खेत बचाओ अभियान’
चौहान ने मृदा स्वास्थ्य और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने के लिए 22 अक्टूबर से 30 नवंबर तक देशव्यापी ‘खेत बचाओ अभियान’ चलाने का भी आह्वान किया।
इस अभियान में वैज्ञानिकों और अन्य हितधारकों को शामिल किया जाएगा तथा संतुलित उर्वरक उपयोग को प्रोत्साहित करने के लिए मृदा स्वास्थ्य कार्ड का उपयोग किया जाएगा, जिसका उद्देश्य मिट्टी की उर्वरता और लाभकारी कीटों की रक्षा करना है।
उन्होंने धान की कटाई के बाद पूर्वी भारत के धान परती क्षेत्रों, विशेष रूप से झारखंड, बिहार, ओडिशा और पश्चिम बंगाल में बड़े पैमाने पर दलहन की खेती को बढ़ावा देने का भी आह्वान किया।
रबी रणनीति में मिट्टी, पानी और फसल सुरक्षा पर ध्यान
वर्तमान रबी मौसम के लिए चौहान ने कहा कि फसल और उन्नत बीजों की सिफारिशें मिट्टी की नमी और पानी की उपलब्धता के आधार पर की जानी चाहिए।
राज्यों को फसलों को रोगों और कीटों से बचाने के लिए व्यवस्थाओं को मजबूत करने, किसान क्रेडिट कार्ड (KCC) के लिए सभी पात्र किसानों को कवर करना सुनिश्चित करने और फसल बीमा योजना के तहत पारदर्शी फसल कटाई प्रयोग (CCEs) आयोजित करने के निर्देश दिए गए।
उन्होंने राज्य के कृषि मंत्रियों से विभागीय योजनाओं के क्रियान्वयन की नियमित रूप से व्यक्तिगत रूप से समीक्षा करने का भी आह्वान किया।
नकली कृषि आदानों के खिलाफ कार्रवाई
चौहान ने कहा कि बीज और उर्वरकों की उपलब्धता पर्याप्त है और राज्यों को नकली उर्वरकों, मिलावटी बीजों और घटिया कीटनाशकों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया।
उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जबरन टैगिंग को पूरी तरह समाप्त किया जाए।
अधिक टिकाऊ और लाभकारी कृषि क्षेत्र का आह्वान करते हुए मंत्री ने राज्यों से प्राकृतिक खेती, एकीकृत कृषि प्रणालियों और फसल विविधीकरण को मिशन मोड में बढ़ावा देने का आग्रह किया।
बेहतर कीमतों और वैश्विक बाजारों पर ध्यान
चौहान ने कहा कि सरकार किसानों के लिए उचित और लाभकारी मूल्य सुनिश्चित करने के लिए बहुआयामी रणनीति अपना रही है, जिसमें फसल कटाई के बाद प्रबंधन, वैज्ञानिक भंडारण और बेहतर विपणन प्रणालियों पर जोर दिया जा रहा है।
उन्होंने कहा कि तुअर, उड़द और मसूर की MSP पर 100 प्रतिशत सुनिश्चित सरकारी खरीद की जाएगी और किसानों को 48 घंटे के भीतर भुगतान की व्यवस्था की जाएगी।
चौहान ने अंतरराष्ट्रीय मुक्त व्यापार समझौतों (FTAs) से उभर रहे अवसरों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि भारत नए बाजारों तक पहुंच का लाभ उठाते हुए अपने कृषि उत्पादों, जिनमें फल, सब्जियां और खाद्यान्न शामिल हैं, को वैश्विक बाजारों से जोड़ने का प्रयास करेगा।
मंत्री ने कहा कि अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक अधिक पहुंच से किसानों को बेहतर रिटर्न हासिल करने में मदद मिल सकती है और भारत दुनिया के लिए एक प्रमुख “फूड बास्केट” के रूप में उभर सकता है।
(Input from DD News)
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