नई दिल्ली । भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने बुधवार को चुनौतीपूर्ण वैश्विक माहौल के बीच प्रमुख नीतिगत दर में 25 आधार अंकों की बढ़ोतरी की घोषणा की, जिससे यह बढ़कर 5.50 फीसदी हो गई।
मौद्रिक नीति समिति का यह निर्णय अगस्त की नीति से बदलाव को दर्शाता है, जब उसने Repo Rate को 5.25 फीसदी पर अपरिवर्तित रखा था।
Repo Rate में बढ़ोतरी के बाद स्थायी जमा सुविधा दर 5.25 फीसदी है, जबकि सीमांत स्थायी सुविधा दर और बैंक दर 5.75 फीसदी है।
RBI की मौद्रिक नीति समिति ने चालू वित्त वर्ष 2026-27 के लिए देश की वास्तविक जीडीपी वृद्धि का अनुमान भी 40 आधार अंक बढ़ाकर 7.1 फीसदी कर दिया। उसने वैश्विक प्रतिकूल परिस्थितियों के बावजूद आर्थिक गतिविधियों की मजबूती का हवाला दिया। उन्होंने आगे कहा कि भू-राजनीतिक तनाव, अंतरराष्ट्रीय स्तर पर ऊंची जिंस कीमतें, वैश्विक व्यापार में अतिरिक्त अड़चनें और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियों में सख्ती भारत की वृद्धि की संभावनाओं पर असर डाल सकती हैं।
आरबीआई ने वित्त वर्ष 2026-27 के लिए उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) मुद्रास्फीति का अनुमान 5.2 फीसदी लगाया है। तीसरी तिमाही में मुद्रास्फीति के बढ़कर 6 प्रतिशत होने की उम्मीद है, जिसका मुख्य कारण खाद्य और ईंधन की कीमतों का व्यापक दबाव तथा आपूर्ति पक्ष से जुड़े बढ़े हुए जोखिम हैं।
इसके अलावा, सीपीआई मुद्रास्फीति जुलाई के 4.45 फीसदी से बढ़कर अगस्त में 4.82 फीसदी हो गई। वहीं, मजबूत El Nino जैसी परिस्थितियां और अक्टूबर में सामान्य से कम बारिश रबी उत्पादन के लिए और जोखिम पैदा कर सकती हैं।
इसके अलावा, कच्चे तेल की बढ़ती कीमतों, मुद्रास्फीति और वैश्विक स्तर पर बॉन्ड प्रतिफल में वृद्धि ने भारतीय रिजर्व बैंक के लिए दरों को अपरिवर्तित रखने की गुंजाइश को कम कर दिया।
मौद्रिक नीति समिति ने आखिरी बार फरवरी 2023 में Repo Rate बढ़ाई थी और तब उसने तटस्थ रुख बरकरार रखा था, साथ ही मुद्रास्फीति के परिदृश्य तथा वृद्धि-मुद्रास्फीति संतुलन पर अधिक स्पष्टता की प्रतीक्षा की थी।
(Input from PB Shabd)
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