नई दिल्लीः India अब स्थापित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता के मामले में विश्व में तीसरे स्थान हासिल कर चुका है। Morgan Stanley की एक नई रिपोर्ट के अनुसार, भारत का नवीकरणीय ऊर्जा की ओर संक्रमण देश की बाहरी निर्भरता को कम करने में मदद करेगा, लेकिन इसकी सफलता इस बात पर निर्भर करेगी कि भारत सौर सेल, वेफर तथा पॉलीसिलिकॉन जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में कितनी तेजी से आत्मनिर्भरता प्राप्त करता है।
Ministry of New and Renewable Energy के आंकड़ों के अनुसार, घरेलू तथा मॉड्यूल क्षमता मार्च 2024 में 38 गीगावाट से बढ़कर मार्च 2025 में लगभग दोगुनी होकर 74 गीगावाट हो गई है। वहीं, सौर सेल क्षमता भी 9 गीगावाट से बढ़कर 25 गीगावाट तक का क्षमता निर्माण किया जा चुका है।
हालांकि, रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत अभी भी प्रमुख अपस्ट्रीम घटकों के लिए आयात पर काफी हद तक निर्भर रहा है। वित्तीय वर्ष 2025 में भारत ने लगभग 1.6 अरब अमेरिकी डॉलर मूल्य के करीब 3.5 करोड़ सौर मॉड्यूल आयात किया गया, जिनमें अनुमानित 60 से 80 प्रतिशत चीन से आयात किए शामिल था।
कुल मिलाकर, भारत में गैर-जीवाश्म ईंधन आधारित ऊर्जा क्षमता अब कुल स्थापित क्षमता के 50 प्रतिशत से अधिक उत्पादन क्षमता हासिल किया है साथ ही यह 262.7 गीगावाट तक पहुँच गया है। हाल के वर्षों में क्षमता वृद्धि में सौर तथा पवन ऊर्जा का सबसे बड़ा योगदान रहा है।
(Input from News on Air)
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