नई दिल्लीः व्यापार एवं निवेश कानून केन्द्र, भारतीय विदेश व्यापार संस्थान (CTIL) तथा भारतीय वाणिज्य एवं उद्योग महासंघ (FICCI) के संयुक्त तत्वावधान में 19 मई को नई दिल्ली में “नेक्स्ट-जेन ट्रेड पैक्ट्स: FTA के तहत यूरोप के साथ भारत की साझेदारी का लाभ उठाना” विषय पर एक सम्मेलन आयोजित किया गया।
इस सम्मेलन में नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के प्रतिनिधियों, व्यापार विशेषज्ञों, विधि विशेषज्ञों तथा शिक्षाविदों ने भाग लिया जिसमें उभरते मुक्त व्यापार समझौतों (FTA) के तहत यूरोप के साथ भारत की विकसित होती व्यापारिक भागीदारी पर चर्चा की गई।
सम्मेलन में बाजार पहुंच, नियामकीय अनुपालन, सेवा व्यापार, डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहभागिता तथा यूरोपीय संघ के कार्बन बॉर्डर एडजस्टमेंट मैकेनिज्म (CBSM) से उत्पन्न चुनौतियों जैसे विषयों पर विशेष रूप से विचार-विमर्श किया गया। उद्घाटन सत्र के दौरान FICCI के महासचिव श्री अनंत स्वरूप ने यूरोप के साथ भारत की व्यापारिक साझेदारियों के बढ़ते महत्व पर प्रकाश डाला, जबकि फिक्की की विदेशी व्यापार एवं व्यापार सुविधा समिति के अध्यक्ष तथा Shahi Exports के प्रबंध निदेशक श्री हरीश आहूजा ने यूरोपीय बाजारों में गैर-शुल्कीय बाधाओं से निपटने के लिए मानक अवसंरचना, परीक्षण एवं प्रमाणन क्षमताओं, डिजिटल अनुपालन उपकरणों तथा संस्थागत तंत्र को सुदृढ़ करने की आवश्यकता पर भी बल दिया।
CTIL के प्रोफेसर एवं प्रमुख जेम्स जे. नेदुम्परा ने संदर्भपरक संबोधन देते हुए कहा कि नई पीढ़ी के व्यापार समझौते केवल शुल्क उदारीकरण तक सीमित नहीं हैं, बल्कि वे अंतरराष्ट्रीय व्यापार और आर्थिक सहयोग के भविष्य की रूपरेखा भी तय कर रहे हैं। वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के अतिरिक्त सचिव दर्पण जैन ने भारत-यूरोपीय संघ मुक्त व्यापार समझौता वार्ता के निष्कर्ष को भारत की आर्थिक कूटनीति में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताया। उन्होंने कहा कि यह समझौता भारत के 99.5 प्रतिशत निर्यात को वरीयता प्राप्त शुल्क सुविधा प्रदान करेगा, यूरोपीय मूल्य श्रृंखलाओं में भारत के एकीकरण को मजबूत करेगा तथा वस्तु एवं सेवा क्षेत्रों में बाजार पहुंच को बेहतर बनाएगा।
फिक्की की महानिदेशक ज्योति विज ने इस बात पर जोर दिया कि उद्योग जगत द्वारा व्यापार समझौतों का प्रभावी उपयोग सुनिश्चित करने के लिए जागरूकता, क्षमता निर्माण तथा उद्यमों की तैयारी अत्यंत आवश्यक है।
सम्मेलन में चार विषयगत सत्र आयोजित किया गया, जिनमें यूरोप के साथ भारत के व्यापार समझौतों के अंतर्गत अवसर, यूरोपीय बाजारों में मानक एवं नियामकीय अनुपालन, सेवा व्यापार एवं डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहभागिता तथा भारतीय उद्योग पर CBM के प्रभावों पर चर्चा की गई।
विचार-विमर्श के दौरान बाजार पहुंच बढ़ाने, निर्यात प्रतिस्पर्धात्मकता मजबूत करने, स्वच्छता एवं पादप स्वच्छता उपायों (एसपीएस) तथा व्यापार में तकनीकी बाधाओं (टीबीटी) का समाधान करने, यूरोपीय बाजारों में भारत की सेवा उपस्थिति का विस्तार करने तथा उभरते कार्बन-संबंधी व्यापारिक उपायों से निपटने पर विशेष ध्यान दिया गया।
CTIL के विशेषज्ञों ने भारत के UK, EU एवं EFTA के साथ FTA का लाभ उठाने, एसपीएस एवं टीबीटी बाधाओं के समाधान, सेवा व्यापार एवं डिजिटल अर्थव्यवस्था में सहभागिता, CBM से जुड़ी चुनौतियों तथा CTIL के ट्रेड रेमेडीज एडवाइजरी सेल की भूमिका पर भी प्रस्तुतियां दीं गई।
(Input from DD News)
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