नई दिल्ली । Election Commission ने चुनावी प्रक्रिया पर अक्सर पूछे जाने वाले प्रश्न (FAQs) साझा करते हुए कहा है कि विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कोई भी पात्र भारतीय नागरिक मतदाता सूची से बाहर न रहे।
आयोग ने कहा कि इस अभ्यास का उद्देश्य निर्धारित कानूनी प्रक्रिया के अनुसार मृत व्यक्तियों, दोहरे पंजीकरण, स्थायी रूप से स्थानांतरित मतदाताओं, विदेशियों तथा मतदाता के रूप में पंजीकरण के लिए अन्यथा अपात्र व्यक्तियों से संबंधित अमान्य प्रविष्टियों की पहचान करना और उन्हें हटाना है।
आयोग ने कहा कि अंतिम प्रमुख गहन पुनरीक्षण 2002-2004 के दौरान किए गए थे और दो दशकों से अधिक समय के बाद मतदाता सूचियों की सटीकता, अखंडता और विश्वसनीयता बनाए रखने के लिए व्यापक सत्यापन आवश्यक है। पात्रता पर आयोग ने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 326 के तहत केवल भारतीय नागरिक ही मतदाता के रूप में पंजीकृत होने के पात्र हैं।
SIR की प्रक्रिया घर-घर सत्यापन से शुरू होती है, इसके बाद मसौदा मतदाता सूची का प्रकाशन किया जाता है और फिर दावे एवं आपत्तियां आमंत्रित की जाती हैं तथा अंतिम मतदाता सूची के प्रकाशन से पहले नोटिस और सुनवाई का चरण पूरा किया जाता है।
Election Commission ने आगे कहा कि 17 राज्यों और केन्द्र शासित प्रदेशों में विशेष संक्षिप्त पुनरीक्षण (SSR) शुरू किया गया है, जिनमें से सभी ने पहले ही SIR पूरा कर लिया है। आयोग ने कहा कि इस महीने की 15 तारीख को जारी SSR निर्देश जारी SIR से अलग हैं, क्योंकि दोनों अलग-अलग प्रक्रियाएं हैं, जिनका उद्देश्य शुद्ध और अद्यतन मतदाता सूची सुनिश्चित करना है।
इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों- EVMs पर आयोग ने स्पष्ट किया कि EVMs को इंटरनेट, वाई-फाई, ब्लूटूथ या मोबाइल फोन के माध्यम से हैक या दूर से नियंत्रित नहीं किया जा सकता है।
आयोग ने कहा कि उसकी EVMs स्वतंत्र उपकरण हैं, जिनमें इंटरनेट, वाई-फाई, ब्लूटूथ या मोबाइल-नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं होती है और इन माध्यमों से दूर से हेरफेर करना उनके डिजाइन में समर्थित नहीं है।
(Input from News on Air)
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