नई दिल्लीः भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने आज प्रख्यात कवि रामधारी सिंह दिनकर की स्मृति में आयोजित 8वें स्मारक व्याख्यान को संबोधित किया।
अपने संबोधन में न्यायमूर्ति श्री सूर्यकांत ने सामाजिक न्याय और राष्ट्रीय चेतना के निर्माण में साहित्य की स्थायी प्रासंगिकता पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्राचीन काल से लेकर आधुनिक समय तक साहित्य और कविता ने समाज का मार्गदर्शन करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है।
अपने वक्तव्य में न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने यह भी रेखांकित किया कि दिनकर की रचनाएँ आज भी सामूहिक चेतना को जागृत करने के साथ-साथ मानव गरिमा को बढ़ावा देकर सामाजिक परिवर्तन के लिए प्रेरित करती हैं।
राष्ट्र कवि दिनकर की प्रसिद्ध कृति रश्मिरथी का उल्लेख करते हुए CJI ने कहा कि यह प्रसिद्ध कृति महाभारत के महान पात्र कर्ण के चरित्र के माध्यम से समानता, न्याय और व्यक्तिगत योग्यता पर एक सशक्त विमर्श प्रस्तुत करती है। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे साहित्यिक योगदान संविधान में निहित समानता, गरिमा और न्याय के मूल्यों के साथ गहराई से सामंजस्य रखते हैं।
(Input from News on Air)
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