नई दिल्लीः केन्द्र सरकार ने कीमती धातुओं तथा आभूषणों में उपयोग होने वाले ज्वेलरी फाइंडिंग्स पर सीमा शुल्क की दरों में संशोधन किया है। Ministry of Finance द्वारा जारी अधिसूचना के अनुसार नई दरें आज यानी 13 मई से प्रभावी हो गई हैं।
इस प्रकार संशोधित शुल्क व्यवस्था को ध्यान में रखते हुए Gold एवं Silver पर आयात शुल्क 6 फीसद से बढ़ाकर 15 फीसद कर दिया गया है, जबकि Platinum पर शुल्क 6.4 फीसद से बढ़ाकर 15.4 फीसद तक बढ़ाया गया है। इसके साथ ही Gold एवं Silver, सिक्कों, फाइंडिंग्स तथा अन्य संबंधित वस्तुओं पर लागू शुल्क संरचना में भी आवश्यक बदलाव की गाइडलाइन पेश की गई है।
Ministry of Finance के अनुसार, अब सोने एवं चांदी के ज्वेलरी फाइंडिंग्स पर 5 फीसद सीमा शुल्क लगेगा, जबकि Platinum फाइंडिंग्स पर 5.4 फीसद शुल्क लागू करने की घोषणा की गई है।
Central Government की अधिसूचना के अनुसार “ज्वेलरी फाइंडिंग्स” को ऐसे छोटे घटकों के रूप में, जैसे हुक, क्लैस्प, क्लैंप, पिन, कैच तथा स्क्रू बैक, जिनका उपयोग आभूषण के पूरे हिस्से या उसके किसी भाग को अपनी जगह पर स्थिर रखने हेतु इसके उपयोग के आधार पर परिभाषित किया गया है।
कीमती धातुओं वाले प्रयुक्त उत्प्रेरकों या राख के आयात पर सरकार ने 4.35 फीसद की रियायती सीमा शुल्क दर निर्धारित की है। यह रियायत कस्टम नीति, 2022 के प्रावधानों के अनुपालन के आलोक में निर्धारित किया गया है।
Ministry of Finance ने कहा कि रियायती शुल्क का लाभ लेने के लिए आयातकों को सीमा शुल्क अधिकारियों को यह आश्वासन देना होगा कि आयातित सामग्री में कीमती धातुओं का कितना प्रतिशत मौजूद है मेल साथ ही यह भी प्रमाणित करना होगा कि इन वस्तुओं का उपयोग कीमती धातुओं की पुनर्प्राप्ति के लिए ही किया जाएगा।
इसके अलावा, आयातकों को पर्यावरण, वन एवं जलवायु परिवर्तन मंत्रालय द्वारा जारी प्रमाणपत्र भी प्रस्तुत करना होगा, जिसमें कीमती धातुओं वाले प्रयुक्त उत्प्रेरकों या राख के आयात की अनुमति दी गई हो ताकि उनका पुनर्चक्रण या धातु पुनर्प्राप्ति की जा सके।
Central Government ने कहा कि सीमा शुल्क में यह संशोधन व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने, विदेशी मुद्रा भंडार की रक्षा करने तथा वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच गैर-आवश्यक आयातों को नियंत्रित करने के उद्देश्य से किया गया है। यह कदम पश्चिम एशिया संकट के कारण उत्पन्न वैश्विक अस्थिरता की पृष्ठभूमि में उठाया गया है।
सरकार के अनुसार, वैश्विक कच्चे तेल बाजार तथा अंतरराष्ट्रीय शिपिंग मार्गों में अस्थिरता के कारण आयात लागत और आपूर्ति संबंधी व्यवधानों को लेकर चिंताएँ बढ़ गई हैं। भारत कच्चे तेल का बड़ा आयातक है, इसलिए ऊर्जा कीमतों में वृद्धि मुद्रास्फीति पर दबाव डाल सकती है और चालू खाते के घाटे को बढ़ा सकती है।
सरकार ने कहा कि विदेशी मुद्रा संसाधनों को कच्चे तेल, उर्वरकों, औद्योगिक कच्चे माल, रक्षा उपकरणों, महत्वपूर्ण प्रौद्योगिकियों और पूंजीगत वस्तुओं जैसे आवश्यक आयातों के लिए प्राथमिकता देना जरूरी है, क्योंकि ये आर्थिक गतिविधियों और राष्ट्रीय सुरक्षा के लिए महत्वपूर्ण हैं।
सरकार ने यह भी उल्लेख किया कि कीमती धातुओं का आयात मुख्यतः उपभोग और निवेश आधारित होता है। बाहरी अनिश्चितता और वस्तु बाजारों में अस्थिरता के दौर में विवेकाधीन आयातों को नियंत्रित करना व्यापक आर्थिक स्थिरता बनाए रखने और बाहरी क्षेत्र प्रबंधन को मजबूत करने में सहायक हो सकता है।
Ministry of Finance ने कहा कि सीमा शुल्क में वृद्धि का उद्देश्य अनावश्यक आयात मांग को नियंत्रित करना, बाहरी खाते पर दबाव कम करना तथा उभरते वैश्विक जोखिमों के प्रति सक्रिय तथा संतुलित नीतिगत प्रतिक्रिया देना है।
(Input from DD News)
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