Central Government । IMF । WPI । PPI । NSC । DPIIT: थोक मूल्य सूचकांक को मिला नया आधार वर्ष, निर्माता मूल्य सूचकांक 15 जून को होगी शुरू

Central Government । IMF । WPI । PPI । NSC । DPIIT: थोक मूल्य सूचकांक को मिला नया आधार वर्ष, निर्माता मूल्य सूचकांक 15 जून को होगी शुरू

नई दिल्लीः Central Government ने थोक मूल्य सूचकांक (WPI) के आधार वर्ष को 2011-12 से संशोधित कर 2022-23 करने को मंजूरी दे दी है तथा उत्पादक मूल्य सूचकांकों (PPIs) की एक नई श्रृंखला शुरू करने का निर्णय लिया है। यह भारत की मूल्य मापन प्रणाली में एक महत्वपूर्ण बदलाव माना जा रहा है।

संशोधित WPI श्रृंखला और नए PPI सूचकांक उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के अंतर्गत आर्थिक सलाहकार कार्यालय द्वारा 15 जून को दोपहर 12 बजे जारी किए जाएंगे। नई WPI श्रृंखला वर्तमान 2011-12 आधार वर्ष वाली श्रृंखला का स्थान लेगी।

संशोधित WPI के साथ सरकार आउटपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स, परीक्षण इनपुट प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स तथा सेवा उत्पादक मूल्य सूचकांक भी जारी करेगी। सेवा PPI में सात सेवा क्षेत्रों को शामिल किया गया है, जिनमें बैंकिंग, प्रतिभूति लेन-देन, बीमा, पेंशन फंड प्रबंधन, रेलवे, हवाई यात्री परिवहन तथा दूरसंचार शामिल हैं।

यह निर्णय मूल्य एवं जीवन-यापन लागत सांख्यिकी संबंधी तकनीकी सलाहकार समिति की सिफारिशों और सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बाद लिया गया है। इन सिफारिशों को बाद में राष्ट्रीय सांख्यिकी आयोग (NSC) के समक्ष भी प्रस्तुत किया गया था।

सरकार के अनुसार, WPI से PPI की ओर यह परिवर्तन भारत की सांख्यिकीय प्रणाली को अंतरराष्ट्रीय सर्वोत्तम प्रथाओं तथा अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) की सिफारिशों के अनुरूप बनाएगा। सुचारु परिवर्तन सुनिश्चित करने के लिए अगले पाँच वर्षों तक WPI और PPI दोनों को समानांतर रूप से जारी किया जाएगा, जिसके बाद WPI को चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया जाएगा।

संशोधित WPI श्रृंखला में कई संरचनात्मक और कार्य प्रणालीगत सुधार किए गए हैं। सूचकांक में शामिल वस्तुओं की संख्या 697 से बढ़ाकर 957 कर दी गई है, जिससे आर्थिक गतिविधियों का अधिक व्यापक प्रतिनिधित्व सुनिश्चित होगा।

पहली बार सौर और पवन ऊर्जा जैसे नवीकरणीय ऊर्जा स्रोतों को बिजली श्रेणी में शामिल किया गया है। साथ ही परमाणु ऊर्जा से उत्पादित बिजली को भी सूचकांक की टोकरी में जोड़ा गया है, जो भारत के बदलते ऊर्जा परिदृश्य को दर्शाता है।

एक अन्य महत्वपूर्ण बदलाव के तहत कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस को ‘प्राथमिक वस्तु’ समूह से हटाकर ईंधन एवं ऊर्जा श्रेणी में रखा गया है। सरकार का कहना है कि इससे प्रमुख ऊर्जा स्रोतों को एक साथ रखकर ऊर्जा कीमतों की निगरानी के लिए अधिक सुसंगत ढांचा तैयार होगा।

संशोधित श्रृंखला में वस्तुओं के भार निर्धारित करने के लिए अब सकल उत्पादन मूल्य (Gross Value of Output - GVO) को आधार बनाया गया है, जो पहले उपयोग किए जाने वाले शुद्ध व्यापार मूल्य (Net Traded Value) दृष्टिकोण का स्थान लेगा। अधिकारियों के अनुसार, यह नई पद्धति उत्पादकों के दृष्टिकोण से वस्तुओं के आर्थिक महत्व को अधिक सटीक रूप से दर्शाती है।

अन्य सुधारों में प्राथमिक सूचकांकों के संकलन के लिए चेन-आधारित पद्धति को अपनाना तथा अनुपलब्ध मूल्य आंकड़ों के लिए टार्गेटेड मीन कम्प्यूटेशन तकनीक का उपयोग शामिल है। इससे वर्तमान श्रृंखला में प्रयुक्त ‘कैरी-फॉरवर्ड’ पद्धति को प्रतिस्थापित किया जाएगा।

संशोधित WPI और आउटपुट PPI को मासिक आधार पर जारी किया जाएगा। इसके तहत मई 2026 के आंकड़े तथा अप्रैल 2023 से अप्रैल 2026 तक की बैक-सीरीज भी उपलब्ध कराई जाएगी।

विनिर्माण क्षेत्र के लिए परीक्षण इनपुट PPI भी मार्च 2026 से प्रयोगात्मक आधार पर मासिक रूप से प्रकाशित किया जाएगा, ताकि आंकड़ों की गुणवत्ता का आकलन किया जा सके और हितधारकों से प्राप्त सुझावों को शामिल किया जा सके।

वहीं, सेवा PPI को त्रैमासिक आधार पर जारी किया जाएगा। इसकी शुरुआत 2025-26 की चौथी तिमाही के अस्थायी अनुमानों से होगी, साथ ही 2023-24 की पहली तिमाही से उपलब्ध बैक-सीरीज़ आंकड़े भी जारी किए जाएंगे।

(Input from DD News)

Sanjay Sharan

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