ASEAN । Cebu Island: दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन के नेताओं द्वारा समिट शुरू होने के साथ ही एनर्जी संकट पर विमर्श की शुरुआत

ASEAN । Cebu Island: दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन के नेताओं द्वारा समिट शुरू होने के साथ ही एनर्जी संकट पर विमर्श की शुरुआत

नई दिल्लीः दक्षिण-पूर्व एशिया से कहीं दूर चल रहे संघर्षों के दक्षिण-पूर्व एशियाई राष्ट्रों के संगठन (ASEAN) समूह के नेताओं की Philippines में होने वाली बैठक की चर्चाओं पर हावी रहने की संभावना है। विशेष रूप से मध्य-पूर्व संकट ईंधन आयात पर निर्भर आसियान देशों की अर्थव्यवस्थाओं के लिए गंभीर चुनौती बनकर उभरा है।

Cebu द्वीप पर गुरुवार और शुक्रवार को होने वाली बैठकों में 11 सदस्यीय समूह के नेताओं, विदेश मंत्रियों और आर्थिक मंत्रियों के भाग लेने की संभावना है। लगभग 70 करोड़ आबादी वाले इस क्षेत्र के लिए ऊर्जा और खाद्य आपूर्ति सुरक्षा शीर्ष प्राथमिकताओं में शामिल हैं।

मध्य-पूर्व संघर्ष के कारण कई एशियाई देश वैकल्पिक तेल आपूर्ति की तलाश में जुट गए हैं। इसी के मद्देनजर आसियान मंत्रियों ने शिखर सम्मेलन से पहले विशेष बैठकें आयोजित की हैं। वहीं, फिलीपींस तेल-साझाकरण ढांचा समझौते के अनुमोदन को लेकर आशान्वित है।

Ma. Theresa Lazaro ने गुरुवार को अपने समकक्षों की बैठक का उद्घाटन करते हुए कहा कि “मध्य-पूर्व में जारी संकट और उसके दूरगामी प्रभाव, जिनमें ऊर्जा प्रवाह, व्यापार मार्ग, खाद्य आपूर्ति श्रृंखला और हमारे नागरिकों के कल्याण में व्यवधान शामिल हैं, यह याद दिलाते हैं कि हमारे क्षेत्र से बाहर की घटनाएं भी आसियान पर तत्काल और गहरा प्रभाव डाल सकती हैं।”

राजनयिकों और विश्लेषकों का कहना है कि यह मुद्दा फिलीपींस की अध्यक्षता की परीक्षा लेगा। इससे उसे एक क्षेत्रीय प्रतिक्रिया का समन्वय करना होगा, साथ ही यह सुनिश्चित करना होगा कि आसियान के अपने संकट—जैसे Myanmar का गृहयुद्ध और पिछले वर्ष Thailand तथा Cambodia के बीच हुआ घातक सीमा विवाद—एजेंडे से पीछे न चले जाएँ।

करीब 3.8 ट्रिलियन डॉलर की संयुक्त जीडीपी वाले आसियान को संकटों पर समन्वित प्रतिक्रिया देने में लंबे समय से कठिनाइयों का सामना करना पड़ा है।

विश्लेषकों के अनुसार इस संघर्ष ने दक्षिण-पूर्व एशिया में अमेरिका-चीन प्रतिद्वंद्विता को भी तेज कर दिया है। जहाँ United States अन्य युद्धों में व्यस्त दिखाई दे रहा है, वहीं China खुद को अधिक भरोसेमंद साझेदार के रूप में पेश कर रहा है।

बैठक में मेंम्यांमार संकट पर भी चर्चा होगी, जिसने आसियान को विभाजित कर रखा है। म्यांमार की नई नाममात्र की नागरिक सरकार संगठन के साथ फिर से जुड़ने की कोशिश कर रही है। यह चुनाव सेना समर्थित दल ने जीता था, जिसने 2021 के तख्तापलट के बाद पाँच वर्षों तक शासन किया।

आसियान ने अभी तक चुनाव को मान्यता नहीं दी है और न ही यह संकेत दिया है कि पूर्व जुंटा प्रमुख और वर्तमान राष्ट्रपति Min Aung Hlaing को पाँच वर्षों बाद शिखर सम्मेलनों में लौटने की अनुमति कब दी जाएगी।

सेना समर्थित सरकार को आसियान देशों को यह भरोसा दिलाना पड़ सकता है कि वह संघर्ष रोकने और विद्रोही समूहों के साथ संवाद स्थापित करने के प्रति गंभीर है।

आसियान नेता दक्षिण चीन सागर को लेकर आसियान और China के बीच लंबे समय से लंबित आचार संहिता (Code of Conduct) को पूरा करने की मांग दोहरा सकते हैं। हालांकि 2026 की समयसीमा प्रतिस्पर्धी हितों और चीन के साथ आर्थिक संबंधों को लेकर बनी चिंताओं के कारण चुनौतीपूर्ण मानी जा रही है।

आसियान का एक प्रमुख बाहरी साझेदार चीन लगभग पूरे दक्षिण चीन सागर पर संप्रभुता का दावा करता है, जिसमें कई आसियान देशों के विशेष आर्थिक क्षेत्र भी शामिल हैं।

(Input from DD News)

 

 

Sanjay Sharan

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