Sashakt Nari, Sashakt Bharat । Beti Bachao Beti Padhao । Namo Drone Didi Yojana । Mission Shakti: सीखने से नेतृत्व तक, नारी शक्ति गढ़ रही है विकसित भारत

Sashakt Nari, Sashakt Bharat । Beti Bachao Beti Padhao । Namo Drone Didi Yojana । Mission Shakti: सीखने से नेतृत्व तक, नारी शक्ति गढ़ रही है विकसित भारत

विकसित भारत @2047 की विकास यात्रा में महिलाएँ बन रही हैं सक्रिय भागीदार

नई दिल्ली । स्वास्थ्य, शिक्षा, कौशल विकास, उद्यमिता, वित्तीय समावेशन, सुरक्षा और राजनीतिक भागीदारी जैसे क्षेत्रों में सरकार की विभिन्न पहलों के माध्यम से महिलाएँ भारत की विकास यात्रा में सक्रिय भागीदार के रूप में उभर रही हैं।

सरकार की ‘Sashakt Nari, Sashakt Bharat’ पहल महिलाओं के जीवन के विभिन्न चरणों में सहयोग प्रदान करने वाली अनेक योजनाओं को एक साथ जोड़ती है। इनमें मातृ एवं शिशु देखभाल, शिक्षा, आजीविका और नेतृत्व विकास से संबंधित कार्यक्रम शामिल हैं।

मातृ एवं शिशु स्वास्थ्य पर विशेष ध्यान

Beti Bachao Beti Padhao के तहत बालिकाओं की शिक्षा में सुधार, स्कूल छोड़ने की दर कम करने, संस्थागत प्रसव को बढ़ावा देने और प्रसवपूर्व देखभाल को मजबूत करने पर ध्यान दिया जाता है।

राष्ट्रीय परिवार स्वास्थ्य सर्वेक्षण-5 (NFHS-5) के अनुसार 2019-21 में लिंगानुपात 1,000 पुरुषों पर 1,020 महिलाओं का दर्ज किया गया, जबकि जनगणना 2011 में यह 943 था।

प्रधानमंत्री मातृ वंदना योजना के तहत प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) के माध्यम से मातृत्व लाभ प्रदान किया जाता है। योजना के अंतर्गत प्रथम जीवित संतान के लिए महिलाओं को दो किस्तों में 5,000 रुपये तथा दूसरी संतान के रूप में बालिका होने पर 6,000 रुपये दिए जाते हैं। 31 जुलाई 2026 तक 5.13 करोड़ से अधिक लाभार्थी पंजीकृत किए जा चुके थे तथा 4.37 करोड़ लाभार्थियों को 20,571 करोड़ रुपये का भुगतान किया जा चुका था।

प्रधानमंत्री सुरक्षित मातृत्व अभियान के अंतर्गत प्रत्येक माह की 9 तारीख को सरकारी स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क प्रसवपूर्व जांच की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, जिसमें विशेष रूप से उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं पर ध्यान दिया जाता है। इस कार्यक्रम के तहत 7.50 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाओं की जांच की जा चुकी है और 6.85 करोड़ से अधिक प्रसवपूर्व जांचें की गई हैं।

जननी शिशु सुरक्षा कार्यक्रम के तहत गर्भवती महिलाओं को सार्वजनिक स्वास्थ्य संस्थानों में निःशुल्क प्रसव, जिसमें सीज़ेरियन ऑपरेशन भी शामिल है, की सुविधा दी जाती है। इसके साथ ही निःशुल्क परिवहन, जांच, दवाएँ, रक्त और आहार भी उपलब्ध कराया जाता है।

सरकार के अनुसार 2024-25 में इस योजना से 1.99 करोड़ से अधिक गर्भवती महिलाएँ और 16.85 लाख बीमार शिशु लाभान्वित हुए।

स्वास्थ्य संकेतकों में भी सुधार देखा गया है। प्रथम तिमाही में प्रसवपूर्व जांच कराने वाली महिलाओं का फीसदी 2015-16 में 58.6 फीसदी से बढ़कर 2023-24 में 76.2 फीसदी हो गया। इसी अवधि में संस्थागत प्रसव 78.9 फीसदी से बढ़कर 90.6 फीसदी हो गए।

शिक्षा और कौशल तक पहुँच का विस्तार

सरकार ने बालिकाओं की शिक्षा तक पहुँच बढ़ाने और विद्यालयी तथा उच्च शिक्षा में उनकी निरंतर भागीदारी सुनिश्चित करने पर भी ध्यान केंद्रित किया है।

समग्र शिक्षा और कस्तूरबा गांधी बालिका विद्यालय (KGBV) के अंतर्गत 2025-26 में बालिकाओं का विद्यालयी नामांकन 11.96 करोड़ रहा। KGBV में नामांकन 2020-21 के 6.07 लाख से बढ़कर 2025-26 में 7.58 लाख हो गया।

कई छात्रवृत्ति योजनाओं का भी विस्तार किया गया है। सेंट्रल सेक्टर स्कॉलरशिप में आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों की मेधावी बालिकाओं के लिए लगभग आधी छात्रवृत्तियाँ आरक्षित हैं, जबकि राष्ट्रीय पीजी छात्रवृत्ति के तहत चयनित विद्यार्थियों को प्रतिवर्ष 1.5 लाख रुपये दिए जाते हैं, जिनमें हर वर्ष 3,000 महिलाएँ शामिल होती हैं।

AICTE प्रगति छात्रवृत्ति योजना के अंतर्गत 2014-15 से प्रतिवर्ष 10,000 छात्रवृत्तियाँ दी जा रही हैं और 2024-25 तक लगभग 36,000 बालिकाएँ इससे लाभान्वित हो चुकी हैं।

उच्च शिक्षा में महिलाओं का नामांकन 2021-22 के 2.07 करोड़ से बढ़कर 2022-23 में 2.18 करोड़ हो गया। 2014-15 से अब तक महिला नामांकन में लगभग 60.32 लाख की वृद्धि हुई है।

STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, अभियांत्रिकी और गणित) क्षेत्रों में भी महिलाओं की भागीदारी बढ़ी है। विज्ञान ज्योति योजना के तहत दिसंबर 2019 से 300 जिलों की 1.12 लाख से अधिक बालिकाएँ लाभान्वित हुई हैं। सुपरन्यूमेरी सीटों की व्यवस्था के बाद IIT और NIT में महिलाओं की भागीदारी 10 प्रतिशत से कम से बढ़कर 20 प्रतिशत से अधिक हो गई है।

नए युग के रोजगारों के लिए कौशल विकास

महिलाओं को उभरती प्रौद्योगिकियों और व्यावसायिक कौशल कार्यक्रमों से भी जोड़ा जा रहा है।

प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY) के लाभार्थियों में लगभग 45 फीसदी महिलाएँ हैं। PMKVY 4.0 के तहत 28 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षण दिया गया है और 19.36 लाख से अधिक को प्रमाणन प्राप्त हुआ है।

2025 में शुरू की गई नव्या (NAVYA) पहल के तहत 16-18 वर्ष की बालिकाओं को डिजिटल मार्केटिंग, साइबर सुरक्षा और एआई-सक्षम सेवाओं जैसे क्षेत्रों में व्यावसायिक प्रशिक्षण दिया जाता है। जून 2026 तक 1,060 से अधिक बालिकाएँ इस कार्यक्रम के तहत प्रशिक्षित की जा चुकी थीं।

वित्तीय और आर्थिक भागीदारी में वृद्धि

महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण को वित्तीय समावेशन और स्वयं सहायता समूह नेटवर्क के माध्यम से भी समर्थन मिला है।

DAY-NRLM के तहत स्वयं सहायता समूहों को स्थापना से अब तक 12.18 लाख करोड़ रुपये से अधिक का बैंक ऋण प्राप्त हुआ है। जून 2026 तक स्टार्ट-अप विलेज एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम के तहत 4.32 लाख से अधिक उद्यमों को समर्थन दिया गया।

लखपति दीदी पहल का उद्देश्य स्वयं सहायता समूहों से जुड़ी महिलाओं को प्रतिवर्ष कम से कम 1 लाख रुपये की स्थायी घरेलू आय अर्जित करने में सक्षम बनाना है। 31 मार्च 2026 तक यह कार्यक्रम 34 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों, 757 जिलों तथा 10.14 करोड़ से अधिक स्वयं सहायता समूह सदस्यों तक पहुँच चुका था।

प्रधानमंत्री जन धन योजना के तहत वित्तीय समावेशन का विस्तार हुआ है। 1 जुलाई 2026 तक 58.90 करोड़ जनधन खातों में से 32.68 करोड़ खाते महिलाओं के नाम थे।

प्रधानमंत्री मुद्रा योजना के अंतर्गत स्वीकृत ऋणों में दो-तिहाई ऋण महिला उद्यमियों को दिए गए हैं।

Namo Drone Didi Yojana के माध्यम से महिला स्वयं सहायता समूहों को कृषि कार्यों में ड्रोन संचालन का प्रशिक्षण देकर समर्थन दिया जा रहा है। योजना की शुरुआत से अब तक महिला SHG को 1,094 ड्रोन वितरित किए जा चुके हैं।

सरकारी ई-मार्केटप्लेस (GeM) पर 2.1 लाख से अधिक महिला-नेतृत्व वाले उद्यम पंजीकृत थे, जिन्होंने 2025-26 में 13.7 लाख ऑर्डर प्राप्त किए। इस अवधि में महिला MSME को 28,000 करोड़ रुपये से अधिक के अनुबंध प्रदान किए गए।

स्वास्थ्य, पोषण और गरिमा

महिलाएँ व्यापक स्वास्थ्य और पोषण कार्यक्रमों का भी प्रमुख केंद्र रही हैं।

आयुष्मान भारत PM-JAY के तहत 12 अगस्त 2026 तक 45.5 करोड़ आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके थे, जिनमें 22.48 करोड़ कार्ड महिलाओं को जारी किए गए। योजना के तहत 5.25 करोड़ से अधिक अस्पताल में भर्ती मामलों में महिलाएँ शामिल थीं।

सक्षम आंगनवाड़ी और पोषण 2.0 के अंतर्गत 31 जुलाई 2026 तक 64.46 लाख से अधिक गर्भवती महिलाएँ, 45.44 लाख धात्री माताएँ और 15.68 लाख किशोरियाँ लाभार्थियों में शामिल थीं।

सरकार ने फरवरी 2026 में पात्र 14 वर्षीय बालिकाओं के लिए देशव्यापी HPV टीकाकरण अभियान भी शुरू किया। 15 जुलाई तक 52.10 लाख से अधिक बालिकाओं को HPV टीका लगाया जा चुका था।

सुरक्षा, आवास और प्रतिनिधित्व

Mission Shakti के तहत महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण से संबंधित विभिन्न पहलों को एकीकृत किया गया है। 31 जुलाई 2026 तक 1.05 करोड़ से अधिक महिलाओं को महिला हेल्पलाइन के माध्यम से सहायता प्राप्त हुई।

आवास योजनाओं में भी महिलाओं को प्राथमिकता दी गई है। PMAY-ग्रामीण के तहत 13 अगस्त तक 96.06 लाख से अधिक आवास, जो कुल का 24.73 प्रतिशत हैं, केवल महिलाओं को आवंटित किए गए थे। PMAY-शहरी 2.0 के तहत 9 अगस्त तक स्वीकृत 1.25 करोड़ आवासों में से 1 करोड़ आवास महिलाओं को आवंटित किए जा चुके थे।

निर्णय प्रक्रिया में महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी है। मार्च 2025 तक पंचायती राज संस्थाओं में लगभग 14.5 लाख महिलाएँ निर्वाचित प्रतिनिधि के रूप में कार्यरत थीं, जो कुल प्रतिनिधियों का लगभग 46 प्रतिशत हैं।

नारी शक्ति वंदन अधिनियम लोकसभा, राज्य विधानसभाओं और दिल्ली विधानसभा में महिलाओं के लिए 33 फीसदी आरक्षण का प्रावधान करता है, जो जनगणना के बाद परिसीमन प्रक्रिया के अधीन लागू होगा।

सरकार ने सशस्त्र बलों में महिलाओं की भागीदारी का भी विस्तार किया है। 2025 में राष्ट्रीय रक्षा अकादमी (NDA) से 17 महिला कैडेटों का पहला बैच स्नातक हुआ। 2026 की शुरुआत तक 2022 से कुल 158 महिला कैडेट NDA में शामिल हो चुकी थीं।

सरकार ने कहा कि इन पहलों का उद्देश्य महिलाओं को केवल लाभार्थी की भूमिका तक सीमित न रखकर उन्हें उद्यमी, श्रमिक, किसान, पेशेवर और नेता के रूप में सशक्त बनाना है, जिससे विकसित भारत @2047 के दृष्टिकोण की महत्वपूर्ण आधारशिला के रूप में नारी शक्ति स्थापित हो सके।

(Input from DD News)

 

Sanjay Sharan

Sanjay Sharan

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