Noida । Navi Mumbai: भारत के दो मेगा एयरपोर्ट नोएडा और नवी मुंबई ग्लोबल एविएशन को बदलने की रखते क्षमता

Noida । Navi Mumbai: भारत के दो मेगा एयरपोर्ट नोएडा और नवी मुंबई ग्लोबल एविएशन को बदलने की रखते क्षमता


नई दिल्ली । यदि आपने हाल ही में मुंबई या दिल्ली के लिए उड़ान भरी है, तो आपने इसे महसूस किया होगा। मुंबई के ऊपर 20-20 मिनट तक होल्डिंग पैटर्न में चक्कर लगाते विमान। भरे हुए गेट और विमानों की कतारें। दिल्ली में चार रनवे होने के बावजूद विमान अभी भी केवल टर्मिनल तक पहुंचने के लिए इंतजार कर रहे हैं।

यह भीड़भाड़ ऐसे समय में बढ़ रही है जब विमानन क्षेत्र रिकॉर्ड वृद्धि दर्ज कर रहा है। वर्ष 2025 में भारतीय हवाई अड्डों ने लगभग 42 करोड़ यात्रियों को संभाला। वहीं, केवल इंडिगो और एयर इंडिया ने मिलकर 1,350 से अधिक नए विमानों का ऑर्डर दिया है—अर्थात भारतीय एयरलाइनों के बेड़े में हर वर्ष लगभग 100 नए विमान शामिल हो रहे हैं।

अब सवाल केवल यह नहीं रह गया है कि अधिक लोगों को हवाई यात्रा के लिए कैसे प्रेरित किया जाए। असली सवाल यह है कि ये विमान उतरेंगे कहां, पार्क कहां होंगे, ईंधन कहां भरेंगे और उड़ान कहां से भरेंगे?

दिल्ली और मुंबई अपनी क्षमता की सीमा तक क्यों पहुंच गया

मुंबई का छत्रपति शिवाजी महाराज अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा भारत के सबसे घने शहरी क्षेत्रों में से एक से घिरा हुआ है। इसके विस्तार के लिए लगभग कोई भूमि शेष नहीं बची है। दिल्ली का इंदिरा गांधी अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा अपेक्षाकृत अधिक जगह रखता है, लेकिन वह भी टर्मिनलों और हवाई क्षेत्र की क्षमता सीमाओं के करीब पहुंच चुका है।

एक विमानन विशेषज्ञ ने कहा, “जो हवाई अड्डे पहले से ही भीड़भाड़ वाले शहरों के भीतर स्थित हैं, उनसे लगातार अधिक विकास निकालना संभव नहीं है।”

समाधान: ट्विन हब मॉडल

भारत ने वही रास्ता अपनाया है जिसे दुनिया की अन्य प्रमुख विमानन राजधानियों ने अपनाया है। लंदन के पास हीथ्रो और गैटविक हैं। टोक्यो के पास हानेदा और नारिता हैं। न्यूयॉर्क के पास जेएफके और न्यूयार्क हैं।

अब भारत अपने सबसे व्यस्त विमानन केंद्रों के पास दो नए मेगा हवाई अड्डे विकसित कर रहा है—नवी मुंबई अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा और उत्तर प्रदेश के जेवर में नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा। इसका विचार सरल है—नए हवाई अड्डे घरेलू और कार्गो यातायात को संभालें, जिससे पुराने हब लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए अधिक क्षमता उपलब्ध करा सकें।

Navi Mumbai: दलदल, पहाड़ियों और एक नदी पर बना हवाई अड्डा

Navi Mumbai अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा शुरू से ही एक इंजीनियरिंग चुनौती था। इसका स्थल दलदली भूमि और मैंग्रोव क्षेत्र था। 92 मीटर ऊंची उल्वे पहाड़ी ठीक उसी स्थान पर स्थित थी जहां रनवे बनना था। इंजीनियरों ने पहाड़ी को विस्फोट कर हटाया, उसकी चट्टानों का उपयोग पूरे क्षेत्र को 7 मीटर ऊंचा उठाने में किया, नरम मिट्टी को स्थिर बनाया और मानसूनी बाढ़ से बचाव के लिए उल्वे नदी को पहले की तुलना में आठ गुना अधिक चौड़ा किया। भूमि को तैयार करने में दशकों लग गए।

परिणामस्वरूप एक ऐसा टर्मिनल तैयार हुआ जिसे ज़ाहा हदीद आर्किटेक्ट्स ने डिज़ाइन किया है। इसका स्वरूप एक खिले हुए कमल जैसा है, जिसमें इस्पात की छत और स्तंभ-रहित विशाल आंतरिक संरचना है। वर्ष 2026 में इसे दुनिया के सबसे सुंदर हवाई अड्डों में से एक माना गया।

सौंदर्य के अलावा यह हवाई अड्डा डिजिटल-फर्स्ट अवधारणा पर आधारित है। यहां 5G और इंटरनेट ऑफ थिंग्स (IoT) तकनीक के माध्यम से बैगेज कार्ट, ईंधन ट्रक और ग्राउंड वाहनों की वास्तविक समय में निगरानी की जाती है, जिससे टर्नअराउंड समय कम होता है। अगस्त 2026 में यहां से अंतरराष्ट्रीय मालवाहक सेवाएं शुरू हुईं, जिससे यह पश्चिमी भारत का प्रमुख कार्गो केंद्र बन गया।

कनेक्टिविटी इसकी एक बड़ी विशेषता है। 21.8 किलोमीटर लंबा अटल सेतु समुद्री पुल इसे दक्षिण मुंबई से 50 मिनट से कम समय में जोड़ता है। मेट्रो लाइनें इससे जुड़ी हुई हैं और अरब सागर के पार जल टैक्सी सेवा की भी योजना है। इसकी प्रथम चरण क्षमता 2 करोड़ यात्री
तथा योजनाबद्ध कुल क्षमता 9 करोड़ यात्री की रहने वाली है।

Noida: भारत का पहला नेट-ज़ीरो हवाई अड्डा और कार्गो हब

उत्तर प्रदेश के जेवर में चुनौती अलग थी। नोएडा अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डा एक ग्रीनफील्ड साइट पर बनाया गया, जिससे योजनाकारों को इसे बिल्कुल नए सिरे से डिजाइन करने का अवसर मिला। इसे भारत का पहला नेट-ज़ीरो हवाई अड्डा बनाने की दिशा में विकसित किया जा रहा है, जहां सौर ऊर्जा, विद्युत ग्राउंड वाहन, वर्षा जल संचयन और अपशिष्ट जल पुनर्चक्रण जैसी व्यवस्थाएं होंगी।

इसका डिज़ाइन स्विस परिचालन दक्षता और उत्तर प्रदेश की हवेली-शैली के आंगनों का मिश्रण है। यात्रियों के लिए इसे डिजीयात्रा प्रणाली के इर्द-गिर्द विकसित किया गया है, जहां प्रवेश, सुरक्षा जांच और बोर्डिंग के लिए चेहरे की पहचान आधारित प्रक्रिया होगी, जिससे बिना कागज और कम समय में यात्रा संभव होगी। एक स्मार्ट प्रणाली भीड़ की निगरानी कर टर्मिनल में जाम की स्थिति को रोकती है।

लेकिन इसकी सबसे महत्वपूर्ण भूमिका कार्गो क्षेत्र में हो सकती है। पश्चिमी उत्तर प्रदेश का औद्योगिक क्षेत्र—आगरा, मेरठ, नोएडा और गाजियाबाद—फार्मा, इलेक्ट्रॉनिक्स और निर्यात उद्योगों का प्रमुख केंद्र है।

पहले इन क्षेत्रों का माल दिल्ली ले जाया जाता था। नोएडा हवाई अड्डा इस व्यवस्था को बदल देगा। यहां 80 एकड़ में विकसित स्वचालित कार्गो विलेज होगा, जिसमें तापमान नियंत्रित क्षेत्र और फैक्ट्री से सीधे रनवे तक माल पहुंचाने के लिए समर्पित ट्रकिंग कॉरिडोर होंगे।

कनेक्टिविटी के लिए यमुना एक्सप्रेसवे, प्रस्तावित मेट्रो विस्तार तथा टर्मिनल के भीतर उच्च गति रेल स्टेशन की व्यवस्था की गई है। इसकी प्रथम चरण क्षमता 1.2 करोड़ यात्री
तथा योजनाबद्ध कुल क्षमता 7 करोड़ से अधिक यात्री और 6 रनवे रहने वाली है।

ट्विन सिस्टम कैसे काम करेगा

इंडिगो और अकासा जैसी कम लागत वाली एयरलाइनों से अपेक्षा है कि वे अपनी घरेलू उड़ानों का बड़ा हिस्सा नोएडा और नवी मुंबई में स्थानांतरित करेंगी। इससे दिल्ली और मुंबई में लंबी दूरी की अंतरराष्ट्रीय उड़ानों के लिए स्लॉट खाली होंगे।

यह व्यवस्था यात्रियों के कैचमेंट क्षेत्र को भी बदलेगी। मेरठ, मथुरा और आगरा के यात्री अब दिल्ली जाने के बजाय नोएडा से उड़ान भर सकेंगे। वहीं पुणे, नासिक और ठाणे के यात्री नवी मुंबई का उपयोग कर सकेंगे।

ये दोनों हब उड़े देश का आम नागरिक (उड़ान) योजना को भी मजबूती देंगे, जिससे टियर-2 और टियर-3 शहरों को सीधे जोड़ना संभव होगा और हर बार दिल्ली या मुंबई होकर यात्रा करने की आवश्यकता नहीं पड़ेगी।

बड़ा लक्ष्य: ट्रांसफर यातायात का नुकसान रोकना

कई वर्षों तक यूरोप या उत्तर अमेरिका जाने वाले भारतीय यात्रियों को दुबई या दोहा के माध्यम से यात्रा करनी पड़ती थी क्योंकि भारत के पास पर्याप्त हब क्षमता नहीं थी। दो नए मेगा हब बनने के बाद एयरलाइनों को भारत के भीतर ही मजबूत नेटवर्क विकसित करने का अवसर मिलेगा।

इन हवाई अड्डों में एमआरओ (मेंटेनेंस, रिपेयर एंड ओवरहॉल) सुविधाएं भी होंगी, जिससे विमानों की सर्विसिंग विदेशों में कराने की आवश्यकता कम होगी। इससे लागत घटेगी और नए आर्थिक क्षेत्र विकसित होंगे।

जेवर के आसपास की भूमि में पहले ही सेमीकंडक्टर और विनिर्माण क्षेत्र में निवेश बढ़ रहा है। वहीं Navi Mumbai और पनवेल के आसपास वाणिज्यिक तथा वेयरहाउसिंग केन्द्र विकसित हो रहे हैं।

आवश्यकता के अनुसार विस्तार

दोनों हवाई अड्डे “बिल्ड ऐज़ नीडेड” मॉडल का अनुसरण करते हैं। जब भी क्षमता 80 प्रतिशत तक पहुंचती है, अगला विस्तार चरण शुरू किया जाता है। नोएडा हवाई अड्डा 1.2 करोड़ यात्रियों की क्षमता से शुरू होकर 7 करोड़ से अधिक तक विस्तारित होगा। नवी मुंबई हवाई अड्डा 2 करोड़ यात्रियों की क्षमता से शुरू होकर 9 करोड़ तक पहुंचेगा।

नई सड़कों, एक्सप्रेसवे, मेट्रो, रेल और कार्गो कॉरिडोर के साथ लक्ष्य स्पष्ट है—सिर्फ क्षमता बढ़ाना नहीं, बल्कि यात्रा को आसान बनाना, माल परिवहन को तेज करना और भारत को दुनिया से अधिक प्रभावी ढंग से जोड़ना लक्ष्य रखा गया है।

(Input from DD News)

 

Sanjay Sharan

Sanjay Sharan

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