नई दिल्ली । शोधकर्ताओं ने Western Ghat से एलोग्राफा जीनस से संबंधित लाइकेन बनाने वाली कवक की पाँच नई प्रजातियों का पता लगाया है।
Ministry of Science and Technology ने कहा कि प्रदूषण एवं पर्यावास परिवर्तनों के प्रति संवेदनशीलता के कारण लाइकेन बनाने वाली कवक वनों और पर्यावरण गुणवत्ता का महत्वपूर्ण संकेतक हैं।
मंत्रालय ने कहा कि विज्ञान और प्रौद्योगिकी विभाग के पुणे स्थित स्वायत्त संस्थान एम.ए.सी.एस अगरकर अनुसंधान संस्थान के शोधकर्ताओं ने पश्चिमी घाट क्षेत्र में एलोग्राफा प्रजातियों का पहला व्यापक आणविक फाइलोजेनेटिक अध्ययन किया।
इस अध्ययन के परिणामस्वरूप पाँच नई प्रजातियों का पता चला। इनमें एलोग्राफा केरलेंसिस, एलोग्राफा नायके, एलोग्राफा पैराकॉन्सैंगुइनिया, एलोग्राफा पर्सिस्टिनस्पर्सा और एलोग्राफा सेमीकार्बोनिसटा शामिल हैं।
इसके इसके अलावा शोधकर्ताओं ने एलोग्राफा कैल्सिया, एलोग्राफा मैकेला, एलोग्राफा एक्विलोनिया, एलोग्राफा रिमुलोसा और एलोग्राफा एफ्यूसोसोरेडिका सहित कई पहले से ज्ञात प्रजातियों के लिए नए आणविक डेटा भी तैयार किया है।
(Input from PB Shabd)
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