नई दिल्ली । सरकार द्वारा संसद में साझा की गई जानकारी के अनुसार, भारत का यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) वर्ष 2025-26 में भी तेज़ी से विस्तार करता रहा। जून 2026 तक यूपीआई से जुड़े उपयोगकर्ताओं की संख्या बढ़कर 55.49 करोड़ हो गई, जबकि वित्त वर्ष के दौरान लेनदेन का कुल मूल्य रिकॉर्ड 314.23 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया।
Minister of State for Finance पंकज चौधरी ने सोमवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में बताया कि भुगतान और निपटान प्रणाली अधिनियम, 2007 के तहत नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया (NPCI) द्वारा संचालित UPI ने पिछले पाँच वित्तीय वर्षों के दौरान लेनदेन की संख्या और मूल्य, दोनों में निरंतर वृद्धि दर्ज की है।
आँकड़ों के अनुसार, वित्त वर्ष 2025-26 में UPI के माध्यम से 24,161.69 करोड़ लेनदेन हुए, जिनका कुल मूल्य 314.23 लाख करोड़ रुपये रहा। यह वित्त वर्ष 2024-25 के 18,586.60 करोड़ लेनदेन और 260.56 लाख करोड़ रुपये के मूल्य की तुलना में उल्लेखनीय वृद्धि है।
सरकार के आँकड़ों से पता चलता है कि वर्षों के दौरान UPI लेनदेन में लगातार वृद्धि हुई है। लेनदेन की संख्या वित्त वर्ष 2021-22 के 4,595.61 करोड़ से बढ़कर वित्त वर्ष 2022-23 में 8,371.44 करोड़, वित्त वर्ष 2023-24 में 13,112.95 करोड़, वित्त वर्ष 2024-25 में 18,586.60 करोड़ और वित्त वर्ष 2025-26 में 24,161.69 करोड़ हो गई। इसी अवधि में लेनदेन का मूल्य क्रमशः 84.16 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 139.15 लाख करोड़ रुपये, 199.95 लाख करोड़ रुपये, 260.56 लाख करोड़ रुपये और 314.23 लाख करोड़ रुपये हो गया।
वित्त मंत्रालय ने कहा कि यूपीआई लेनदेन की सुरक्षा और पारदर्शिता को मजबूत करने के लिए सरकार, भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) और नेशनल पेमेंट्स कॉरपोरेशन ऑफ इंडिया द्वारा कई उपाय लागू किए गए हैं।
इन पहलों में धोखाधड़ी वाले लेनदेन पर रोक लगाने के लिए जोखिम-आधारित लेनदेन सीमा, अनधिकृत मोबाइल नंबर परिवर्तन और एसएमएस आधारित प्रमाणीकरण के दुरुपयोग के विरुद्ध सुरक्षा उपाय तथा यूपीआई अनुप्रयोगों के लिए उन्नत सुरक्षा आवश्यकताएँ शामिल हैं। एनपीसीआई ने व्यापक यूपीआई सूचना सुरक्षा ढाँचा (सीयूआईएसएफ) 2025 और मोबाइल एप्लिकेशन सुरक्षा ढाँचा भी लागू किया है, जिसके तहत यूपीआई प्रणाली की सुरक्षा और मजबूती बढ़ाने के लिए उन्नत सुरक्षा नियंत्रण अनिवार्य किए गए हैं।
मंत्रालय ने एनपीसीआई की पूर्ण स्वामित्व वाली सहायक कंपनी एनपीसीआई इंटरनेशनल पेमेंट्स लिमिटेड (एनआईपीएल) के माध्यम से यूपीआई के बढ़ते वैश्विक विस्तार का भी उल्लेख किया। एनआईपीएल की स्थापना अप्रैल 2020 में भारतीय भुगतान प्रणालियों को वैश्विक बाजारों तक पहुँचाने के उद्देश्य से की गई थी।
मंत्रालय के अनुसार, यूपीआई अब कई देशों की भुगतान प्रणालियों से जुड़ चुका है, जिससे व्यक्ति से व्यापारी (पी2एम) लेनदेन तथा व्यक्ति से व्यक्ति (पी2पी) प्रेषण सेवाएँ उपलब्ध हो रही हैं।
वर्तमान में यूपीआई आधारित व्यापारी भुगतान भूटान, सिंगापुर, संयुक्त अरब अमीरात, फ्रांस, मॉरीशस, श्रीलंका, नेपाल, कतर और कंबोडिया में संचालित हैं, जबकि सीमा-पार व्यक्ति से व्यक्ति प्रेषण सेवाएँ साझेदार संस्थानों के माध्यम से सिंगापुर, ग्रीस और नेपाल के साथ उपलब्ध हैं।
इस अंतरराष्ट्रीय विस्तार का उद्देश्य भारतीय पर्यटकों और भारतीय प्रवासी समुदाय को सहज सीमा-पार डिजिटल भुगतान की सुविधा उपलब्ध कराना है। साथ ही यह साझेदार देशों को भारत के डिजिटल भुगतान मॉडल के आधार पर वास्तविक समय भुगतान प्रणाली और घरेलू कार्ड भुगतान अवसंरचना विकसित करने में भी सहायता प्रदान करेगा।
(Input from DD News)
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