नई दिल्ली । भारत के 6जी इकोसिस्टम को आगे बढ़ाने तथा उद्योग एवं शिक्षाविदों के नेतृत्व को एक मंच पर लाने के उद्देश्य से भारत 6जी एलायंस (B6GA) का गठन किया गया है, यह मंछ 15 जुलाई तक 90 सदस्यों तक विस्तारित हो गया है। यह दूरसंचार सेवा प्रदाताओं, उपकरण निर्माताओं, स्टार्टअप्स, अनुसंधान संस्थानों व शैक्षणिक संगठनों के बीच बढ़ते सहयोग को दर्शाता है। यह विकास अगली पीढ़ी की दूरसंचार तकनीक में भारत को वैश्विक अग्रणी के रूप में स्थापित करने के देश के प्रयासों की दिशा में एक और महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
Minister of State for Communications and Rural Development डॉ. चंद्रशेखर पेम्मासानी ने बुधवार को लोकसभा में एक लिखित उत्तर में यह जानकारी साझा की।
एलायंस ने 6जी प्रौद्योगिकियों, स्पेक्ट्रम, अनुप्रयोगों और उपयोग मामलों, उपकरणों और घटकों, राजस्व मॉडल, स्थिरता तथा जनसंपर्क जैसे प्रमुख क्षेत्रों पर केन्द्रित सात कार्य समूह गठित किए हैं। इस मंच का उद्देश्य उद्योग और शिक्षाविदों के बीच सहयोग को बढ़ावा देकर, प्रौद्योगिकी संबंधी कमियों की पहचान कर तथा देश के 6जी विज़न के अनुरूप उन्नत अनुसंधान प्रस्तावों और टेस्टबेड के विकास का समर्थन कर भारत के अनुसंधान, नवाचार और बौद्धिक संपदा इकोसिस्टम को मजबूत करना है।
एलायंस के स्पेक्ट्रम संबंधी एक कार्य समूह ने "स्पेक्ट्रम रोडमैप फॉर 6जी इन इंडिया" शीर्षक से एक रिपोर्ट प्रस्तुत की है। इसके अतिरिक्त, दूरसंचार विभाग (DoT) ने भारत 6जी एलायंस सहित विभिन्न हितधारकों से परामर्श के बाद भविष्य की स्पेक्ट्रम योजना और तैनाती का मार्गदर्शन करने के लिए 6जी सेवाओं हेतु राष्ट्रीय स्पेक्ट्रम रोडमैप जारी किया है।
स्वदेशी अनुसंधान क्षमताओं को मजबूत करने के लिए सरकार ने डिजिटल भारत निधि के दूरसंचार प्रौद्योगिकी विकास कोष (टीटीडीएफ) के तहत सोसाइटी फॉर एप्लाइड माइक्रोवेव इलेक्ट्रॉनिक्स इंजीनियरिंग एंड रिसर्च (सैमीर), कोलकाता में 6जी टेराहर्ट्ज टेस्टबेड स्थापित करने के लिए तीन वर्षीय परियोजना को मंजूरी दी है। इस परियोजना को आईआईटी मद्रास, आईआईटी गुवाहाटी और आईआईटी पटना के सहयोग से लागू किया जा रहा है। इस पहल के तहत इंडिया मोबाइल कांग्रेस 2025 के दौरान उच्च डेटा दर वाली लाइन-ऑफ-साइट संचार लिंक का सफल प्रदर्शन किया गया।
भारत ने अंतरराष्ट्रीय दूरसंचार संघ (ITU) के इंटरनेशनल मोबाइल टेलीकम्युनिकेशंस (IMT)-2030 ढांचे के अंतर्गत भी महत्वपूर्ण योगदान दिया है, जिसे व्यापक रूप से 6जी की आधारशिला माना जाता है। भारत ने सफलतापूर्वक "सर्वव्यापी कनेक्टिविटी (Ubiquitous Connectivity)" को 6जी के छह प्रमुख उपयोग परिदृश्यों में शामिल कराने की वकालत की। साथ ही, भविष्य के 6जी नेटवर्क की प्रमुख क्षमताओं के रूप में कवरेज, इंटरऑपरेबिलिटी और स्थिरता का भी समर्थन किया।
वैश्विक दूरसंचार मानकीकरण प्रक्रिया में भारत की भागीदारी को बढ़ाने के लिए सरकार दूरसंचार विभाग की टेक्नोलॉजी डेवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट प्रमोशन (टीडीआईपी) योजना के माध्यम से स्टार्टअप्स, एमएसएमई और अन्य हितधारकों को समर्थन प्रदान कर रही है। इस कार्यक्रम के तहत थर्ड जेनरेशन पार्टनरशिप प्रोजेक्ट (3जीपीपी), आईटीयू और वनएम2एम (oneM2M) जैसे अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण निकायों की सदस्यता, वैश्विक बैठकों में भागीदारी, भारत में अंतरराष्ट्रीय मानकीकरण कार्यक्रमों की मेजबानी तथा दूरसंचार उत्पादों के पायलट परीक्षण और सत्यापन के लिए वित्तीय सहायता प्रदान की जाती है।
(Input from News on Air)
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