ICAR । Protected Agriculture । Climate Resiliant: आईसीएआर खाद्य एवं पोषण सुरक्षा मजबूत करने तथा संरक्षित कृषि और जलवायु-अनुकूल गेहूं अनुसंधान को दे रहा बढ़ावा

ICAR । Protected Agriculture ।  Climate Resiliant: आईसीएआर खाद्य एवं पोषण सुरक्षा मजबूत करने तथा संरक्षित कृषि और जलवायु-अनुकूल गेहूं अनुसंधान को दे रहा बढ़ावा

करनाल/नई दिल्लीः भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) आत्मनिर्भर भारत को आगे बढ़ाने और वर्ष 2047 तक विकसित भारत की परिकल्पना को साकार करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बढ़ाते हुए राष्ट्रीय खाद्य सुरक्षा को मजबूत करनेआत्मनिर्भरताजलवायु अनुकूलन और टिकाऊ आजीविका को बढ़ावा देने के लिए संरक्षित कृषि और Climate Resiliant गेहूं एवं जौ प्रणालियों में परिवर्तनकारी अनुसंधान का नेतृत्व कर रही है।

कृषि अनुसंधान एवं शिक्षा विभाग (DARE) के सचिव और ICAR के महानिदेशक डॉ. एम. एल. जाट ने आज आईसीएआर-भारतीय गेहूं एवं जौ अनुसंधान संस्थान (आईआईडब्ल्यूबीआर) और आईसीएआर-केंद्रीय मृदा लवणता अनुसंधान संस्थान (सीएसएसआरआई)करनाल का दौरा किया और वर्तमान में जारी अनुसंधान एवं विकास पहलों की समीक्षा की।

मीडिया से बात कते हुए डॉ. जाट ने कहा भारत-गंगा के मैदानों में उत्पादकता बढ़ानेनिवेश लागत कम करने और जलवायु परिवर्तनशीलता के प्रति अनुकूलन सुधारने के उद्देश्य से किए जा रहे प्रमुख अनुसंधान कार्यों की समीक्षा की जरूरत है।

उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि जैविक नाइट्रिफिकेशन अवरोधन (बीएनआई) जैसी नवाचार तकनीकों से उत्पादकता में कमी किए बिना उर्वरक के उपयोग में 25 प्रतिशत तक की कमी संभव हो रही हैजिससे किसानों और पर्यावरण दोनों को लाभ हो रहा है।

इन प्राथमिकताओं को पूरा करने के लिए, ICAR ने अंतर्राष्ट्रीय मक्का और गेहूं सुधार केंद्र (CIMMYT) के सहयोग सेवर्ष 2009 से करनाल स्थित सीएसएसआरआई में एक दीर्घकालीनप्रणाली-आधारित अनुसंधान मंच का नेतृत्व किया हैजो स्थानीय परिस्थितियों के अनुरूप, Climate Resiliant और संसाधन-कुशल फसल प्रणालियोंविशेष रूप से मक्का-गेहूं उत्पादन प्रणाली पर केंद्रित है।

इस संरक्षण कृषि मंच ने महत्वपूर्ण परिणाम दिए हैंजिनमें सिंचाई के पानी में 85 प्रतिशत तक की बचतउर्वरक के उपयोग में 28 प्रतिशत की कमीईंधन की खपत में 51 प्रतिशत की बचत और फसल अवशेषों को जलाने में 95 प्रतिशत तक की कमी शामिल है।

ICAR  ने पोषण सुरक्षा के क्षेत्र में लौहजस्ता और प्रोटीन से समृद्ध गेहूं की 55 जैव-संरक्षित किस्में जारी की हैं। गेहूं की खेती का लगभग 45 प्रतिशत क्षेत्र अब जैव-संरक्षित किस्मों के अंतर्गत हैजो किसानों द्वारा इन्हें अपनाने में वृद्धि और किस्मों के उच्च प्रतिस्थापन दर को दर्शाता है।

वैज्ञानिक नवाचार को जमीनी स्तर पर कार्यान्वयन के साथ एकीकृत करके ICAR किसानों को सशक्त बनानाग्रामीण अर्थव्यवस्थाओं को मजबूत करना और महिलाओं तथा युवाओं के लिए स्थायी आजीविका के अवसर पैदा करना जारी रख हैजिससे अनुकूलआत्मनिर्भर और टिकाऊ कृषि के प्रति भारत की प्रतिबद्धता को बल मिला है।

(Input from PIB)

 

Sanjay Sharan

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