नई दिल्ली । Defence Minister राजनाथ सिंह ने शनिवार को कहा कि Operation Sindoor ने भारत की “विश्वस्तरीय” रक्षा तैयारियों का प्रदर्शन किया है। उन्होंने इसका श्रेय नरेन्द्र मोदी सरकार के पिछले 12 वर्षों के दौरान देश के रक्षा क्षेत्र में हुए परिवर्तन तथा ‘नेशन फर्स्ट’ और ‘फोर्सेज फर्स्ट’ पर दिए गए जोर को दिया।
नई दिल्ली में एक कार्यक्रम को संबोधित करते हुए सिंह ने इस अभियान को सशस्त्र बलों की परिचालन क्षमता और रक्षा विनिर्माण में भारत की बढ़ती आत्मनिर्भरता का प्रमाण बताया। उन्होंने कहा कि इस अभियान ने आतंकवाद के प्रति सरकार की “जीरो टॉलरेंस” नीति को प्रतिबिंबित किया और यह प्रदर्शित किया कि भारत आवश्यक होने पर आतंकवादियों तथा उनके समर्थकों पर कहीं भी प्रहार करने में सक्षम है।
रक्षा मंत्री ने कहा कि Operation Sindoor के दौरान आकाश तीर, आकाश मिसाइल प्रणाली और ब्रह्मोस मिसाइल जैसी स्वदेशी प्रणालियों का प्रभावी ढंग से उपयोग किया गया, जो तकनीकी युद्ध क्षमता और घरेलू रक्षा उत्पादन में भारत की प्रगति को दर्शाता है।
रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर भारत पर सरकार के जोर को रेखांकित करते हुए सिंह ने घोषणा की कि जल्द ही एक और पॉजिटिव इंडिजेनाइजेशन लिस्ट अधिसूचित की जाएगी। अब तक सशस्त्र बलों ने 509 वस्तुओं को शामिल करते हुए पाँच पॉजिटिव इंडिजेनाइजेशन लिस्ट जारी की हैं, जबकि रक्षा सार्वजनिक क्षेत्र उपक्रमों (DPSUs) ने 5,012 वस्तुओं को शामिल करते हुए पाँच सूचियाँ अधिसूचित की हैं।
रक्षा क्षेत्र की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए सिंह ने कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 में भारत का वार्षिक रक्षा उत्पादन रिकॉर्ड 1.78 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया, जो वर्ष 2014 में लगभग 40,000 करोड़ रुपये था। उन्होंने कहा कि रक्षा निर्यात भी वित्त वर्ष 2013-14 के 686 करोड़ रुपये से बढ़कर 38,000 करोड़ रुपये से अधिक हो गया है।
उन्होंने इस वर्ष रक्षा उत्पादन को 2 लाख करोड़ रुपये से आगे ले जाने और वर्ष 2029 तक इसे 3 लाख करोड़ रुपये तक पहुँचाने के सरकार के लक्ष्य को दोहराया। साथ ही वर्ष 2029 तक Defence Export को 50,000 करोड़ रुपये तक बढ़ाने का भी लक्ष्य बताया।
Defence Minister ने कहा कि सरकार ने आयातित सैन्य उपकरणों पर निर्भरता से हटकर घरेलू विनिर्माण को मजबूत करने तथा ऐसा सुदृढ़ रक्षा औद्योगिक पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने पर ध्यान केन्द्रित किया है, जो घरेलू और वैश्विक दोनों आवश्यकताओं को पूरा करने में सक्षम हो।
रक्षा विनिर्माण के संबंध में सिंह ने कहा कि उत्तर प्रदेश और तमिलनाडु में रक्षा औद्योगिक गलियारों के लिए लगभग 70,000 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है, जिनमें से लगभग 10,000 करोड़ रुपये का निवेश पहले ही किया जा चुका है। इससे रोजगार के अवसर सृजित हुए हैं और विनिर्माण क्षमताओं को मजबूती मिली है।
उन्होंने रक्षा खरीद में किए गए सुधारों का भी उल्लेख करते हुए कहा कि रक्षा आधुनिकीकरण बजट का 75 फीसदी भारतीय उद्योग से खरीद के लिए निर्धारित किया गया है। उन्होंने कहा कि इस वर्ष के अंत में अपेक्षित नई डिफेंस एक्विजिशन प्रोसीजर (DAP) में स्वदेशी रूप से डिजाइन और निर्मित रक्षा प्रणालियों को और अधिक प्राथमिकता दी जाएगी।
रक्षा नवाचार पर बोलते हुए सिंह ने कहा कि स्टार्टअप और सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यमों (MSMEs) से 2,400 करोड़ रुपये से अधिक की खरीद को मंजूरी दी गई है, जबकि नई प्रौद्योगिकियों के विकास के लिए 1,500 करोड़ रुपये से अधिक की परियोजनाओं को स्वीकृति प्रदान की गई है।
मंत्री के अनुसार, इनोवेशंस फॉर डिफेंस एक्सीलेंस (iDEX) मंच के माध्यम से वर्तमान में 676 स्टार्टअप और नवोन्मेषक जुड़े हुए हैं तथा मार्च 2026 तक 551 अनुबंध किए जा चुके हैं। उन्होंने कहा कि रक्षा स्टार्टअप की संख्या वर्ष 2018 में कुछ दर्जनों से बढ़कर अब 2,000 से अधिक हो गई है, जो ड्रोन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, क्वांटम प्रौद्योगिकी, साइबर सुरक्षा और रोबोटिक्स जैसे क्षेत्रों में कार्य कर रहे हैं।
सिंह ने कहा कि पूर्ववर्ती आयुध निर्माणी बोर्ड (Ordnance Factory Board) के निगमकरण से उत्पादकता, जवाबदेही और तकनीकी क्षमता में सुधार हुआ है तथा घाटे में चल रही फैक्ट्रियों को लाभकारी इकाइयों में बदला गया है।
उन्होंने भारत के युवाओं को “राष्ट्रीय सुरक्षा में तकनीकी साझेदार” बताते हुए कहा कि रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन (DRDO) अब एक राष्ट्रीय नवाचार मंच के रूप में विकसित हो चुका है, जो उद्योग, शिक्षाविदों, स्टार्टअप और वैज्ञानिकों को जोड़ता है।
रक्षा मंत्री ने यह भी कहा कि भारत लगातार एक विश्वसनीय वैश्विक सुरक्षा भागीदार के रूप में उभर रहा है, जहाँ रक्षा कूटनीति अब केवल रणनीतिक सहयोग तक सीमित नहीं है, बल्कि औद्योगिक सहयोग और वैश्विक आपूर्ति श्रृंखलाओं में एकीकरण तक विस्तृत हो चुकी है।
इसके अलावा, सिंह ने कहा कि वर्ष 2047 तक विकसित भारत के लिए सरकार की परिकल्पना ऐसे भारत की है, जहाँ सैनिक स्वदेशी हथियारों से सुसज्जित हों, वैज्ञानिकों को अधिक अवसर प्राप्त हों, युवा नवोन्मेषक तकनीकी प्रगति का नेतृत्व करें और भारतीय उद्योग वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धा करें।
(Input from DD News)
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