Agriculture Minister ने कहा कि पंचायत आधारित फार्म मशीनरी बैंक तथा Custom hiring Centre से छोटे किसान भी ले सकेंगे उन्नत कृषि यंत्रों का लाभ, जिससे कम लागत के साथ ज्यादा उत्पादन का रास्ता होगा मजबूत।
नई दिल्लीः केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण तथा ग्रामीण विकास मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा है कि बदलते मौसम एवं जलवायु परिवर्तन की चुनौतियों के बीच केंद्र सरकार का लक्ष्य है कि हर क्षेत्र के किसानों को उन्नत किस्में, सही फसल अनुशंसा और आधुनिक कृषि यंत्रों की सुविधा एक साथ उपलब्ध कराई जाएगी जिससे कम लागत में, अधिक उत्पादन के साथ सुरक्षित और टिकाऊ खेती को बढ़ावा मिलेगा। यह बात उन्होंने आज उन्नत कृषि महोत्सव के अवसर पर मीडिया से अनौपचारिक चर्चा के दौरान कहीं।
नई किस्में के साथ क्लाइमेट चेंज पर सतर्कता
Agriculture Minister ने कहा कि क्लाइमेट चेंज अब बहुत प्रॉमिनेंट हो चुका है और अनसीज़नल बारिश, वेस्टर्न डिस्टर्बेंस तथा तापमान में अनिश्चितता के कारण खेती पर सीधा असर पड़ रहा है। उन्होंने बताया कि वैज्ञानिक संस्थान ऐसी फसल किस्में विकसित कर रहे हैं, जो अधिक गर्मी भी सह सकें, ज्यादा पानी की स्थिति में भी टिकाऊ बनी रहें और कम पानी की स्थिति में भी अच्छा प्रदर्शन कर सकें, और इन वैरायटीज़ को तेजी से किसानों तक पहुँचाने के प्रयास जारी हैं।
पंचायत आधारित मशीनीकरण मॉडल तथा Custom hiring Centre
श्री चौहान ने स्पष्ट किया कि सरकार का फोकस केवल व्यक्तिगत मशीन सब्सिडी तक सीमित नहीं बल्कि गाँव स्तर पर साझा उपयोग के लिए कस्टम हायरिंग सेंटर और फार्म मशीनरी बैंक का नेटवर्क विकसित करना है। उन्होंने कहा कि पंचायतों, किसान समूहों, एफपीओ और स्वयं सहायता समूहों के माध्यम से ऐसे सेंटर स्थापित किए जा रहे हैं, जहाँ से छोटे और सीमांत किसान भी किराये पर आधुनिक कृषि उपकरण ले सकें। उन्होंने बताया कि केंद्र की सब-मिशन ऑन एग्रीकल्चरल मेकनाइजेशन (SMAM) जैसी योजनाओं के तहत परियोजना लागत पर 40 से 80 प्रतिशत तक वित्तीय सहायता उपलब्ध कराई जा रही है, ताकि लगभग 30 लाख रुपये तक की परियोजनाओं पर भी पंचायतों एवं किसान संगठनों को मजबूत समर्थन मिल सके।
कस्टम हायरिंग सेंटर को योजना से मिलेगा समर्थन, MP-LADS से नहीं
मीडिया के एक सवाल पर कि क्या एमपी लैड्स (MP-LADS) की निधि से भी कस्टम हायरिंग सेंटर जिम की तरह बनवाए जा सकते हैं, श्री चौहान ने साफ कहा कि एमपी लैड्स का उद्देश्य स्थायी सामुदायिक परिसंपत्तियाँ बनाना है, जैसे सड़कें, स्कूल, स्वास्थ्य, खेल सुविधाएँ और स्थिर जिम आदि, जबकि कस्टम हायरिंग सेंटर संचालन और किराये के मॉडल पर आधारित होते हैं, जिनके लिए अलग प्रकार की व्यवस्था और संचालन ढांचा चाहिए। उन्होंने कहा कि कस्टम हायरिंग सेंटरों को हम MP-LADS से नहीं, बल्कि कृषि मशीनीकरण और संबंधित योजनाओं से ही बढ़ावा दे रहे हैं, ताकि नीति की भावना और पारदर्शिता दोनों बनी रहे।
सांसदों की भूमिका – सिफारिश, जागरूकता और निगरानी
Agriculture Minister ने यह भी कहा कि भले ही एमपी लैड्स से सीधे कस्टम हायरिंग सेंटर न बनते हों, लेकिन सांसद और विधायक अपने क्षेत्रों में कृषि मशीनीकरण योजनाओं के बेहतर क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं। वे किसान समूहों, एफपीओ और पंचायतों के प्रस्तावों को राज्य और केंद्र सरकार के समक्ष प्रभावी ढंग से उठाकर, स्वीकृति, निगरानी और समस्याओं के समाधान में सहयोग कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि जनप्रतिनिधियों की सक्रियता से ही योजनाओं का लाभ सही मायने में अंतिम छोर के किसान तक पहुँचता है।
प्राइवेट सेक्टर के साथ साझेदारी का संकेत
Custom hiring मॉडल में प्राइवेट सेक्टर की सीमित भागीदारी पर पूछे गए सवाल पर मंत्री श्री शिवराज सिंह चौहान ने कहा कि कुछ राज्यों में निजी कंपनियाँ और उद्यमी पहले से ही आगे आकर काम कर रहे हैं और जहाँ‑जहाँ स्थिर मांग, स्पष्ट नीति और स्थानीय साझेदारी मिलती है, वहाँ यह मॉडल सफल होता है। उन्होंने कहा कि सरकार की कोशिश है कि एफपीओ, पंचायत और प्राइवेट सेक्टर मिलकर पब्लिक–प्राइवेट पार्टनरशिप के रूप में ऐसे केंद्र विकसित करें, ताकि मशीनें भी चलती रहें और किसान को सस्ती और समय पर सेवा भी मिल सके।
किसान‑केन्द्रित वैज्ञानिक दृष्टिकोण की पहल पर समर्थन
श्री चौहान ने ज़ोर देकर कहा कि यह पूरी पहल किसी मजबूरी से नहीं, बल्कि किसान‑केन्द्रित सोच, जनमत और वैज्ञानिक सलाह का परिणाम है। उन्होंने कहा कि पहले भी कई योजनाएं चल रही थीं, लेकिन अब उद्देश्य उन्हें एग्रो‑क्लाइमेटिक दृष्टिकोण, आधुनिक मशीनीकरण, क्लाइमेट‑रेज़िलिएंस और बाज़ार से जुड़ी रणनीति के साथ जोड़कर समग्र रोडमैप में बदलना है, ताकि उत्पादकता बढ़े, लागत घटे और किसान की आमदनी सुरक्षित व स्थिर हो सके।
(Input from Agency)
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