नई दिल्ली । Union Minister for Skill Development and Entrepreneurship जयंत चौधरी ने इस बात पर जोर दिया है कि भारत को देश को वैश्विक कौशल राजधानी बनाने के लिए विश्वास, गुणवत्ता और आजीवन सीखने पर आधारित कौशल विकास पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना होगा।
आज नई दिल्ली में World Youth Skills Day 2026 समारोह तथा कौशल भारत मिशन की 11वीं वर्षगांठ के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम को संबोधित करते हुए मंत्री ने कहा कि इस वर्ष की थीम "साझा भविष्य के लिए कौशल विकास" देश की उस प्रतिबद्धता को दर्शाती है, जिसके तहत कार्यबल को केवल घरेलू अवसरों के लिए ही नहीं, बल्कि वैश्विक श्रम बाजारों के लिए भी तैयार किया जा रहा है।
मंत्री ने कहा कि कौशल विकास को अब केवल रोजगार प्राप्त करने का माध्यम नहीं माना जाना चाहिए, बल्कि राष्ट्रीय शिक्षा नीति (एनईपी) के अनुरूप इसे आजीवन सीखने का अभिन्न हिस्सा समझा जाना चाहिए।
श्री चौधरी ने रेखांकित किया कि भारत वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं और श्रम गतिशीलता में एक विश्वसनीय साझेदार के रूप में अपनी स्थिति मजबूत कर रहा है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि प्रत्येक कौशल विकास पहल गुणवत्ता और विश्वसनीयता को प्रतिबिंबित करनी चाहिए।
मंत्री ने वेल्डिंग, इलेक्ट्रीशियन और ऑटोमोटिव मैकेनिक जैसे गैर-पारंपरिक व्यवसायों में महिलाओं की कम भागीदारी पर चिंता व्यक्त की। उन्होंने कहा कि मंत्रालय द्वारा हाल ही में गठित जेंडर मेनस्ट्रीमिंग समिति कौशल विकास कार्यक्रमों की रूपरेखा तैयार करने और उनके क्रियान्वयन में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने की दिशा में कार्य करेगी।
(Input from News on Air)
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