नई दिल्ली । Vice President श्री सी.पी. राधाकृष्णन ने बुधवार को उपराष्ट्रपति भवन में "VIP Culture in India: Power, Privilege and the Distance from Democracy" पुस्तक का विमोचन किया और कहा कि लेखकों द्वारा उठाया गया विषय देश में लोकतांत्रिक शासन एवं सार्वजनिक जीवन के मूल स्वरूप को स्पर्श करता है।
सभा को संबोधित करते हुए Vice President ने कहा कि संविधान न्याय, समानता, स्वतंत्रता और बंधुत्व पर आधारित समाज की परिकल्पना करता है तथा इस बात पर बल दिया कि लोकतंत्र तभी फलता-फूलता है जब सार्वजनिक पद को विशेषाधिकार के बजाय जिम्मेदारी के रूप में देखा जाए। उन्होंने कहा कि नागरिकों और सार्वजनिक अधिकार से संपन्न लोगों के बीच संबंध लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।
तमिल संत-कवि तिरुवल्लुवर की शिक्षाओं का उल्लेख करते हुए Vice President श्री राधाकृष्णन ने कहा कि सच्चे नेतृत्व की पहचान उसकी सहज उपलब्धता, करुणा और जवाबदेही से होती है। उन्होंने कहा कि जो नेता लोगों के प्रति सहज और सम्मानपूर्ण रहते हैं, वे स्थायी विश्वास एवं सम्मान अर्जित करते हैं।
Vice President ने कहा कि पुस्तक में चर्चा किए गए विषय PM श्री नरेन्द्र मोदी की लोकसेवा की परिकल्पना के अत्यंत निकट हैं। उन्होंने गणमान्य व्यक्तियों के लिए लाल बत्ती संस्कृति को समाप्त करने के PM के निर्णय तथा हाल ही में नीट अभ्यर्थियों को यातायात प्रतिबंधों के कारण होने वाली असुविधा से बचाने के लिए अपने प्रस्थान में विलंब करने के कदम का उल्लेख करते हुए कहा कि ऐसे कार्य Citizen-First शासन की भावना को दर्शाते हैं।
PM के इस कथन को याद करते हुए कि "हर भारतीय विशेष है। हर भारतीय एक वीआईपी है," Vice President ने कहा कि सार्वजनिक अधिकार नागरिकों की सेवा के लिए अस्तित्व में है और दोहराया कि "सेवा ही परम धर्म है।"
उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री और अन्य ऐसे नेताओं के संदर्भों की भी सराहना की, जो अपनी सादगी एवं लोकसेवा के प्रति समर्पण के लिए जाने जाते थे। Vice President ने कहा कि लेखकों ने अपने विश्लेषण को भारत की सभ्यतागत विरासत के संदर्भों से समृद्ध किया है, जिनमें उपनिषद, रामचरितमानस, भगवान बुद्ध की शिक्षाएं और पंचतंत्र शामिल हैं।
Republic को परिभाषित करने वाले मूल्यों के प्रति नए सिरे से प्रतिबद्धता का आह्वान करते हुए Vice President राधाकृष्णन ने कानून के समक्ष समानता, प्रत्येक नागरिक की गरिमा और विनम्रता एवं जिम्मेदारी से निर्देशित नेतृत्व पर बल दिया। उन्होंने कहा कि नेतृत्व का वास्तविक मापदंड वह विश्वास है जो वह अर्जित करता है और वह सेवा है जो वह प्रदान करता है।
यह पुस्तक अरुणाचल प्रदेश से राज्यसभा के पूर्व सदस्य नाबाम रेबिया और सह-लेखक संदीप कुमार द्वारा लिखी गई है। इस अवसर पर उपस्थित लोगों में अरुणाचल प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री नाबाम तुकी, मेघालय से राज्यसभा के पूर्व सदस्य डब्ल्यू.आर. खारलुखी, तथा पुस्तक के लेखक शामिल थे।
(Input from DD News)
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