नई दिल्ली । US President डोनाल्ड ट्रंप ने कल न्यूयॉर्क में 81st UN General Assembly को संबोधित करते हुए ईरान के खिलाफ अपने प्रशासन की सैन्य कार्रवाई का बचाव किया। उन्होंने देशों से तेहरान पर आर्थिक दबाव बनाए रखने का आग्रह किया और कहा कि ईरान के सामने समझौता करने या आगे की अमेरिकी सैन्य कार्रवाई का सामना करने का विकल्प है।
श्री ट्रंप ने कहा कि US ने ईरान के परमाणु कार्यक्रम को निशाना बनाया और उसकी सैन्य क्षमताओं को कमजोर किया है। उन्होंने दोहराया कि वाशिंगटन ईरान को परमाणु हथियार हासिल करने की अनुमति नहीं देगा। उन्होंने ईरान द्वारा वाणिज्यिक जहाजों पर हमले और आतंकवाद के लिए उसके समर्थन को समाप्त करने तक उसके पूर्ण आर्थिक अलगाव का भी आह्वान किया।
अन्य विदेश नीति मुद्दों पर श्री ट्रंप ने कहा कि रूस-यूक्रेन संघर्ष को समाप्त करने के प्रयास जारी हैं। श्री ट्रंप ने पश्चिमी गोलार्ध में कई घटनाक्रमों का उल्लेख किया, जिसमें उन्होंने वेनेजुएला में अमेरिकी सैन्य अभियान का भी जिक्र किया, जिसके परिणामस्वरूप राष्ट्रपति निकोलस मादुरो की गिरफ्तारी हुई। उन्होंने कहा कि अमेरिका अब वेनेजुएला के नेताओं के साथ मिलकर वेनेजुएला के लोगों के लिए उनके शब्दों में “कहीं बेहतर भविष्य” की दिशा में काम कर रहा है और दोनों देशों के बीच एक बड़े तेल समझौते की घोषणा की।
मेक्सिको के बारे में राष्ट्रपति ने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सक्रिय अपराध के खिलाफ प्रयासों पर ध्यान केंद्रित किया और कहा कि मादक पदार्थों के तस्कर गिरोहों को विदेशी आतंकवादी संगठन घोषित किया गया है। उन्होंने देश से मानवता के दुश्मनों से अपनी भूमि पर नियंत्रण वापस लेने का आह्वान किया। उन्होंने क्यूबा के साथ जारी बातचीत का भी उल्लेख किया और कहा कि उनका प्रशासन वहां की स्थिति में मौलिक बदलाव चाहता है।
राष्ट्रपति ने ग्रीनलैंड के साथ होने वाले नए समझौते की भी सराहना की, जिस पर जल्द हस्ताक्षर किए जाने हैं। उन्होंने आर्कटिक क्षेत्र को क्षेत्रीय और अंतरराष्ट्रीय सुरक्षा के लिए रणनीतिक रूप से महत्वपूर्ण बताया। श्री ट्रंप ने कहा कि डेनमार्क और ग्रीनलैंड के साथ यह व्यवस्था US को क्षेत्र में “सुरक्षा और अन्य सभी जरूरतों पर स्थायी नियंत्रण” देगी और आर्कटिक तथा उत्तरी अटलांटिक क्षेत्रों में नाटो की सुरक्षा व्यवस्था को मजबूत करेगी।
संबोधन का एक महत्वपूर्ण हिस्सा कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) पर भी केन्द्रित रहा। उन्होंने कहा कि US कृत्रिम बुद्धिमत्ता के विकास को बढ़ावा देगा, जिसे उन्होंने “Superintelligence” कहा, जबकि उन्होंने प्रौद्योगिकी को नियंत्रित करने के अंतरराष्ट्रीय प्रयासों को खारिज किया।
उन्होंने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय, यूनेस्को और संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद सहित कई अंतरराष्ट्रीय निकायों की भी आलोचना की। श्री ट्रंप ने अंतरराष्ट्रीय आपराधिक न्यायालय (आईसीसी) को बुरे लोगों से भरी संस्था बताया, जिसके पास अमेरिका पर कोई अधिकार क्षेत्र नहीं है और देशों से इससे बाहर निकलने का आह्वान किया।
राष्ट्रपति ने जिनेवा स्थित संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद की भी आलोचना की और उस पर अमेरिका पर अत्यधिक ध्यान केन्द्रित करने तथा अन्य जगहों पर होने वाले दुर्व्यवहारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया। उन्होंने शिक्षा, संस्कृति और विज्ञान एजेंसी यूनेस्को तथा अंतर्राष्ट्रीय समुद्री संगठन की आलोचना करते हुए कहा कि अंतरराष्ट्रीय निकायों को वैश्विक शासन संबंधी पहलों को आगे नहीं बढ़ाना चाहिए।
(Input from PB Shabd)
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