नई दिल्ली । 22 अमेरिकी अटॉर्नी जनरलों के एक गठबंधन ने ट्रंप प्रशासन के कुछ H-1B Visa programme पर 100,000 डॉलर से अधिक का शुल्क लगाने के प्रस्ताव का विरोध किया है। उनका तर्क है कि यह उपाय गैरकानूनी है और शिक्षकों, डॉक्टरों तथा नर्सों की कमी को और बढ़ा देगा।
यह चुनौती भारतीय पेशेवरों और उन अमेरिकी कंपनियों के लिए महत्वपूर्ण है, जो अत्यधिक कुशल कर्मचारियों की भर्ती के लिए H-1B Visa programme पर काफी निर्भर हैं।
अटॉर्नी जनरलों ने कहा कि प्रस्तावित शुल्क राज्य और स्थानीय संस्थानों के लिए कुशल विदेशी पेशेवरों की भर्ती को और कठिन बना सकता है। उन्होंने प्राथमिक और माध्यमिक शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा तथा अन्य आवश्यक सेवाओं में कर्मचारियों की कमी का हवाला दिया।
Virginia Attorney General जे. जोन्स ने गठबंधन के साथ मिलकर एक औपचारिक टिप्पणी पत्र दाखिल किया, जिसमें अमेरिकी नागरिकता और आव्रजन सेवा (USCIS) से प्रस्तावित नियम को वापस लेने का अनुरोध किया गया।
वर्जीनिया के अलावा, गठबंधन में कैलिफोर्निया, मैसाचुसेट्स, एरिजोना, कोलोराडो, कनेक्टिकट, डेलावेयर, हवाई, इलिनॉय, मेन, मैरीलैंड, मिशिगन और मिनेसोटा के अटॉर्नी जनरल शामिल हैं।
इसमें नेवादा, न्यू जर्सी, न्यू मैक्सिको, न्यूयॉर्क, उत्तरी कैरोलिना, ओरेगन, वाशिंगटन, विस्कॉन्सिन और डिस्ट्रिक्ट ऑफ कोलंबिया भी शामिल हैं।
अटॉर्नी जनरलों के अनुसार, प्रशासन प्रस्तावित शुल्क से राज्यों पर पड़ने वाले बोझ को उचित ठहराने में विफल रहा है। उन्होंने यह भी कहा कि USCIS ने कम नुकसान पहुंचाने वाले विकल्पों पर पर्याप्त रूप से विचार नहीं किया है।
उनका तर्क है कि कार्यपालिका कांग्रेस की अनुमति के बिना ऐसा कर नहीं लगा सकती।
एजेंसी ने 25 अगस्त को प्रस्तावित नियम बनाने की सूचना जारी की थी। इसके तहत उन नियोक्ताओं द्वारा दाखिल की जाने वाली याचिकाओं पर 103,265 डॉलर का शुल्क लगाया जाएगा, जिन्हें वार्षिक H-1B Visa programme सीमा से छूट प्राप्त नहीं है।
H-1B कार्यक्रम अमेरिकी नियोक्ताओं को विशेष व्यवसायों में विदेशी कर्मचारियों को नियुक्त करने की अनुमति देता है, जिनमें आम तौर पर विशेष ज्ञान और कम से कम स्नातक की डिग्री या उसके समकक्ष योग्यता की आवश्यकता होती है।
(Inputt from News on Air)
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