Union Minister of State । Pharmacy of the World । Laboratory of the World: अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ से ‘दुनिया की लैबोरेटरी’ बनना होगा

Union Minister of State । Pharmacy of the World । Laboratory of the World: अनुप्रिया पटेल ने कहा कि भारत को ‘दुनिया की फार्मेसी’ से ‘दुनिया की लैबोरेटरी’ बनना होगा

नई दिल्ली । भारत को “Pharmacy of the World” के रूप में अपनी पहचान से आगे बढ़कर अनुसंधान, नवाचार और उभरती प्रौद्योगिकियों से प्रेरित होकर “Laboratory of the World” के रूप में उभरना चाहिए, Union Minister of State अनुप्रिया पटेल ने शनिवार को कहा।

अहमदाबाद स्थित भारतीय प्रबंधन संस्थान (IIMA) में “स्वास्थ्य सेवा में AI को आगे बढ़ाना” विषय पर आयोजित IIMA Healthcare Summit 2026 के तीसरे संस्करण को संबोधित करते हुए पटेल ने कोविड-19 महामारी के दौरान भारत की भूमिका को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि देश के दवा उद्योग ने 200 से अधिक देशों को टीकों और आवश्यक चिकित्सा उत्पादों की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित की।

उन्होंने कहा कि भारत के कोविड-19 टीकाकरण कार्यक्रम के तहत 2.2 अरब से अधिक खुराकें दी गईं।

स्वास्थ्य सेवा में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की परिवर्तनकारी क्षमता पर प्रकाश डालते हुए पटेल ने कहा कि AI दवा खोज में तेजी ला सकता है, व्यक्तिगत उपचार को सक्षम बना सकता है और बेहतर स्क्रीनिंग, नैदानिक निर्णय लेने तथा रोग निगरानी के माध्यम से स्वास्थ्य सेवा वितरण को मजबूत कर सकता है।

हालांकि, उन्होंने जोर दिया कि AI को रोगियों की गोपनीयता के लिए मजबूत सुरक्षा उपायों के साथ सुरक्षित, जिम्मेदार और मानव-केंद्रित तरीके से अपनाया जाना चाहिए।

उन्होंने कहा, “AI को मानव नैदानिक निर्णय को प्रतिस्थापित करने के बजाय उसका पूरक बनना चाहिए।” उन्होंने सरकार, शिक्षा जगत, स्वास्थ्य संस्थानों, स्टार्टअप और उद्योग के बीच अधिक सहयोग का आह्वान किया, ताकि पायलट परियोजनाओं से आगे बढ़कर जनसंख्या स्तर पर इन्हें लागू किया जा सके।

पटेल ने कहा कि स्वास्थ्य सेवा में AI के लिए उत्कृष्टता केन्द्र AIIMS नई दिल्ली, PGIMER चंडीगढ़ और AIIMS ऋषिकेश में स्थापित किए गए हैं।

मंत्री ने ₹5,000 करोड़ की प्रमोशन ऑफ रिसर्च एंड इनोवेशन इन फार्मा-मेडटेक सेक्टर (PRIP) योजना पर भी प्रकाश डाला, जिसका उद्देश्य अनुसंधान और उद्योग-अकादमिक सहयोग को मजबूत करना तथा भारत के नवाचार-आधारित विकास की ओर संक्रमण में सहायता करना है।

उन्होंने केन्द्रीय बजट में घोषित ₹10,000 करोड़ के बायोफार्मा शक्ति मिशन का भी उल्लेख किया, जिसका उद्देश्य बायोलॉजिक्स और बायोसिमिलर्स में क्षमताओं को मजबूत करना, कुशल जनशक्ति विकसित करना और घरेलू बायोफार्मास्युटिकल पारिस्थितिकी तंत्र को समर्थन देने के लिए नियामक और क्लिनिकल ट्रायल क्षमताओं को बढ़ाना है।

फार्मास्यूटिकल्स विभाग के सचिव मनोज जोशी ने फार्मास्यूटिकल और स्वास्थ्य सेवा क्षेत्रों में AI के बढ़ते उपयोग पर प्रकाश डाला।

उन्होंने कहा कि बड़ी दवा कंपनियां उत्पादन, मानव संसाधन, विपणन, वितरण और इन्वेंटरी प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में AI का तेजी से उपयोग कर रही हैं, जबकि विशेष रूप से बेंगलुरु और हैदराबाद में स्टार्टअप दवा खोज के लिए इस तकनीक का इस्तेमाल कर रहे हैं।

जोशी के अनुसार, AI स्टार्टअप को संभावित दवा उम्मीदवारों की पहचान करने और उनकी शॉर्टलिस्टिंग में अधिक तेजी से मदद कर रहा है, जिससे दवा खोज प्रक्रिया में लगने वाला समय काफी कम हो रहा है।

उन्होंने पूंजी तक पहुंच, सॉफ्टवेयर लाइसेंसिंग, कंप्यूटिंग क्षमता और विशेष प्रतिभाओं से जुड़ी चुनौतियों पर भी प्रकाश डाला और कहा कि सरकार नेशनल बायोफार्मा मिशन और IndiaAI मिशन जैसी पहलों के माध्यम से उनका समाधान करने के लिए काम कर रही है।

जोशी ने कहा कि सरकार फार्मास्यूटिकल क्षेत्र में AI-आधारित नवाचार को मजबूत करने के लिए पात्र स्टार्टअप को सॉफ्टवेयर लाइसेंसिंग और परिचालन लागत के लिए पर्याप्त सहायता प्रदान करने की दिशा में भी काम कर रही है।

उन्होंने उचित सुरक्षा उपायों के साथ भारतीय नवोन्मेषकों के लिए स्वास्थ्य सेवा और आनुवंशिक डेटा को सुलभ बनाने के महत्व पर जोर दिया और क्लिनिकल ट्रायल, प्रिसिजन मेडिसिन तथा रोगी-स्तरीय स्वास्थ्य सेवा डेटा के डिजिटलीकरण में AI की क्षमता को रेखांकित किया।

स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग की सचिव पुण्य सलिला श्रीवास्तव ने कहा कि सरकार जिम्मेदार और साक्ष्य-आधारित तरीके से AI के उपयोग को बढ़ावा देते हुए एक मजबूत डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण कर रही है।

उन्होंने कहा कि आयुष्मान भारत डिजिटल मिशन (ABDM) एक इंटर ऑपरेबल, ओपन-स्टैंडर्ड-आधारित डिजिटल स्वास्थ्य पारिस्थितिकी तंत्र तैयार कर रहा है, जिसमें 96 करोड़ से अधिक ABHA आईडी और 1,000 करोड़ से अधिक स्वास्थ्य रिकॉर्ड स्वास्थ्य सुविधाओं और पेशेवरों के बीच डिजिटल रूप से जोड़े जा चुके हैं।

श्रीवास्तव ने तपेदिक और डायबिटिक रेटिनोपैथी जैसी बीमारियों का शुरुआती स्तर पर पता लगाने के लिए AI-सक्षम अनुप्रयोगों के साथ-साथ eSanjeevani के माध्यम से AI-समर्थित नैदानिक निर्णय लेने की व्यवस्था पर भी प्रकाश डाला, जिससे 20 करोड़ से अधिक मरीज लाभान्वित हुए हैं।

उन्होंने गोपनीयता, जिम्मेदार AI, साक्ष्य-आधारित नवाचार तथा सरकार, शिक्षा जगत, स्टार्टअप और उद्योग के बीच सहयोग के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने IndiaAI मिशन और AIKosh का भी उल्लेख किया, जिनका उद्देश्य डेटासेट, AI मॉडल और टूलकिट तक पहुंच को लोकतांत्रिक बनाना है।

IIMA बोर्ड ऑफ गवर्नर्स के अध्यक्ष और Zydus Lifesciences के चेयरमैन पंकज पटेल ने दवा खोज से लेकर रोगी देखभाल तक पूरे स्वास्थ्य सेवा मूल्य श्रृंखला में AI की क्षमता पर चर्चा की। उन्होंने कहा कि यह तकनीक संभावित दवा उम्मीदवारों की पहचान में तेजी ला सकती है, क्लिनिकल ट्रायल के डिजाइन और मरीजों की भर्ती में सहायता कर सकती है तथा शोधकर्ताओं को शुरुआती चरण में ही विफलताओं की पहचान करने में मदद कर सकती है।

कार्यक्रम के दौरान, इंडियन फार्मास्युटिकल अलायंस (IPA) और IIM अहमदाबाद आर्काइव्स के सहयोग से तैयार डिजिटल पहल ‘इंडिया फार्मा आर्काइव्स’ का अनावरण किया गया। इस पहल का उद्देश्य मौखिक इतिहास, अभिलेखीय दस्तावेजों, तस्वीरों और दुर्लभ मीडिया के माध्यम से भारत के फार्मास्युटिकल उद्योग के विकास को दर्ज करना और संरक्षित करना है।

भारत के कोविड-19 वैक्सीन विकास और वैश्विक स्वास्थ्य संकट के प्रति देश की वैज्ञानिक, फार्मास्युटिकल और संस्थागत प्रतिक्रिया का वर्णन करने वाली एक पुस्तक का भी विमोचन किया गया।

IIMA हेल्थकेयर समिट 2026 में स्वास्थ्य सेवा उद्योग और शिक्षा जगत के नीति निर्माताओं तथा हितधारकों ने “स्वास्थ्य सेवा में AI को आगे बढ़ाना” विषय पर विचार-विमर्श किया। यह सरकार के IndiaAI मिशन और 2047 तक स्वस्थ एवं विकसित भारत के उसके दृष्टिकोण के अनुरूप है।

(Input from DD News)

 

 

Sanjay Sharan

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