नई दिल्ली । Union Government ने बुधवार को नौ राज्यों में स्थित 20 महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की ई-नीलामी (e-auction) की आठवीं किस्त शुरू की। इसका उद्देश्य आवश्यक खनिज संसाधनों की उपलब्धता सुनिश्चित करना, आयात पर निर्भरता कम करना तथा स्वच्छ ऊर्जा, रक्षा, एयरोस्पेस और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों के लिए आपूर्ति श्रृंखलाओं को मजबूत करना है।
Union Minister for Coal and Mines जी. किशन रेड्डी ने कोयला एवं खान राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे के साथ इंडिया माइनिंग वीक 2026 के कर्टेन रेज़र कार्यक्रम के दौरान नीलामी के इस नए दौर की शुरुआत की। इस कार्यक्रम में केंद्र और राज्य सरकारों के वरिष्ठ अधिकारी, उद्योग जगत के प्रतिनिधि, सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रम, थिंक टैंक, संभावित बोलीदाता तथा मीडिया प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
सभा को संबोधित करते हुए श्री रेड्डी ने कहा कि इंडिया माइनिंग वीक को एक प्रमुख मंच के रूप में विकसित किया गया है, जो नीति-निर्माताओं, उद्योग जगत के नेताओं, निवेशकों, प्रौद्योगिकी प्रदाताओं और शिक्षाविदों को एक साथ लाकर भारत के खनन क्षेत्र की वृद्धि को गति देगा। उन्होंने कहा कि आठवीं किस्त की शुरुआत खनिज सुरक्षा को मजबूत करने, निवेश आकर्षित करने और देश की खनिज क्षमता का दोहन कर वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी तथा भविष्य के लिए तैयार खनन पारिस्थितिकी तंत्र विकसित करने की सरकार की निरंतर प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
राज्य मंत्री सतीश चंद्र दुबे ने खनन क्षेत्र को राष्ट्र निर्माण, ऊर्जा सुरक्षा और विकसित भारत के विजन का एक प्रमुख स्तंभ बताया। उन्होंने कहा कि वाणिज्यिक खनन, डिजिटल शासन और निजी क्षेत्र की बढ़ती भागीदारी के माध्यम से इस क्षेत्र में व्यापक परिवर्तन हो रहा है। उन्होंने कहा कि इन सुधारों से पारदर्शिता, दक्षता एवं सतत विकास को बढ़ावा मिल रहा है, साथ ही यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि खनन का लाभ स्थानीय समुदायों तक भी पहुंचे।
खान सचिव पीयूष गोयल ने कहा कि इंडिया माइनिंग वीक की परिकल्पना एक वार्षिक वैश्विक मंच के रूप में की गई है, जिसका उद्देश्य भारत की खनन क्षमता को प्रदर्शित करना, प्रौद्योगिकी अपनाने को प्रोत्साहित करना तथा सरकारों, उद्योग और निवेशकों के बीच साझेदारी को बढ़ावा देना है।
उन्होंने बताया कि आठवीं किस्त में नौ राज्यों में फैले 20 महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज ब्लॉक शामिल हैं, जिससे अब तक नीलामी के लिए पेश किए गए महत्वपूर्ण खनिज ब्लॉकों की कुल संख्या 88 हो गई है। इनमें से 56 ब्लॉकों की सफलतापूर्वक नीलामी की जा चुकी है, जो भारत के खनन सुधारों के प्रति उद्योग जगत के बढ़ते विश्वास को दर्शाती है।
इस नई किस्त में 13 नए पहचाने गए खनिज ब्लॉक तथा खनिज (नीलामी) नियमों के अनुसार दूसरी बार नीलामी के लिए प्रस्तुत किए गए 7 ब्लॉक शामिल हैं।
राज्यों में छत्तीसगढ़ में सर्वाधिक पांच ब्लॉक नीलामी के लिए उपलब्ध हैं। इसके बाद बिहार तथा ओडिशा में तीन-तीन ब्लॉक हैं। आंध्र प्रदेश, महाराष्ट्र और राजस्थान में दो-दो ब्लॉक हैं, जबकि पंजाब, तेलंगाना और पश्चिम बंगाल में एक-एक ब्लॉक नीलामी के लिए उपलब्ध है।
इस खनिज पोर्टफोलियो में मोलिब्डेनम, ग्रेफाइट, ग्लॉकोनाइट, वैनेडियम युक्त मैग्नेटाइट-इल्मेनाइट, वैनेडियम, गैलियम, टाइटेनियम, दुर्लभ मृदा तत्व (Rare Earth Elements-REE), बॉक्साइट, एल्यूमिनस लेटराइट, फॉस्फोराइट, चूना पत्थर, मैंगनीज, पोटाश, हैलाइट, टंगस्टन तथा लिथियम, सीज़ियम और रूबिडियम जैसे दुर्लभ धातु शामिल हैं।
खान मंत्रालय के अनुसार, ये खनिज स्वच्छ ऊर्जा प्रौद्योगिकियों, इलेक्ट्रिक मोबिलिटी, उन्नत विनिर्माण, उर्वरक, रक्षा, एयरोस्पेस, इलेक्ट्रॉनिक्स तथा कई अन्य रणनीतिक उद्योगों के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण हैं। इनकी नीलामी से भारत की खनिज सुरक्षा मजबूत होगी, आयात पर निर्भरता कम होगी तथा दीर्घकालिक औद्योगिक विकास और देश के ऊर्जा संक्रमण को समर्थन मिलेगा।
निविदा दस्तावेजों की बिक्री 15 जुलाई से शुरू हो चुकी है और यह 14 सितंबर 2026 को भारतीय समयानुसार शाम 5 बजे तक जारी रहेगी। तकनीकी बोलियों और प्रारंभिक मूल्य प्रस्तावों को जमा करने की अंतिम तिथि 21 सितंबर, 2026 को शाम 5 बजे तक निर्धारित की गई है।
मंत्रालय ने बताया कि नीलामी एक पारदर्शी दो-चरणीय आरोही अग्रिम नीलामी (Two-stage Ascending Forward Auction) प्रक्रिया के माध्यम से ऑनलाइन आयोजित की जाएगी। बोली प्रक्रिया के दौरान खनिज प्रेषण (Mineral Dispatched) के मूल्य के सर्वाधिक प्रतिशत का उद्धरण देने वाले बोलीदाता का चयन पसंदीदा बोलीदाता (Preferred Bidder) के रूप में किया जाएगा।
मंत्रालय ने कहा कि आठवीं किस्त की शुरुआत के साथ ही अन्वेषण और खनन के लिए उपलब्ध महत्वपूर्ण एवं रणनीतिक खनिज ब्लॉकों की श्रृंखला को और मजबूत किया गया है। इस पहल का उद्देश्य घरेलू खनिज सुरक्षा को सुदृढ़ करना, निजी क्षेत्र की भागीदारी को बढ़ावा देना तथा विकसित भारत 2047 के विजन के अनुरूप एक मजबूत, आत्मनिर्भर और वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी खनिज क्षेत्र का निर्माण करना है।
(Input from DD News)
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