नई दिल्ली । Ministry of New and Renewable Energy द्वारा National Green Hydrogen Mission को लागू किया जा रहा है, जिसका उद्देश्य एक मजबूत घरेलू हरित हाइड्रोजन पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण करना और भारत को इसके उत्पादन, उपयोग और निर्यात के लिए एक संभावित वैश्विक केन्द्र के रूप में स्थापित करना है। इस मिशन को Union Cabinet ने जनवरी 2023 में 2029-30 तक की अवधि के लिए 19,744 करोड़ रुपये के प्रारंभिक परिव्यय के साथ मंजूरी दी थी।
उत्तर प्रदेश के ग्रेटर नोएडा में स्थापित एनटीपीसी ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी स्टेशन एक ऐतिहासिक पहल है, जो भारत के परिवहन क्षेत्र के लिए एक स्वच्छ, कुशल और टिकाऊ ईंधन के रूप में हरित हाइड्रोजन की क्षमता को प्रदर्शित करती है। यह एकीकृत सुविधा हाइड्रोजन उत्पादन, संपीड़न, उच्च दबाव भंडारण और वाहनों में ईंधन भरने की सुविधाओं को एक साथ लाती है।
मीडिया से बातचीत में एनटीपीसी-रिन्यूएबल एनर्जी के कार्यकारी निदेशक डीएमआर पांडा ने बताया कि वर्तमान में पांच हाइड्रोजन चालित बसों में हाइड्रोजन ईंधन भरा जा रहा है और प्रत्येक बस एक बार ईंधन भरने पर 720 किलोमीटर तक की दूरी तय कर सकती है।
उन्होंने कहा कि हाइड्रोजन के उत्पादन के लिए भूजल का उपयोग नहीं किया जाता है और इसके लिए केवल सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट के उपचारित पानी का उपयोग किया जा रहा है। श्री पांडा ने उम्मीद जताई कि भविष्य में हाइड्रोजन ईंधन की लागत डीजल और पेट्रोल की लागत से कम होगी।
एनटीपीसी ग्रीन हाइड्रोजन मोबिलिटी स्टेशन को हाइड्रोजन से चलने वाले भारी वाहनों और यात्री वाहनों को सहायता प्रदान करने के लिए डिजाइन किया गया है, जिससे एक एकीकृत हाइड्रोजन मोबिलिटी पारिस्थितिकी तंत्र का निर्माण हो सके।
यह भारत के स्वच्छ, सुरक्षित और टिकाऊ परिवहन पारिस्थितिकी तंत्र की दिशा में आगे बढ़ने में योगदान देता है और देश के मोबिलिटी परिवर्तन के लिए हाइड्रोजन को एक महत्वपूर्ण ईंधन के रूप में उभरने में सहायता करता है।
(Input from News on air)
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