UDISE+ । PTR । GER: यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफार्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस रिपोर्ट से पता चलता है कि टीचरों की संख्या बढ़ढ़ने से स्कूल छोड़ने वाले (ड्रॉपआउट) छात्रों की संख्या में भारी कमी आई है

UDISE+ । PTR । GER: यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इनफार्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस रिपोर्ट से पता चलता है कि टीचरों की संख्या बढ़ढ़ने से स्कूल छोड़ने वाले (ड्रॉपआउट) छात्रों की संख्या में भारी कमी आई है

नई दिल्ली । केन्द्रीय शिक्षा मंत्रालय ने मंगलवार को यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) 2025-26 रिपोर्ट जारी की है, जिसमें शिक्षक संख्या, छात्र प्रतिधारण, डिजिटल अवसंरचना और विद्यालयी सुविधाओं में सुधार को रेखांकित किया गया है, जबकि विद्यालयी शिक्षा के प्रमुख स्तरों पर ड्रॉपआउट दर में लगातार गिरावट दर्ज की गई है।

रिपोर्ट के अनुसार, शिक्षकों की संख्या 2022-23 के 94,83,294 से बढ़कर 2025-26 में 1,02,73,020 हो गई, जो इस अवधि में 8.3 फीसदी की वृद्धि दर्शाती है। शिक्षकों की बेहतर उपलब्धता के कारण छात्र-शिक्षक अनुपात (PTR) आधारभूत स्तर पर 10, प्रारंभिक स्तर पर 12, मध्य स्तर पर 17 और माध्यमिक स्तर पर 21 हो गया, जो सभी राष्ट्रीय शिक्षा नीति द्वारा अनुशंसित 30:1 के अनुपात से बेहतर हैं।

Dropout दर में भी गिरावट दर्ज की गई। प्रारंभिक स्तर पर यह दर 2024-25 के 2.3 फीसदी से घटकर 2025-26 में 1.8 फीसदी हो गई, जबकि माध्यमिक स्तर पर यह 8.2 फीसदी से घटकर 7 फीसदी रह गई। मंत्रालय ने कहा कि यह प्रवृत्ति छात्र प्रतिधारण में सुधार लाने के उद्देश्य से शुरू की गई पहलों के प्रभाव को दर्शाती है।

मध्य और माध्यमिक स्तर पर प्रतिधारण दर में सुधार हुआ और यह क्रमशः 83.7 फीसदी तथा 51.9 फीसदी तक पहुंच गई। मंत्रालय ने कहा कि माध्यमिक स्तर पर यह सुधार आंशिक रूप से माध्यमिक शिक्षा प्रदान करने वाले विद्यालयों के विस्तार के कारण हुआ है, जिससे छात्रों के लिए पहुंच आसान हुई है।

रिपोर्ट में माध्यमिक स्तर पर सकल नामांकन अनुपात (GER) में भी वृद्धि दर्ज की गई, जो 2024-25 के 68.5 फीसदी से बढ़कर 2025-26 में 71.7 फीसदी हो गया, जो विद्यालयी शिक्षा में बढ़ती भागीदारी का संकेत है।

विद्यालयी शिक्षा के विभिन्न स्तरों के बीच छात्रों के संक्रमण में भी सुधार हुआ। आधारभूत स्तर से प्रारंभिक स्तर पर संक्रमण दर बढ़कर 99.2 प्रतिशत, प्रारंभिक से मध्य स्तर पर 93.8 प्रतिशत और मध्य से माध्यमिक स्तर पर 88.3 प्रतिशत हो गई।

एकल शिक्षक वाले विद्यालयों की संख्या घटकर 1,00,843 रह गई, जो पिछले वर्ष की तुलना में लगभग 3 फीसदी कम है, जबकि शून्य नामांकन वाले विद्यालयों की संख्या लगभग 29 प्रतिशत घटकर 5,663 रह गई।

रिपोर्ट में डिजिटल अवसंरचना में भी सुधार दर्ज किया गया। कंप्यूटर सुविधा वाले विद्यालयों का प्रतिशत 2024-25 के 64.7 फीसदी से बढ़कर 2025-26 में 69.9 फीसदी हो गया, जबकि इंटरनेट सुविधा वाले विद्यालयों का फीसदी के आधार पर 63.5 फीसदी से बढ़कर 67.4 फीसदी हो गया।

बुनियादी अवसंरचना में भी सुधार हुआ है। अब 95 फीसदी विद्यालयों में बिजली, 99.5 फीसदी में पेयजल, 98.5 फीसदी में छात्राओं के लिए शौचालय, 97.2 फीसदी में छात्रों के लिए शौचालय और 96.9 फीसदी में हाथ धोने की सुविधा उपलब्ध है। 90.5 फीसदी विद्यालयों में पुस्तकालय उपलब्ध हैं, जबकि 58.2 फीसदी विद्यालयों में दिव्यांग छात्रों की सुगमता के लिए हैंडरेल सहित रैंप उपलब्ध हैं।

रिपोर्ट के अनुसार, 2025-26 में शिक्षण कार्यबल में महिलाओं की हिस्सेदारी बढ़कर 54.9 फीसदी हो गई, जो एक वर्ष पहले 54.2 फीसदी थी। छात्राओं का नामांकन भी बढ़कर 48.4 फीसदी हो गया, जो विद्यालयी शिक्षा में लैंगिक समानता की दिशा में निरंतर प्रगति को दर्शाता है।

(Input from DD News)

 

Sanjay Sharan

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