नई दिल्ली । Supreme Court ने आज श्री राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट को प्राप्त दान के प्रबंधन की न्यायालय की निगरानी में जांच की मांग वाली जनहित याचिका (PIL) पर तत्काल सुनवाई से इनकार कर दिया। हालांकि, अदालत ने याचिकाकर्ता को आश्वासन दिया कि मामले को नियमानुसार सूचीबद्ध किया जाएगा।
याचिकाकर्ता के रूप में स्वयं पेश हुए अधिवक्ता नरेंद्र कुमार गोस्वामी ने न्यायमूर्ति बी.वी. नागरत्ना और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची की पीठ के समक्ष कहा कि उनकी तत्काल प्रार्थना केवल मामले की शीघ्र सुनवाई सूचीबद्ध कराने की है, ताकि महत्वपूर्ण साक्ष्यों को सुरक्षित रखा जा सके।
याचिका में अयोध्या स्थित राम मंदिर में प्राप्त दान और चढ़ावे से संबंधित सीसीटीवी फुटेज, डिजिटल भुगतान रिकॉर्ड तथा अन्य साक्ष्यों को सुरक्षित रखने की मांग की गई है। साथ ही, ट्रस्ट को प्राप्त दान का फॉरेंसिक ऑडिट कराने और मंदिर निधि के प्रबंधन में अधिक पारदर्शिता सुनिश्चित करने की भी मांग की गई है।
याचिका में कथित financial irregularities का उल्लेख किया गया है और उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा गठित विशेष जांच दल (SIT) की चल रही जांच का भी हवाला दिया गया है। याचिकाकर्ता ने स्पष्ट किया कि यह मामला केवल दान के प्रशासन और प्रबंधन से संबंधित है तथा इसका उद्देश्य धार्मिक गतिविधियों में किसी प्रकार का हस्तक्षेप करना नहीं है।
इस बीच, लखनऊ मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत की अध्यक्षता वाले तीन सदस्यीय विशेष जांच दल (SIT) ने हाल ही में अपनी प्रारंभिक जांच रिपोर्ट राज्य सरकार को सौंप दी है। मंदिर निधि के कथित गबन के मामले में विस्तृत जांच अभी जारी है।
(Input from News on Air)
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