नई दिल्ली । Indian Economy चालू वित्त वर्ष की पहली तिमाही में लगभग 7 फीसदी की दर से बढ़ने की संभावना है, जो पहले के अनुमानों से अधिक है। यह वृद्धि मजबूत आर्थिक संकेतकों, बेहतर औद्योगिक गतिविधियों और निर्यात में सुधार के कारण समर्थित है।
कल जारी SBI रिसर्च की प्री-मॉनिटरी पॉलिसी कमेटी (MPC) रिपोर्ट के अनुसार, यह वृद्धि अनुमान भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के पहले के अनुमानों से बेहतर है, जिन्हें भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं के कारण कम किया गया था।
रिपोर्ट में कहा गया है कि अप्रैल-जून तिमाही के दौरान उच्च-आवृत्ति (हाई-फ्रीक्वेंसी) आर्थिक संकेतकों में व्यापक सुधार के कारण आर्थिक परिदृश्य बेहतर हुआ है। रिपोर्ट के अनुसार, जून में घरेलू यात्री वाहन बिक्री में साल-दर-साल 24.1 फीसदी की वृद्धि हुई, बिजली की मांग 11.5 फीसदी बढ़ी, Export में 15.5 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, औद्योगिक ऋण में 19.2 फीसदी का विस्तार हुआ और औद्योगिक उत्पादन सूचकांक (IIP) में 7.3 फीसदी की वृद्धि हुई, जो तिमाही के दौरान मजबूत आर्थिक गति का संकेत देती है।
SBI रिसर्च ने यह भी कहा कि पश्चिम एशिया संकट के कारण वैश्विक वातावरण अभी भी अनिश्चित बना हुआ है, लेकिन भारत की घरेलू अर्थव्यवस्था ने लचीलापन दिखाया है।
रिपोर्ट में कहा गया है कि Monsoon की स्थिति में सुधार आने वाले महीनों में आर्थिक गतिविधियों को और समर्थन दे सकता है। इसमें उल्लेख किया गया है कि जुलाई में सामान्य से अधिक वर्षा होने के कारण देशव्यापी Rainfall Deficit घटकर लगभग 13 फीसदी रह गया है, जबकि जलाशयों का जलस्तर सामान्य स्तर पर लौट आया है और खरीफ बुवाई पिछले वर्ष की तुलना में केवल 4.7 फीसदी कम है, जो बेहतर फसल की संभावनाओं की ओर संकेत करता है।
(Input from News on Air)
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