President । On the eve of 80th Independence Day: राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए मिलकर कोशिश करने की अपील की, विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और महिलाओं की अगुवाई में विकास पर दिया ज़ोर

President । On the eve of 80th Independence Day: राष्ट्रपति श्रीमती मुर्मू ने 2047 तक विकसित भारत बनाने के लिए मिलकर कोशिश करने की अपील की, विकास, राष्ट्रीय सुरक्षा और महिलाओं की अगुवाई में विकास पर दिया ज़ोर

नई दिल्ली । President श्रीमती द्रौपदी मुर्मु ने On the eve of 80th Independence Day राष्ट्र के नाम अपने संबोधन में नागरिकों से 2047 तक विकसित भारत के निर्माण के लिए सामूहिक रूप से कार्य करने का आह्वान किया। उन्होंने समावेशी विकास, डिजिटल अवसंरचना, महिला सशक्तिकरण, युवाओं की भागीदारी, राष्ट्रीय सुरक्षा और पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्रों में देश की प्रगति को भी रेखांकित किया।

गुरुवार शाम राष्ट्र को संबोधित करते हुए President ने देश और विदेश में रह रहे सभी भारतीयों को शुभकामनाएँ दीं और कहा कि तिरंगा देश की स्वतंत्रता और आकांक्षाओं का प्रतीक बना हुआ है।

President श्रीमती मुर्मू ने कहा कि स्वतंत्रता का वास्तविक अर्थ यह सुनिश्चित करना है कि प्रत्येक नागरिक को अपनी आकांक्षाओं को पूरा करने और भारत को विश्व के अग्रणी राष्ट्रों में शामिल बनाने में योगदान देने के अवसर प्राप्त हों। उन्होंने विद्यार्थियों, शिक्षकों, वैज्ञानिकों, स्वास्थ्यकर्मियों, किसानों, श्रमिकों, उद्यमियों, खिलाड़ियों, कलाकारों, लोकसेवकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और सुरक्षा बलों के कर्मियों की राष्ट्र निर्माण में भूमिका की सराहना की।

President ने कहा कि भारत 2047 तक विकसित भारत के लक्ष्य की ओर अग्रसर है और अंत्योदय के सिद्धांत के मार्गदर्शन में यह सुनिश्चित किया जा रहा है कि विकास का लाभ प्रत्येक नागरिक तक पहुँचे।

President ने स्वतंत्रता संग्राम और विभाजन को किया याद

भारत के स्वतंत्रता आंदोलन को स्मरण करते हुए राष्ट्रपति ने महात्मा गांधी, डॉ. बी.आर. आंबेडकर तथा अन्य स्वतंत्रता सेनानियों को श्रद्धांजलि अर्पित की। उन्होंने कहा कि विभिन्न विचारधाराओं के लोग स्वतंत्रता के साझा उद्देश्य के लिए एकजुट हुए थे।

14 अगस्त को मनाए जाने वाले विभाजन विभीषिका स्मृति दिवस के अवसर पर President श्रीमती मुर्मू ने उन लोगों को याद किया जिन्होंने विभाजन के दौरान अपने प्राण गंवाए या विस्थापित हुए। उन्होंने स्वतंत्र भारत में 550 से अधिक रियासतों के एकीकरण की चुनौती का भी उल्लेख किया और देश के राजनीतिक एकीकरण में सरदार वल्लभभाई पटेल की भूमिका को श्रद्धांजलि दी।

President ने कहा कि जनभागीदारी भारत की लोकतांत्रिक परंपरा का सदैव केंद्रीय तत्व रही है। उन्होंने कहा कि संविधान प्रत्येक नागरिक को समानता, अवसर और गरिमा की गारंटी देता है, जबकि कार्यपालिका, विधायिका और न्यायपालिका की नागरिकों के प्रति अपनी-अपनी विशिष्ट जिम्मेदारियाँ हैं।

गरीबी उन्मूलन, कल्याण और वित्तीय समावेशन पर प्रकाश

पिछले एक दशक में भारत की विकास यात्रा का उल्लेख करते हुए President श्रीमती मुर्मू ने तीव्र और समावेशी विकास, विरासत और आधुनिक विकास के समन्वय तथा विकास में बाधा बनने वाली पुरानी रुकावटों को दूर करने का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि 25 करोड़ से अधिक लोग गरीबी से बाहर निकले हैं, जबकि प्रधानमंत्री जन धन योजना के माध्यम से लगभग 59 करोड़ लोग बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े हैं, जिनमें 32 करोड़ से अधिक महिलाएँ शामिल हैं।

President ने कहा कि सरकार की खाद्य सुरक्षा योजनाओं के तहत 80 करोड़ से अधिक लोगों को निःशुल्क खाद्यान्न मिल रहा है, जबकि आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना के अंतर्गत लगभग 60 करोड़ लोगों को प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक की स्वास्थ्य सुरक्षा उपलब्ध है।

उन्होंने प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि और किसान क्रेडिट कार्ड के माध्यम से किसानों को दिए जा रहे समर्थन का भी उल्लेख किया।

डिजिटल अवसंरचना और आधुनिक संपर्क व्यवस्था

President श्रीमती मुर्मू ने कहा कि भारत ने दुनिया की सबसे बड़ी डिजिटल अवसंरचना विकसित की है और डिजिटल भुगतान अब छोटे ग्रामीण व्यवसायों तथा रेहड़ी-पटरी विक्रेताओं के बीच भी सामान्य हो गया है।

उन्होंने कहा कि दुनिया के आधे से अधिक रीयल-टाइम डिजिटल लेनदेन भारत में होते हैं और प्रौद्योगिकी के माध्यम से सरकार कल्याणकारी लाभों का वितरण अधिक पारदर्शी तरीके से कर पा रही है।

President ने राजमार्गों, जलमार्गों, रेलमार्गों और वायुमार्गों के विस्तार का उल्लेख करते हुए कहा कि आधुनिक अवसंरचना नए उद्यमों के अवसर पैदा कर रही है, रोजगार सृजित कर रही है और निवेशकों के विश्वास को मजबूत कर रही है।

वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत मजबूत

विश्व के विभिन्न हिस्सों में युद्ध और अस्थिरता की पृष्ठभूमि में President श्रीमती मुर्मू ने कहा कि भारत की अर्थव्यवस्था विश्व की सबसे तेज़ी से बढ़ती प्रमुख अर्थव्यवस्था के रूप में आगे बढ़ रही है।

उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर भारत पहल ने भारत की आर्थिक प्रगति और राष्ट्रीय सुरक्षा की नींव को मजबूत किया है। उन्होंने नवीकरणीय ऊर्जा के क्षेत्र में भारत के प्रयासों तथा निर्धारित समय से पहले सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति की दिशा में हुई प्रगति का भी उल्लेख किया।

विदेश नीति के संबंध में राष्ट्रपति ने कहा कि राष्ट्रीय हित इसकी आधारशिला है और शांति, सहयोग, संवाद तथा वसुधैव कुटुम्बकम् का सिद्धांत भारत की वैश्विक सहभागिता का मार्गदर्शन करता है।

उन्होंने कहा कि विभिन्न देशों के साथ भारत के मुक्त व्यापार समझौते आर्थिक सहयोग को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से किए गए हैं और वैश्विक दक्षिण के देशों के बीच भारत महत्वपूर्ण भूमिका निभाता रहा है।

पर्यावरण संरक्षण का आह्वान

President ने नागरिकों से भविष्य की पीढ़ियों के लिए प्राकृतिक संसाधनों की रक्षा करने का आह्वान किया और कहा कि पर्यावरण संरक्षण भारत की परंपराओं में गहराई से निहित है।

उन्होंने ‘एक पेड़ माँ के नाम’ और लाइफस्टाइल फॉर एनवायरनमेंट (LiFE) जैसे अभियानों का उल्लेख करते हुए प्रकृति संरक्षण के लिए व्यक्तिगत और सामूहिक प्रयासों का आह्वान किया।

विकास के केंद्र में महिलाएँ और युवा

President श्रीमती मुर्मू ने शिक्षा, खेल, कृषि, रक्षा और उद्यमिता में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी को रेखांकित किया। उन्होंने कहा कि हाल ही में ग्लासगो में संपन्न राष्ट्रमंडल खेलों में भारत के 13 स्वर्ण पदकों में से 8 महिलाओं ने जीते।

President ने कहा कि 10 करोड़ से अधिक महिलाएँ स्वयं सहायता समूहों की सदस्य हैं और तीन करोड़ लखपति दीदियों का लक्ष्य प्राप्त कर लिया गया है। अब देश तीन करोड़ और लखपति दीदियों के निर्माण की दिशा में आगे बढ़ रहा है।

President श्रीमती मुर्मू ने उद्यमिता में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी का उल्लेख करते हुए कहा कि मुद्रा योजना के अंतर्गत वित्तीय सहायता प्राप्त करने वाले लाभार्थियों में लगभग दो-तिहाई महिलाएँ हैं।

उन्होंने कहा कि 2023 में पारित नारी शक्ति वंदन अधिनियम का उद्देश्य लोकसभा और राज्य विधानसभाओं में महिलाओं को 33 प्रतिशत प्रतिनिधित्व प्रदान करना है।

भारत की 65 प्रतिशत आबादी के 35 वर्ष से कम आयु का होने का उल्लेख करते हुए President ने युवाओं को देश की सबसे मूल्यवान संपत्ति बताया। उन्होंने युवा उद्यमियों, नवोन्मेषकों और पेशेवरों की सराहना की और कहा कि भारत का स्टार्टअप पारिस्थितिकी तंत्र रोजगार और उद्यम के नए अवसर प्रदान कर रहा है।

परीक्षा सुधार और युवाओं के लिए अवसर

President ने कहा कि विद्यार्थी भारत के भविष्य के निर्माता हैं और उनके अवसरों की रक्षा करना आवश्यक है।

उन्होंने कहा कि सार्वजनिक परीक्षाएँ करियर के अवसरों का द्वार हैं और सरकार अनुचित गतिविधियों पर रोक लगाने तथा परीक्षाओं को अधिक पारदर्शी, सुरक्षित और विश्वसनीय बनाने के लिए व्यापक सुधार कर रही है।

President श्रीमती मुर्मू ने युवाओं के शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया और खेलों तथा खेलो इंडिया कार्यक्रम की भूमिका को रेखांकित किया।

साथ ही उन्होंने वरिष्ठ नागरिकों के प्रति अधिक संवेदनशीलता दिखाने का आह्वान किया और कहा कि 70 वर्ष या उससे अधिक आयु के लगभग छह करोड़ लोग प्रतिवर्ष 5 लाख रुपये तक की निःशुल्क स्वास्थ्य सेवाओं का लाभ उठा सकते हैं।

राष्ट्रपति ने ऑपरेशन सिंदूर और राष्ट्रीय सुरक्षा का किया उल्लेख

President ने कारगिल विजय दिवस के अवसर पर सशस्त्र बलों को श्रद्धांजलि अर्पित की और ऑपरेशन सिंदूर के शुभारंभ के एक वर्ष पूर्ण होने का उल्लेख किया।

उन्होंने कहा कि इस अभियान ने आतंकवाद के विरुद्ध भारतीय सशस्त्र बलों की सटीक कार्रवाई की क्षमता को प्रदर्शित किया और आतंकवादियों तथा उनके समर्थकों को कड़ा संदेश दिया।

President श्रीमती मुर्मू ने पाकिस्तान के साथ सिंधु जल संधि के निलंबन को राष्ट्रीय हित, विशेषकर किसानों के हित में उठाया गया एक निर्णायक कदम बताया।

उन्होंने भारत को नक्सलवाद मुक्त बनाने को भी एक बड़ी उपलब्धि बताया और कहा कि वामपंथी उग्रवाद से प्रभावित क्षेत्रों में अब विकास तथा सांस्कृतिक एवं खेल गतिविधियों में अधिक भागीदारी देखने को मिल रही है।

विरासत और राष्ट्रीय पहचान

President ने भारत की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण और संवर्धन में हुई उपलब्धियों का उल्लेख करते हुए कहा कि पिछले वर्ष मराठा सैन्य परंपरा से जुड़े 12 किलों को यूनेस्को विश्व धरोहर सूची में शामिल किया गया, जबकि इस वर्ष सारनाथ को भी इस सूची में स्थान मिला है।

उन्होंने कहा कि भारत का विकास उसकी सांस्कृतिक पहचान और विरासत से जुड़ा रहना चाहिए।

अपने संबोधन के समापन पर राष्ट्रपति मुर्मु ने कहा कि विकसित भारत के निर्माण का अंतिम उद्देश्य प्रत्येक भारतीय का विकास और कल्याण है।

उन्होंने तेलुगु राष्ट्रवादी लेखक गुरजाडा अप्पाराव का उद्धरण देते हुए कहा कि राष्ट्र केवल उसकी भूमि नहीं, बल्कि उसके लोग होते हैं।

President ने समावेशी देशभक्ति की भावना को अपनाने का आह्वान किया और नागरिकों से स्वतंत्र भारत को विकसित भारत में रूपांतरित करने के लिए स्वयं को समर्पित करने का आग्रह किया।

(Input from DD News)

Sanjay Sharan

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