नई दिल्ली । Ministry of Ports, Shipping and Waterways ने गुजरात में दो प्रमुख समुद्री अवसंरचना परियोजनाओं—पोरबंदर जिले में एक ग्रीनफील्ड जहाज निर्माण क्लस्टर तथा वाडिनार में 1,570 करोड़ रुपये की जहाज मरम्मत सुविधा—को शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम (SbDS) के तहत सैद्धांतिक मंजूरी प्रदान की है। इस कदम का उद्देश्य भारत की घरेलू जहाज निर्माण और जहाज मरम्मत क्षमताओं को मजबूत करना है।
ये परियोजनाएं सरकार के मैरीटाइम अमृत काल विजन 2047 का हिस्सा हैं और इनका उद्देश्य स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देना, विदेशी जहाज मरम्मत सुविधाओं पर निर्भरता कम करना तथा भारत को वैश्विक जहाज निर्माण केन्द्र के रूप में स्थापित करना है।
पोरबंदर जिले के कुच्छड़ी में ग्रीनफील्ड जहाज निर्माण क्लस्टर का विकास नेशनल शिपबिल्डिंग एंड हेवी इंडस्ट्रीज पार्क–गुजरात (NSHIP-Gujarat) के माध्यम से किया जाएगा। यह एक विशेष प्रयोजन वाहन (SPV) है, जिसे बंदरगाह, पोत परिवहन एवं जलमार्ग मंत्रालय तथा गुजरात मेरीटाइम बोर्ड द्वारा संयुक्त रूप से प्रोत्साहित किया गया है।
मंत्रालय के अनुसार, यह ग्रीनफील्ड जहाज निर्माण क्लस्टर गुजरात के पोरबंदर जिले के कुच्छड़ी में लगभग 2,000 एकड़ क्षेत्र में विकसित किया जाएगा। इस एकीकृत समुद्री विनिर्माण केन्द्र में आधुनिक शिपयार्ड, सहायक विनिर्माण इकाइयां, साझा अवसंरचना तथा क्षमता विकास केंद्र स्थापित किए जाएंगे। इससे प्रतिवर्ष 1.2 से 1.5 मिलियन ग्रॉस टनेज (GT) क्षमता वाले बड़े वाणिज्यिक जहाजों का निर्माण किया जा सकेगा, जिससे भारत की घरेलू जहाज निर्माण क्षमता में उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
दूसरी परियोजना कच्छ की खाड़ी स्थित वाडिनार में जहाज मरम्मत सुविधा के ब्राउनफील्ड विस्तार से संबंधित है, जिसका संयुक्त रूप से विकास कोचीन शिपयार्ड लिमिटेड (CSL) और दीनदयाल पोर्ट प्राधिकरण (DPA) द्वारा किया जाएगा। इस परियोजना को इस वर्ष मई में आर्थिक मामलों की मंत्रिमंडलीय समिति (CCEA) से मंजूरी मिल चुकी है और अब इसे SbDS के तहत सैद्धांतिक स्वीकृति प्रदान की गई है, जिससे यह पूंजीगत अवसंरचना पर 25 प्रतिशत वित्तीय सहायता के लिए पात्र हो गई है।
मंत्रालय ने बताया कि 1,570 करोड़ रुपये की इस सुविधा में 650 मीटर लंबी जेटी, दो बड़े फ्लोटिंग ड्राई डॉक, कार्यशालाएं और सहायक समुद्री अवसंरचना विकसित की जाएगी। वाडिनार की प्राकृतिक गहरी ड्राफ्ट क्षमता एवं प्रमुख अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों पर उसकी रणनीतिक स्थिति का लाभ उठाते हुए यह सुविधा 300 मीटर तक लंबाई वाले जहाजों की मरम्मत करने में सक्षम होगी, जिससे बड़े वाणिज्यिक जहाजों की मरम्मत के लिए भारत की विदेशी शिपयार्डों पर निर्भरता कम होगी।
Ministry of Ports, Shipping and Waterways सर्बानंद सोनोवाल ने कहा कि ये परियोजनाएं PM नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत के समुद्री क्षेत्र के परिवर्तन की दिशा में एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि हैं।
उन्होंने कहा कि सरकार ने सुधारों, अवसंरचना विकास तथा नीतिगत समर्थन के माध्यम से मजबूत आधार तैयार किया है तथा अब अगले चरण में प्रतिस्पर्धात्मकता, दक्षता और निवेश को बढ़ावा देकर समुद्री क्षेत्र को विकसित भारत के प्रमुख प्रेरक के रूप में स्थापित करने पर ध्यान केंद्रित किया जाएगा।
सोनोवाल ने कहा कि पोरबंदर और वाडिनार परियोजनाएं भारत के समुद्री विनिर्माण पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत करेंगी, बड़े पैमाने पर रोजगार सृजित करेंगी, घरेलू आपूर्ति श्रृंखलाओं को सुदृढ़ करेंगी और आत्मनिर्भर भारत तथा विकसित भारत के विजन के अनुरूप वैश्विक स्तर पर प्रतिस्पर्धी जहाज निर्माण एवं जहाज मरम्मत उद्योग का निर्माण करेंगी।
शिपबिल्डिंग डेवलपमेंट स्कीम (SbDS) केंद्र सरकार की व्यापक नीतिगत रूपरेखा का एक प्रमुख घटक है, जिसका उद्देश्य जहाज निर्माण क्षमता में तेजी लाना, निवेश आकर्षित करना, स्वदेशी विनिर्माण को बढ़ावा देना तथा समुद्री क्षेत्र में निजी क्षेत्र की अधिक भागीदारी को प्रोत्साहित करना है।
(Input from News on Air)
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