नई दिल्ली । PM नरेन्द्र मोदी ने बुधवार Ministry of Jal Shakti द्वारा आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय विभागीय जल शिखर सम्मेलन के समापन सत्र की अध्यक्षता करते हुए जल डेटा गवर्नेंस को मजबूत करने और जल क्षेत्र से संबंधित डेटा के संग्रह, विश्लेषण तथा उपयोग में सुधार के लिए कृत्रिम मेधा (AI) के उपयोग का आह्वान किया।
मजबूत और एकीकृत जल डेटा प्रबंधन की आवश्यकता पर जोर देते हुए PM ने जल क्षेत्र से संबंधित डेटा को एक साथ लाने तथा इसे व्यवस्थित रूप से प्रबंधित, विश्लेषित और उपयोग करने का सुझाव दिया। PM कार्यालय (पीएमओ) की ओर से जारी एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया है कि उन्होंने अधिक प्रभावी जल प्रबंधन और गवर्नेंस के लिए एक समान प्रारूप के माध्यम से डेटा संग्रह और विश्लेषण में एआई के उपयोग की सिफारिश की।
यह Summit विभागीय शिखर सम्मेलनों की उस श्रृंखला का पहला सम्मेलन था, जिसकी परिकल्पना PM मोदी ने टीम इंडिया की भावना को मजबूत करने, सहकारी संघवाद को गहरा करने और केन्द्र तथा राज्यों के बीच घनिष्ठ सहयोग के माध्यम से राष्ट्रीय प्राथमिकताओं के प्रति सामूहिक स्वामित्व को बढ़ावा देने के लिए की है। इसमें भारत की जल सुरक्षा के विभिन्न आयामों पर केन्द्रित विचार-विमर्श के लिए राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मंत्रियों तथा वरिष्ठ अधिकारियों ने भाग लिया।
दो दिनों तक चले गहन विचार-विमर्श की सराहना करते हुए PM ने जोर दिया कि Summit से निकलने वाले क्रियान्वयन योग्य और समयबद्ध कार्य-बिंदुओं को समीक्षा और सीखने की निरंतर प्रक्रिया के माध्यम से आगे बढ़ाया जाना चाहिए। उन्होंने जोर दिया कि शिखर सम्मेलन एक बार का अभ्यास बनकर नहीं रहना चाहिए और नियमित समीक्षा तथा अनुवर्ती कार्रवाई का आह्वान किया।
PM ने शहरीकरण से उत्पन्न होने वाली चुनौतियों, जिनमें जनसंख्या वृद्धि और भविष्य में पानी की आवश्यकताएं शामिल हैं, के प्रति शहरी स्थानीय निकायों को संवेदनशील बनाने का आह्वान किया और शहरी स्थानीय निकायों के लिए इसी तरह के चिंतन शिविर आयोजित करने का सुझाव दिया।
उन्होंने जल-बचत प्रौद्योगिकियों को अधिक व्यापक रूप से अपनाने का भी आह्वान किया और वैश्विक सर्वोत्तम प्रथाओं से परिचित कराने सहित समर्पित प्रदर्शनियों और कार्यशालाओं का सुझाव दिया, ताकि भारतीय निर्माता और हितधारक कुशल समाधानों को विकसित और बड़े पैमाने पर लागू कर सकें।
जन भागीदारी पर जोर देते हुए PM ने अधिक जन जागरूकता पैदा करने के लिए “Jal Utsav” को बढ़ावा देने का सुझाव दिया। उन्होंने स्पष्ट मानदंडों और मानक संचालन प्रक्रियाओं (एसओपी) द्वारा समर्थित गाद निकालने के कार्य को एक नियमित कार्यक्रम बनाने का आह्वान किया।
बांध सुरक्षा पर उन्होंने प्रत्येक मानसून से पहले कठोर तैयारी, निर्धारित सावधानियों का पालन और स्कूली छात्रों के बीच अधिक जागरूकता की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने उपयुक्त रूप से शैक्षिक पाठ्यक्रम में इसे शामिल करने का भी सुझाव दिया।
PM नरेन्द्र मोदी ने विश्वविद्यालयों और उच्च शिक्षण संस्थानों में जल प्रबंधन और गवर्नेंस से संबंधित ज्ञान तथा क्षमता को मजबूत करने का भी आह्वान किया। उन्होंने व्यावहारिक सीख और सफल हस्तक्षेपों को दोहराने की सुविधा के लिए जनप्रतिनिधियों, अधिकारियों और किसानों को शामिल करते हुए संरचित अंतर-राज्यीय अध्ययन दौरों का सुझाव दिया।
उन्होंने जल संकट से निपटने के लिए पूर्वानुमान आधारित और एकीकृत योजना की आवश्यकता पर भी जोर दिया, जिसमें कृषि और औद्योगिक उद्देश्यों के लिए उपचारित जल के उपयुक्त उपयोग को शामिल किया जा सके।
गुजरात के मुख्यमंत्री के रूप में अपने अनुभव का उल्लेख करते हुए प्रधानमंत्री ने कहा कि व्यवस्थित योजना, प्रतिबद्धता, पर्याप्त संसाधनों और सक्षम अधिकारियों के माध्यम से जल संकट की स्थितियों को अवसरों में बदला जा सकता है।
Union Minister for Jal Shakti सी. आर. पाटिल ने शिखर सम्मेलन के चार प्रमुख परिणामों पर प्रकाश डाला: जल अवसंरचना परियोजनाओं को तेजी से पूरा करना; जल संरक्षण को एक सतत जन आंदोलन के रूप में मजबूत करना; पेयजल स्रोतों की दीर्घकालिक स्थिरता सुनिश्चित करना; और ग्रामीण पेयजल योजनाओं के प्रभावी संचालन एवं रखरखाव को संस्थागत रूप देना।
(Input from News on Air)
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