नई दिल्ली । NITI Aayog ने शुक्रवार को निवेश अनुकूलता सूचकांक (IFI) जारी किया, जो एक डेटा-आधारित ढांचा है। इसका उद्देश्य यह आकलन करना है कि राज्य और केंद्र शासित प्रदेश निवेश के लिए अनुकूल वातावरण तैयार करने में कितने प्रभावी हैं। यह सूचकांक राज्य स्तर पर किए गए सुधारों का तुलनात्मक मूल्यांकन कर प्रतिस्पर्धी और सहकारी संघवाद को मजबूत करने तथा सर्वोत्तम प्रथाओं को अपनाने के लिए प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखता है।
यह रिपोर्ट जुलाई 2024 में नीति आयोग की 9वीं गवर्निंग काउंसिल की बैठक के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा निवेश-अनुकूल चार्टर (Investment-Friendly Charter) तैयार करने के दिए गए निर्देश के बाद तैयार की गई है। इसके बाद केंद्रीय बजट 2025-26 में राज्यों में निवेश माहौल को बेहतर बनाने वाले सुधारों को बढ़ावा देने के लिए निवेश अनुकूलता सूचकांक विकसित करने की घोषणा की गई थी।
आईएफआई सभी 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों का मूल्यांकन आठ प्रमुख स्तंभों—अवसंरचना, कारोबारी माहौल, संसाधन, सरकारी नीत, नियामकीय सुगमता, संस्थागत वातावरण, वित्तीय स्वास्थ्य और पर्यावरणीय लचीलापन के आधार पर करता है। यह ढांचा 84 संकेतकों पर आधारित है, जिसमें द्वितीयक आंकड़ों के साथ निवेशकों की धारणा संबंधी सर्वेक्षणों को शामिल कर राज्य स्तर के निवेश पारिस्थितिकी तंत्र का व्यापक आकलन किया गया है।
रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात, महाराष्ट्र, तमिलनाडु, गोवा और ओडिशा समग्र रैंकिंग में शीर्ष प्रदर्शन करने वाले राज्य रहे हैं। 15 राज्यों को फ्रंटरनर्स श्रेणी में रखा गया है, जबकि 8 राज्य और 8 केंद्र शासित प्रदेश क्रमशः इमर्जिंग परफॉर्मर्स और एस्पायरिंग स्टेट्स श्रेणियों में शामिल किए गए हैं।
मूल्यांकन में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भौगोलिक और प्रशासनिक परिस्थितियों के आधार पर निष्पक्ष तुलना सुनिश्चित करने के लिए तीन समकक्ष श्रेणियों में भी विभाजित किया गया है। बड़े राज्यों की श्रेणी में गुजरात पहले स्थान पर रहा, उसके बाद महाराष्ट्र और तमिलनाडु का स्थान रहा। पर्वतीय और पूर्वोत्तर राज्यों की श्रेणी में उत्तराखंड शीर्ष पर रहा, जबकि असम और हिमाचल प्रदेश क्रमशः दूसरे और तीसरे स्थान पर रहे। केंद्र शासित प्रदेश एवं सिटी स्टेट्स श्रेणी में गोवा पहले स्थान पर रहा, उसके बाद दिल्ली और चंडीगढ़ का स्थान रहा।
नीति आयोग ने कहा कि यह सूचकांक निवेश आकर्षित करने में राज्यों की महत्वपूर्ण भूमिका को मान्यता देता है, जो मजबूत अवसंरचना, प्रभावी नियमों, सशक्त संस्थानों और पूर्वानुमेय नीतिगत ढांचे के माध्यम से संभव होती है। राष्ट्रीय स्तर पर किए गए सुधार समग्र नीतिगत दिशा प्रदान करते हैं, लेकिन निवेश संबंधी निर्णयों पर राज्य स्तर के कारोबारी वातावरण की गुणवत्ता का महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ता है।
राज्यों की केवल रैंकिंग करने के अलावा, इस रिपोर्ट का उद्देश्य उनकी मजबूतियों की पहचान करना, सुधार की प्राथमिकताओं को रेखांकित करना और राज्यों के बीच अनुभवों के आदान-प्रदान को बढ़ावा देना भी है। इसे एक रणनीतिक सुधार उपकरण के रूप में तैयार किया गया है, जो निवेश पारिस्थितिकी तंत्र में निरंतर सुधार को प्रोत्साहित करेगा और भारत को निवेश गंतव्य के रूप में अधिक प्रतिस्पर्धी बनाएगा।
रिपोर्ट में प्रत्येक राज्य की विस्तृत प्रोफाइल भी शामिल है, जिसमें समान श्रेणी के राज्यों की तुलना में उसके प्रदर्शन का तुलनात्मक मूल्यांकन किया गया है। इन प्रोफाइलों में वस्तुनिष्ठ संकेतकों के साथ निवेशकों की प्रतिक्रिया को भी शामिल किया गया है, ताकि नीतिगत कमियों, सुधार की संभावनाओं और जमीनी स्तर पर कारोबारी अनुभव की पहचान की जा सके।
नीति आयोग ने कहा कि निवेश अनुकूलता सूचकांक का उद्देश्य विकसित भारत@2047 के विजन को समर्थन देना है, जिससे राज्य अपने निवेश पारिस्थितिकी तंत्र को मजबूत कर सकें, अधिक घरेलू और विदेशी निवेश आकर्षित कर सकें तथा सतत, समावेशी आर्थिक विकास को गति दे सकें।
(Input from DD News)
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