नई दिल्ली । सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (ART) क्षेत्र में तेजी से हो रहे विस्तार के बीच बढ़ती अनियमितताओं की चिंताओं को देखते हुए राष्ट्रीय महिला आयोग (NCW) ने आज एक उच्च स्तरीय विशेषज्ञ समिति का गठन किया।
यह समिति IVF क्लीनिकों, एआरटी केंद्रों और गैमीट बैंकों को नियंत्रित करने वाले नियामक ढांचे और संबंधित कानूनों की व्यापक समीक्षा करेगी। इसका मुख्य उद्देश्य महिलाओं के प्रजनन अधिकारों, गरिमा और सुरक्षा की रक्षा सुनिश्चित करना है। दिल्ली उच्च न्यायालय की पूर्व न्यायाधीश न्यायमूर्ति आशा मेनन इस विशेषज्ञ समिति की अध्यक्षता करेंगी।
समिति में न्यायपालिका, चिकित्सा, फोरेंसिक विज्ञान, कानून प्रवर्तन, स्त्री रोग, सार्वजनिक नीति तथा स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के विशेषज्ञ शामिल होंगे। आयोग ने कहा कि नियामक अनुपालन अब तक अनैतिक प्रथाओं को रोकने के लिए पर्याप्त साबित नहीं हुआ है।
आयोग ने कहा कि प्रजनन क्षेत्र में चिकित्सा पर्यटन के उभरने से भारत के कानूनी सुरक्षा प्रावधानों, विशेषकर लिंग चयन को रोकने के उद्देश्य से बनाए गए कानूनों को दरकिनार किए जाने की आशंका भी बढ़ी है। आयोग ने कहा कि राज्यों के बीच एक समान उपचार प्रोटोकॉल का अभाव महिलाओं को अनावश्यक चिकित्सीय प्रक्रियाओं, देखभाल के असमान मानकों और वित्तीय शोषण से बचाने के लिए अधिक सशक्त निगरानी की आवश्यकता को और स्पष्ट करता है।
समिति सहायक प्रजनन प्रौद्योगिकी (विनियमन) अधिनियम, 2021, surrogacy (Regulation) Act, 2021 तथा वर्ष 2026 में अधिसूचित संबंधित संशोधन नियमों के क्रियान्वयन की भी समीक्षा करेगी।
यह सहमति, गोपनीयता और जैविक अनुरेखण (Biological Traceability) से संबंधित मौजूदा सुरक्षा प्रावधानों की जांच करेगी, ऐसे नियामक और प्रक्रियागत अंतरालों की पहचान करेगी जो शोषण या धोखाधड़ीपूर्ण गतिविधियों को बढ़ावा दे सकते हैं, तथा संस्थागत जवाबदेही को मजबूत करने के लिए सुधारों की सिफारिश करेगी। समिति एआरटी क्लीनिकों और आईवीएफ केंद्रों के लिए मानक संचालन प्रक्रियाएं (SOPs) और सर्वोत्तम कार्यप्रणालियां भी प्रस्तावित करेगी, ताकि नैतिक उपचार पद्धतियों, मानकीकृत क्लीनिकल प्रोटोकॉल और पूरे क्षेत्र में अधिक पारदर्शिता को बढ़ावा दिया जा सके।
NCW ने दोहराया कि प्रजनन स्वास्थ्य सेवाएं गरिमा, सूचित सहमति, पारदर्शिता और जवाबदेही के सिद्धांतों पर आधारित होनी चाहिए तथा सहायक प्रजनन सेवाओं का लाभ लेने वाली प्रत्येक महिला को सुरक्षा, नैतिक उपचार और उसके अधिकारों के संरक्षण का पूरा भरोसा मिलना चाहिए।
(Input from News on Air)
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