नई दिल्ली । Ministry of Micro, Small and Medium Enterprises (MSME), एमएसएमई सस्टेनेबल (ज़ीरो डिफेक्ट, ज़ीरो इफेक्ट – ZED) प्रमाणन योजना के माध्यम से गुणवत्ता-आधारित और पर्यावरणीय रूप से टिकाऊ विनिर्माण को बढ़ावा दे रहा है। इस योजना के तहत 6.7 लाख से अधिक MSME को प्रमाणन प्राप्त हुआ है, जिससे उनकी घरेलू और वैश्विक बाजारों में प्रतिस्पर्धात्मकता बढ़ी है।
इस योजना का उद्देश्य MSME को विनिर्माण प्रक्रियाओं में सुधार करने, उच्च गुणवत्ता मानकों को अपनाने और अपने पर्यावरणीय प्रभाव को कम करने में सहायता करना है। इस पहल का एक प्रमुख फोकस महिला उद्यमियों को प्रोत्साहित करना है। इसके तहत सरकार 11 नवंबर, 2023 से महिला-स्वामित्व वाले एमएसएमई के लिए ZED प्रमाणन की लागत पर 100 फीसदी सब्सिडी प्रदान कर रही है, जिससे पात्र उद्यमों के लिए यह प्रमाणन प्रभावी रूप से निःशुल्क हो गया है।
यह प्रमाणन उद्यमों को गुणवत्ता, उत्पादकता, कार्यस्थल सुरक्षा और पर्यावरणीय स्थिरता से संबंधित मान्यता प्राप्त मानकों को अपनाकर अपने विनिर्माण तंत्र को मजबूत करने में सक्षम बनाता है। मंत्रालय के अनुसार, यह पहल व्यवसायों को परिचालन दक्षता बढ़ाने, बाजार में विश्वसनीयता स्थापित करने और व्यापक व्यावसायिक अवसरों के लिए तैयार होने में मदद करती है।
ZED ढांचा ब्रॉन्ज, सिल्वर और गोल्ड प्रमाणन प्रदान करता है, जिससे MSME चरणबद्ध तरीके से अपने गुणवत्ता और स्थिरता मानकों में सुधार कर सकते हैं। प्रमाणन सहायता के अतिरिक्त, पात्र उद्यम परीक्षण, प्रणाली या उत्पाद प्रमाणन की लागत का 75 फीसदी तक (अधिकतम 50,000 रुपये) वित्तीय सहायता प्राप्त कर सकते हैं। साथ ही परामर्श और हैंडहोल्डिंग सहायता के लिए 2 लाख रुपये तथा स्वच्छ प्रौद्योगिकी, प्रदूषण नियंत्रण उपायों और ज़ीरो इफेक्ट समाधानों को अपनाने के लिए 3 लाख रुपये तक की सहायता उपलब्ध है।
7 जुलाई, 2026 तक, लगभग 9.49 लाख MSME इस योजना के अंतर्गत पंजीकृत हो चुके थे। इनमें से 6.67 लाख से अधिक को ब्रॉन्ज प्रमाणन प्राप्त हुआ, लगभग 6,700 ने सिल्वर प्रमाणन हासिल किया और करीब 4,800 उद्यमों ने गोल्ड प्रमाणन प्राप्त किया। मंत्रालय ने बताया कि उद्यमों को गुणवत्ता और टिकाऊ विनिर्माण प्रथाओं को अपनाने में सहायता के लिए 913 करोड़ रुपये से अधिक की वित्तीय सहायता प्रदान की गई है।
इस योजना को देशभर में व्यापक समर्थन मिला है। 22 राज्यों और केन्द्रशासित प्रदेशों ने ZED को अपनी औद्योगिक नीतियों में शामिल किया है और प्रमाणित एमएसएमई को अतिरिक्त प्रोत्साहन प्रदान कर रहे हैं। इसके अतिरिक्त, 19 वित्तीय संस्थान ZED-प्रमाणित उद्यमों को प्रोसेसिंग शुल्क और ब्याज दरों में रियायत जैसे लाभ प्रदान कर रहे हैं, जिससे उनकी वित्तीय पहुंच बेहतर हुई है।
योजना के प्रभाव को रेखांकित करते हुए मंत्रालय ने महाराष्ट्र के नासिक स्थित फिनेक्स इंडस्ट्रीज़ प्राइवेट लिमिटेड का उदाहरण दिया, जिसने जुलाई 2025 में ZED सिल्वर प्रमाणन प्राप्त किया। कंपनी ने ZED प्रथाओं को लागू करने के बाद खराब गुणवत्ता की लागत (COPQ) में 11 फीसदी की कमी, पुनःकार्य (रीवर्क) में 10 फीसदी की कमी, कार्यस्थल सुरक्षा में सुधार और संसाधनों के बेहतर उपयोग की सूचना दी।
एक अन्य सफलता की कहानी पंजाब के जालंधर स्थित कॉन्सेप्ट क्लोदिंग प्राइवेट लिमिटेड की है, जिसने जून 2025 में ZED सिल्वर प्रमाणन प्राप्त किया। इस उद्यम ने कार्यस्थल घटनाओं में 80 फीसदी की कमी, औसत मरम्मत समय (MTTR) में 50 फीसदी की कमी, रीवर्क में 7.4 फीसदी की कमी तथा उत्पाद अस्वीकृति में 4 फीसदी की कमी दर्ज की। इसके साथ ही प्रक्रिया दक्षता और परिचालन अनुशासन में भी सुधार हुआ।
मंत्रालय के अनुसार, ZED प्रमाणन योजना गुणवत्ता आधारित विनिर्माण, संसाधन दक्षता और पर्यावरणीय स्थिरता को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल के रूप में उभर रही है। यह MSME को उत्पादकता बढ़ाने, बाजार में विश्वसनीयता मजबूत करने और घरेलू तथा वैश्विक मूल्य श्रृंखलाओं में अधिक प्रभावी ढंग से एकीकृत होने में सहायता प्रदान कर रही है।
(Input from DD News)
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