Ministry of Textiles । NHDP । RMSS । PMJJBY । PMSBY । IFFI । GI: नेशनल हैंडलूम डे 2026 के अवसर पर भारत बुनकरों, विरासत तथा इनोवेशन पर जश्न का करेगा आयोजन

Ministry of Textiles । NHDP । RMSS । PMJJBY । PMSBY । IFFI । GI: नेशनल हैंडलूम डे 2026 के अवसर पर भारत बुनकरों, विरासत तथा इनोवेशन पर जश्न का करेगा आयोजन

नई दिल्ली । भारत 7 अगस्त को राष्ट्रीय हथकरघा दिवस मनाएगा, जिसमें देश की समृद्ध बुनाई विरासत और 35.22 लाख से अधिक हथकरघा बुनकरों एवं संबद्ध श्रमिकों के योगदान को सम्मानित किया जाएगा। इनमें से 72 फीसदी से अधिक महिलाएं हैं।

Ministry of Textiles के अनुसार, इस वर्ष का आयोजन ऐसे क्षेत्र को दर्शाता है जो पारंपरिक शिल्पकला में गहराई से जुड़ा होने के साथ-साथ आधुनिक डिज़ाइन, डिजिटल प्लेटफॉर्म और वैश्विक बाज़ारों को भी अपना रहा है। बाज़ार तक पहुँच बढ़ाने, सामाजिक सुरक्षा को मजबूत करने और प्रामाणिकता को बढ़ावा देने के लिए सरकार की विभिन्न पहलों ने भारतीय हथकरघा उत्पादों की पहुँच को देश और विदेश दोनों में विस्तारित करने में मदद की है।

राष्ट्रीय हथकरघा दिवस वर्ष 2015 से प्रतिवर्ष मनाया जाता है। यह 7 अगस्त, 1905 को शुरू हुए स्वदेशी आंदोलन की स्मृति में मनाया जाता है, जिसने स्वदेशी वस्तुओं और आत्मनिर्भरता को बढ़ावा दिया था। यह अवसर भारत के बुनकर समुदाय के सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक योगदान को सम्मानित करता है।

इस सेक्टर के केन्द्र में महिलाएं

चौथी अखिल भारतीय हथकरघा जनगणना (2019-20) के अनुसार देशभर में 35.22 लाख हथकरघा बुनकर और संबद्ध श्रमिक हैं, जिनमें 8.48 लाख श्रमिक रंगाई, ताना तैयार करने और सूत लपेटने जैसी प्री-लूम और पोस्ट-लूम गतिविधियों में संलग्न हैं। कुल कार्यबल में 25.46 लाख महिलाएं हैं, जो 72 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी का प्रतिनिधित्व करती हैं।

जनगणना में 28.20 लाख हथकरघों का भी उल्लेख किया गया है, जिनमें से लगभग 90 फीसदी ग्रामीण क्षेत्रों में स्थित हैं, जो ग्रामीण आजीविका को समर्थन देने में इस क्षेत्र के महत्व को रेखांकित करता है।

पहचान और सरकारी लाभों तक पहुँच को मजबूत करने के लिए मंत्रालय ने जनवरी 2025 में ई-पहचान पोर्टल शुरू किया, जिससे हथकरघा श्रमिक पंजीकरण कर डिजिटल पहचान पत्र प्राप्त कर सकते हैं। जुलाई 2026 तक लगभग 84 हजार अतिरिक्त श्रमिकों को ई-पहचान कार्ड के लिए स्वीकृति दी जा चुकी थी।

सरकारी सहायता और कल्याणकारी उपाय पर फोकस

राष्ट्रीय हथकरघा विकास कार्यक्रम (NHDP) और कच्चा माल आपूर्ति योजना (RMSS) इस क्षेत्र के लिए सरकारी सहायता की मुख्य आधार योजनाएं बनी हुई हैं।

NHDP के तहत वर्ष 2021-22 से जून 2026 के बीच 357 हथकरघा क्लस्टरों को स्वीकृति दी गई है, जबकि 200 हैंडलूम प्रोड्यूसर कंपनियां स्थापित की गई हैं, ताकि बुनकरों को पेशेवर रूप से संचालित उद्यमों में संगठित किया जा सके।

सरकार ने कहा कि उन्नत कार्यशालाओं (वर्कशेड) और इलेक्ट्रॉनिक जैकार्ड जैसी पहलों से उत्पादकता और आय में उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। वर्कशेड परियोजनाओं के तहत दैनिक उत्पादन में 53 फीसदी की वृद्धि दर्ज की गई, जबकि इलेक्ट्रॉनिक जैकार्ड के उपयोग से औसत मासिक आय 9,600 रुपये से बढ़कर 15,000 रुपये हो गई।

हथकरघा विपणन सहायता योजना के माध्यम से विपणन समर्थन का भी विस्तार किया गया है। वर्ष 2021 से अब तक राष्ट्रीय और राज्य स्तरीय हथकरघा एक्सपो तथा शिल्प मेलों सहित 960 से अधिक विपणन कार्यक्रम आयोजित किए गए हैं, ताकि बुनकरों को सीधे बाज़ार तक पहुँच मिल सके।

मंत्रालय उत्कृष्ट बुनाई और नवाचार को सम्मानित करने के लिए संत कबीर हथकरघा पुरस्कार और राष्ट्रीय हथकरघा पुरस्कार भी प्रदान करता है।

वीवर मुद्रा योजना के तहत रियायती ऋण तथा वित्तीय सहायता भी प्रदान की जा रही है। वर्ष 2021-22 से जून 2026 के बीच 280 करोड़ रुपये से अधिक के लगभग 40 हजार ऋण स्वीकृत किए गए हैं।

प्रधानमंत्री जीवन ज्योति बीमा योजना (PMJJBY) और प्रधानमंत्री सुरक्षा बीमा योजना (PMSBY) जैसी सामाजिक सुरक्षा योजनाओं में भी हथकरघा श्रमिकों की भागीदारी बढ़ी है।

नवाचार और वैश्विक पहुँच पर जोर

मंत्रालय ने कहा कि भारतीय हथकरघा उत्पाद आधुनिक फैशन, डिज़ाइन और सांस्कृतिक आयोजनों में लगातार अपनी जगह बना रहे हैं। 61वें फेमिना मिस इंडिया में प्रदर्शित विश्व सूत्र, भारत टेक्स 2025 में ब्रीदिंग थ्रेड्स और अंतरराष्ट्रीय भारतीय फिल्म महोत्सव (IFFI) 2025 में हैंडलूम साड़ीज़ इन मोशन जैसी पहलों ने पारंपरिक भारतीय बुनाई को आधुनिक डिज़ाइन कथाओं के माध्यम से प्रस्तुत किया है।

हाल ही में शुरू किया गया हैंडलूम हैकाथॉन 2026 छात्रों, शोधकर्ताओं, स्टार्टअप्स और कारीगरों को डिजाइन, स्थिरता, डिजिटल प्रौद्योगिकी और बाज़ार पहुँच के क्षेत्र में नवाचारी समाधान विकसित करने के लिए प्रोत्साहित करने का लक्ष्य रखता है।

भारतीय हथकरघा उत्पादों के लिए विस्तारित बाज़ार

वर्ष 2025-26 में भारत का हथकरघा निर्यात लगभग 1,330.96 करोड़ रुपये रहा। संयुक्त अरब अमीरात, अमेरिका, फ्रांस, यूनाइटेड किंगडम और स्पेन प्रमुख निर्यात गंतव्यों के रूप में उभरे हैं।

खरीदारों का विश्वास मजबूत करने के लिए सरकार हैंडलूम मार्क, इंडिया हैंडलूम ब्रांड और भौगोलिक संकेतक (GI) प्रमाणन को बढ़ावा दे रही है। जून 2026 तक 29,400 से अधिक हैंडलूम मार्क पंजीकरण और 2,305 इंडिया हैंडलूम ब्रांड पंजीकरण जारी किए जा चुके थे।

सरकार ने कहा कि 106 हथकरघा उत्पादों को GI पंजीकरण प्रदान किया गया है, जिससे भारत की क्षेत्रीय बुनाई परंपराओं की पहचान और प्रामाणिकता को संरक्षण मिला है।

मंत्रालय के अनुसार, निरंतर नीतिगत समर्थन, नवाचार और वैश्विक स्तर पर बढ़ती पहचान के साथ हथकरघा क्षेत्र भारत की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए घरेलू और अंतरराष्ट्रीय बाज़ारों में बुनकरों के लिए नए अवसर भी सृजित कर रहा है।

(Input from DD News)

Sanjay Sharan

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