नई दिल्ली । भारत भर के 82 फीसदी से अधिक ग्रामीण परिवारों को अब जल Jal Jeevan Mission – Har Ghar Jal के तहत नल से जल की सुविधा उपलब्ध है, जबकि केन्द्र सरकार ने इस कार्यक्रम के माध्यम से आपूर्ति किए जाने वाले पेयजल की गुणवत्ता और सुरक्षा सुनिश्चित करने के उपायों को और मजबूत किया है।
लोकसभा में गुरुवार को लिखित उत्तर में Jal Shakti Minister मंत्री सी. आर. पाटिल द्वारा साझा की गई जानकारी के अनुसार, 18 जुलाई, 2026 तक देश के कुल 19.36 करोड़ ग्रामीण परिवारों में से लगभग 15.89 करोड़ ग्रामीण परिवारों (82.09%) को कार्यशील नल जल कनेक्शन उपलब्ध कराए जा चुके हैं। अगस्त 2019 में मिशन की शुरुआत के समय केवल 3.24 करोड़ परिवारों (16.72%) को ही नल से जल की सुविधा प्राप्त थी।
Jal Jeevan Mission – Har Ghar Jal का उद्देश्य प्रत्येक ग्रामीण परिवार को पर्याप्त मात्रा में, निर्धारित गुणवत्ता वाला और नियमित तथा दीर्घकालिक आधार पर पेयजल नल के माध्यम से उपलब्ध कराना है। सरकार ने कहा कि मिशन के अंतर्गत सभी पाइप जलापूर्ति योजना पेयजल गुणवत्ता के लिए भारतीय मानक ब्यूरो (BIS:10500) के मानकों का पालन करती हैं।
जल गुणवत्ता संबंधी चिंताओं को दूर करने के लिए नई जलापूर्ति योजनाओं की योजना बनाते समय रासायनिक प्रदूषण से प्रभावित गांवों को प्राथमिकता दी जा रही है। राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को सलाह दी गई है कि जहाँ मौजूदा जल स्रोत दूषित हैं, वहाँ सुरक्षित वैकल्पिक जल स्रोतों या बल्क वाटर ट्रांसफर के आधार पर पाइप जलापूर्ति परियोजनाएँ विकसित की जाएँ।
केन्द्र ने कहा कि मिशन के अंतर्गत प्रत्येक जलापूर्ति योजना को तभी स्वीकृति दी जाती है जब संबंधित राज्य सरकार की सोर्स फाइंडिंग कमेटी यह प्रमाणित कर दे कि चिन्हित जल स्रोत निर्धारित मानकों के अनुसार जलापूर्ति बनाए रखने के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराता है।
चूँकि पेयजल राज्य का विषय है, इसलिए पेयजल आपूर्ति योजनाओं की योजना, डिजाइन, क्रियान्वयन, संचालन और रखरखाव की जिम्मेदारी राज्य और केंद्र शासित प्रदेश सरकारों की है। केंद्र सरकार वित्तीय सहायता, नीतिगत मार्गदर्शन और तकनीकी सहयोग प्रदान कर इन प्रयासों का समर्थन करती है।
जल गुणवत्ता निगरानी को सुदृढ़ करने के लिए सरकार ने दिसंबर 2024 में “ग्रामीण परिवारों को पाइप पेयजल आपूर्ति की जल गुणवत्ता निगरानी हेतु संक्षिप्त पुस्तिका” जारी की थी। इस पुस्तिका में स्रोत, जल शोधन संयंत्र, भंडारण सुविधाओं और वितरण नेटवर्क से लिए गए पेयजल नमूनों की व्यापक जांच की सिफारिश की गई है।
दिशानिर्देशों में समयबद्ध सुधारात्मक उपाय निर्धारित किए गए हैं। रासायनिक प्रदूषण की स्थिति में अधिकारियों को प्रभावित स्रोत का उपयोग तुरंत बंद करने, स्थानीय समुदायों को सूचित करने और पाइप जलापूर्ति बहाल होने तक 24 घंटे के भीतर वैकल्पिक व्यवस्था के माध्यम से प्रति व्यक्ति प्रतिदिन कम से कम 8–10 लीटर सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की सलाह दी गई है। आपातकालीन उपचार, ओवरहेड टैंकों की सफाई और पाइपलाइन रिसाव की मरम्मत सात दिनों के भीतर पूरी कर ली जानी चाहिए, जिसके बाद नई गुणवत्ता जांच के उपरांत जलापूर्ति पुनः शुरू की जाए।
जीवाणुजनित (बैक्टीरियल) प्रदूषण की स्थिति में पुस्तिका तत्काल कीटाणुशोधन, जनसाधारण को सूचना देने और सुधारात्मक कार्यों के दौरान टैंकरों के माध्यम से सुरक्षित पेयजल उपलब्ध कराने की सिफारिश करती है।
सरकार द्वारा जारी राज्य एवं केंद्र शासित प्रदेशवार आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2026–27 (रिपोर्टिंग तिथि तक) के दौरान प्रयोगशालाओं में 23.29 लाख जल नमूनों की जांच की गई तथा फील्ड टेस्टिंग किट (FTK) के माध्यम से 34.93 लाख नमूनों का परीक्षण किया गया। वर्ष 2025–26 में राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों ने प्रयोगशालाओं में 71.31 लाख तथा FTK के माध्यम से 49.87 लाख जल नमूनों की जांच की थी।
(Input from DD News)
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