नई दिल्ली । 2015 में पहली बार मनाए जाने के बाद से, International Yoga Day दुनिया के सबसे बड़े सहभागी कल्याण आंदोलनों में से एक के रूप में विकसित हुआ है, जिसने योग के साझा अभ्यास के माध्यम से विभिन्न देशों, संस्कृतियों और समुदायों के लाखों लोगों को एक साथ जोड़ा है।
प्राचीन जड़ें, वैश्विक मान्यता
योग दुनिया की सबसे प्राचीन ज्ञान परंपराओं में से एक है, जिसकी जड़ें लगभग 2700 ईसा पूर्व की सिंधु-सरस्वती सभ्यता तक जाती हैं। योग संबंधी अभ्यासों के संदर्भ वेदों, उपनिषदों, बौद्ध और जैन परंपराओं, साथ ही महाभारत और रामायण में भी मिलते हैं।
महर्षि पतंजलि ने योग सूत्रों के माध्यम से योग के दार्शनिक ढांचे को व्यवस्थित रूप दिया, जिससे उस साधना की नींव पड़ी जो सदियों से जीवित रही है और निरंतर विकसित होती रही है।
योग की सार्वभौमिक स्वीकार्यता को मान्यता देते हुए, संयुक्त राष्ट्र ने 2014 में United Nations Assembly के 69वें सत्र में PM नरेन्द्र मोदी द्वारा दिए गए प्रस्ताव के बाद 21 जून को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस घोषित किया। इस प्रस्ताव को 175 देशों का समर्थन प्राप्त हुआ।
पहला International Yoga Day 21 जून, 2015 को मनाया गया, जबकि 2016 में योग को यूनेस्को की मानवता की अमूर्त सांस्कृतिक विरासत की प्रतिनिधि सूची में शामिल किया गया।
राजपथ से दुनिया तक
नई दिल्ली के राजपथ पर आयोजित उद्घाटन समारोह में 84 देशों के 35,985 प्रतिभागियों ने भाग लिया और इसने सबसे बड़े योग पाठ तथा सर्वाधिक राष्ट्रीयताओं की भागीदारी के लिए गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड में स्थान बनाया।
वर्षों के दौरान, राष्ट्रीय स्तर के मुख्य समारोह नई दिल्ली से चंडीगढ़, लखनऊ, देहरादून, रांची, मैसूर, जबलपुर, श्रीनगर और विशाखापत्तनम तक पहुँचे, जिससे योग भारत के विभिन्न समुदायों के और अधिक निकट आया।
महामारी के दौरान एक आंदोलन
कोविड-19 महामारी के दौरान भी International Yoga Day ने बदलती परिस्थितियों के अनुरूप स्वयं को ढाला और डिजिटल तथा घर-आधारित भागीदारी के माध्यम से अपनी निरंतरता बनाए रखी।
2020 में "योग एट होम, योग विद फैमिली" और 2021 में "योग फॉर वेलनेस" जैसे विषयों ने वैश्विक स्वास्थ्य संकट के दौरान शारीरिक फिटनेस और भावनात्मक दृढ़ता को बढ़ावा देने में योग की भूमिका को रेखांकित किया।
2025 में दशक का महत्वपूर्ण पड़ाव
2025 में आयोजित 11वाँ संस्करण, जिसका विषय "योग फॉर वन अर्थ, वन हेल्थ" था, वैश्विक स्तर पर इस आयोजन के एक दशक पूरे होने का प्रतीक बना।
देशभर में 13 लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए, जिनमें 26 करोड़ से अधिक लोगों ने भागीदारी की। विशाखापत्तनम में आयोजित मुख्य कार्यक्रम में तीन लाख से अधिक प्रतिभागी शामिल हुए और इसने सबसे बड़े योग पाठ तथा सबसे बड़े सामूहिक सूर्य नमस्कार प्रदर्शन के लिए दो गिनीज वर्ल्ड रिकॉर्ड स्थापित किए।
योग का विस्तृत होता वैश्विक प्रभाव
आज International Yoga Day 190 से अधिक देशों में मनाया जाता है। इसके आयोजन न्यूयॉर्क स्थित संयुक्त राष्ट्र मुख्यालय और जापान के मंदिरों से लेकर दक्षिण अफ्रीका के खेल स्टेडियमों तथा ब्राज़ील और सऊदी अरब के सार्वजनिक स्थलों जैसे प्रतिष्ठित स्थानों पर किए जा चुके हैं।
आईडीवाई 2026 के लिए, विदेशों में स्थित भारत के 210 से अधिक मिशन विश्वभर के लगभग 2,500 स्थानों पर योग कार्यक्रम आयोजित कर रहे हैं।
United Nations की सभी छह आधिकारिक भाषाओं में उपलब्ध कॉमन योग प्रोटोकॉल ने विभिन्न देशों और संस्कृतियों के लोगों को एक साझा अनुभव में भाग लेने में सक्षम बनाया है।
जैसे-जैसे अंतरराष्ट्रीय योग दिवस अपने 12वें संस्करण में प्रवेश कर रहा है, ध्यान अब एक दिन के उत्सव से आगे बढ़कर योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने पर केन्द्रित हो रहा है, ताकि कल्याण को एक सतत एवं समावेशी वैश्विक आंदोलन बनाया जा सके।
(Input from DD News)
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