India-New Zealand । PM । DCA । National Defence College । Customs Cooperative Arrangement । AEO-MRA । ISRO: भारत-न्यूज़ीलैंड ने रक्षा से लेकर विज्ञान तक रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की बात की

India-New Zealand । PM । DCA । National Defence College । Customs Cooperative Arrangement । AEO-MRA । ISRO: भारत-न्यूज़ीलैंड ने रक्षा से लेकर विज्ञान तक रणनीतिक सहयोग बढ़ाने की बात की

नई दिल्ली । विदेश मंत्रालय के अनुसार, India-New Zealand ने हाल के वर्षों में अपने रणनीतिक सहयोग का उल्लेखनीय विस्तार किया है। दोनों देशों के बीच रक्षा सहयोग समझौते (DCA) पर हस्ताक्षर, बढ़ते सैन्य आदान-प्रदान, सीमा शुल्क सहयोग तथा विज्ञान, कृषि और गतिशीलता (Mobility) के क्षेत्र में सहयोग इसके प्रमुख उदाहरण हैं।

एक महत्वपूर्ण उपलब्धि मार्च 2025 में न्यूज़ीलैंड के PM क्रिस्टोफर लक्सन की भारत यात्रा के दौरान हासिल हुई, जब दोनों देशों ने रक्षा सहयोग समझौते (DCA) पर हस्ताक्षर किए। इस समझौते के माध्यम से रक्षा सहयोग को औपचारिक रूप दिया गया, जिसमें पहले से सैन्य आदान-प्रदान, नौसैनिक जहाजों की यात्राएं और वरिष्ठ रक्षा अधिकारियों के बीच संवाद शामिल रहा है।

दोनों देशों के बीच उच्च स्तरीय आदान-प्रदान में भी उल्लेखनीय वृद्धि हुई है। रॉयल न्यूज़ीलैंड नेवी के प्रमुख रियर एडमिरल डेविड प्रॉक्टर ने फरवरी 2024 में भारत का दौरा किया, जबकि न्यूज़ीलैंड रक्षा बल के उप प्रमुख एयर वाइस मार्शल टोनी डेविस ने नवंबर 2023 में रक्षा सहयोग को मजबूत करने पर चर्चा के लिए भारत की यात्रा की। इससे पहले भारतीय नौसेना प्रमुख एडमिरल आर. हरि कुमार ने वर्ष 2022 में न्यूजीलैंड का दौरा किया था।

नौसैनिक सहयोग को भी नई गति मिली है। वर्ष 2023 में भारतीय नौसेना के युद्धपोत आईएनएस सह्याद्री और आईएनएस कोलकाता ने वेलिंगटन और ऑकलैंड बंदरगाहों का दौरा किया। वहीं, दो महिला नौसेना अधिकारियों के साथ विश्व परिक्रमा पर निकला आईएनएसवी तारिणी दिसंबर 2024 से जनवरी 2025 के बीच लिटलटन हार्बर पहुंचा।

सैन्य आदान-प्रदान केवल वरिष्ठ नेतृत्व तक सीमित नहीं रहा। वर्ष 2023 में राष्ट्रीय रक्षा महाविद्यालय (National Defence College) का 14 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल न्यूज़ीलैंड गया, जबकि आज़ादी का अमृत महोत्सव पहल के तहत उसी वर्ष 10 न्यूज़ीलैंड कैडेट और दो संरक्षकों ने भारत के गणतंत्र दिवस शिविर में भाग लिया।

सीमा शुल्क और सीमा प्रबंधन के क्षेत्र में भी सहयोग का विस्तार हुआ है। अगस्त 2024 में दोनों देशों ने व्यापार सुगमता बढ़ाने और अंतरराष्ट्रीय संगठित अपराध के विरुद्ध सहयोग मजबूत करने के लिए सीमा शुल्क सहयोग व्यवस्था (Customs Cooperative Arrangement) पर हस्ताक्षर किए। इसके बाद मार्च 2025 में केंद्रीय अप्रत्यक्ष कर एवं सीमा शुल्क बोर्ड (CBIC) और न्यूजीलैंड कस्टम्स सर्विस के बीच अधिकृत आर्थिक परिचालक–पारस्परिक मान्यता समझौते (AEO-MRA) पर हस्ताक्षर किए गए।

मंत्रालय के अनुसार, दोनों देशों ने लोगों की आवाजाही को सुगम बनाने के उद्देश्य से Migration and Mobility Partnership Agreement पर वार्ता शुरू करने की भी घोषणा की है।

सुरक्षा के अलावा भारत और न्यूज़ीलैंड कृषि, विज्ञान और प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में भी सहयोग जारी रखे हुए हैं। हालिया सहयोग में खाद्य सुरक्षा पर परामर्श, पौध संरक्षण ऑडिट, डेयरी और भेड़ पालन में सहयोग तथा वैज्ञानिक आदान-प्रदान शामिल हैं।

मंत्रालय ने कहा कि विज्ञान और नवाचार के क्षेत्र में संयुक्त कार्यक्रमों के माध्यम से सहयोग लगातार जारी है। इसमें भारतीय वैज्ञानिकों की अंटार्कटिक अनुसंधान अभियानों में भागीदारी, डिजिटल शासन (Digital Governance) से जुड़े सहयोग तथा वर्ष 2024 में इसरो (ISRO) के प्रतिनिधिमंडल की न्यूज़ीलैंड यात्रा के बाद अंतरिक्ष क्षेत्र में सहयोग को भी नई गति मिली है।

(Input from News on Air)

 

Sanjay Sharan

Sanjay Sharan

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