मंडी । मतदाता सूची के स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (SIR) और Election Commission की कार्यप्रणाली के विरोध में भारत की कम्युनिस्ट पार्टी (मार्क्सवादी) की सदर कमेटी ने मंगलवार को मंडी के सेरी चांदनी में धरना-प्रदर्शन किया। यह प्रदर्शन वामपंथी पार्टियों के आह्वान पर 26 सितंबर से 2 अक्टूबर तक चल रहे राष्ट्रव्यापी विरोध कार्यक्रम के तहत आयोजित किया गया।
प्रदर्शन के दौरान माकपा नेताओं ने 23 सितंबर को प्रकाशित इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट का हवाला देते हुए चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। रिपोर्ट के अनुसार, चुनाव आयुक्त सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने पिछले 10 महीनों में आयोग के कुछ फैसलों और प्रक्रियाओं पर कम से कम 14 बार लिखित आपत्तियां दर्ज की थीं। इनमें नए मतदाताओं के पंजीकरण, मतदाता सूची से नाम हटाने और SIR से जुड़े मुद्दे शामिल थे।
माकपा नेताओं ने आरोप लगाया कि मतदाता डेटाबेस के केन्द्रीकरण और राज्य तथा निर्वाचन क्षेत्र स्तर के अधिकारियों की भूमिका सीमित किए जाने से चुनावी प्रक्रिया की पारदर्शिता प्रभावित हो सकती है। पार्टी ने गोवा में सॉफ्टवेयर से जुड़े मुद्दों का भी हवाला दिया और चुनाव प्रक्रिया में अधिकारियों की भूमिका को लेकर सवाल उठाए।
वहीं, चुनाव आयोग ने इन रिपोर्टों के जवाब में कहा है कि अलग-अलग राय और टिप्पणियां संस्थागत विचार-विमर्श का सामान्य हिस्सा हैं और पिछले एक वर्ष में आयोग के सभी निर्णय पूर्ण आयोग की सर्वसम्मति से लिए गए हैं।
माकपा इकाई सचिव सुरेश सरवाल ने Chief Election Commissioner ज्ञानेश कुमार को पद से हटाने, SIR प्रक्रिया रोकने और मतदाता सूची से गलत तरीके से हटाए गए लोगों के मतदान अधिकार बहाल करने की मांग की।
प्रदर्शनकारियों ने Election Commission की स्वतंत्रता और विश्वसनीयता सुनिश्चित करने के साथ-साथ चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति प्रक्रिया में बदलाव की मांग भी उठाई।माकपा नेताओं ने कहा कि SIR का मुद्दा केवल मतदाता सूची के पुनरीक्षण तक सीमित नहीं है, बल्कि उनके अनुसार यह मतदाता अधिकार, चुनावी पारदर्शिता और निर्वाचन प्रक्रिया में संस्थागत जवाबदेही से भी जुड़ा है।
(Input from PB Shabd)
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