पटनाः नीतीश कुमार, Janta Dal (U) के वरिष्ठ नेता एवं अध्यक्ष, ने आज बिहार विधानमंडल के उच्च सदन विधान परिषद (Legislative Council) की सदस्यता से इस्तीफा दिया है। जानकारों का मानना है कि यह कदम, उनके इस महीने की शुरुआत में संसद के उच्च सदन राज्यसभा के लिए निर्विरोध निर्वाचित होने के बाद उठाया गया है। यह इस्तीफा संवैधानिक प्रक्रिया के तहत 14 दिन की समय-सीमा समाप्त होने से ठीक पहले दिया गया, जिसके अन्तर्गत उन्हें अपने किसी एक सदन की सदस्यता छोड़ने की अपेक्षा की गई थी।
संजय कुमार झा, राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष, जेडीयू, ने पहले ही संकेत दिया था कि इस्तीफा निर्धारित समय सीमा के भीतर दिया जाएगा, हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया था कि नीतीश कुमार मुख्यमंत्री पद कब छोड़ेंगे। श्री कुमार के 9 अप्रैल को राज्यसभा सदस्य के रूप में शपथ लेने की संभावना जताई जा रही है।
नीतीश कुमार का एक लंबा राजनीतिक करियर रहा है, कई प्रमुख पदों को होल्ड किया है, साथ ही लंबे समय से गठबंधनों के बीच कुशलता से संतुलन बनाते हुए अपनी स्थिति मजबूत रखी है। उन्होंने बीजेपी तथा महागठबंधन—दोनों के साथ समय-समय पर गठबंधन किया। हाल ही में उन्होंने 2025 में एनडीए को बड़ी जीत दिलाकर दसवीं बार मुख्यमंत्री बनने का रिकॉर्ड स्थापित किया है।
विदित है कि, उन्होंने हाल ही में यह संकेत दिया है कि अब वे राज्य के विकास के लिए मार्गदर्शक की भूमिका निभाएंगे तथा मुख्यमंत्री पद किसी और को सौंपने का संकेत भी दिया हैं।
इस गहमागहमी में उनके उत्तराधिकारी को लेकर चर्चाएं चरम पर हैं, जिसमें पहला नाम सम्राट चौधरी, उपमुख्यमंत्री, बिहार, का नाम प्रमुखता से सामने आ रहा है। बीजेपी विधायक दल के नेता एवं कुशवाहा समुदाय के प्रभावशाली चेहरे के रूप में उन्हें नीतीश कुमार का समर्थन प्राप्त होने के कयास लगाए जा रहे हैँ। हाल ही में ‘समृद्धि यात्रा’ के दौरान भी नीतीश कुमार ने सार्वजनिक रूप से उनका समर्थन किया था।
यह बदलाव बिहार की राजनीति में एक महत्वपूर्ण मोड़ हो सकता है जिसका कारण स्पष्ट है, राज्य के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले नेताओं में से एक श्री नीतीश कुमार अब, राष्ट्रीय राजनीति में नई भूमिका निभाने को अग्रसर हैं।
(Source: Input From NAI)
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