BharatNet । CSC । DBN । DBT । PM-GDISHA: सरकार भारतनेट के तहत डिजिटल इंडिया का दायरा बढ़ाते हुए 2.21 लाख ग्राम पंचायतें तक सर्विस पहुंचाने को तैयार 

BharatNet । CSC । DBN । DBT । PM-GDISHA: सरकार भारतनेट के तहत डिजिटल इंडिया का दायरा बढ़ाते हुए 2.21 लाख ग्राम पंचायतें तक सर्विस पहुंचाने को तैयार 

नई दिल्ली । सरकार ने डिजिटल इंडिया का दायरा बढ़ाया; BharatNet के तहत 2.21 लाख ग्राम पंचायतें अब सर्विस के लिए तैयार हैं भारतनेट परियोजना के तहत देशभर में 2.21 लाख से अधिक ग्राम पंचायतों को सेवा-तैयार (सर्विस-रेडी) बनाया गया है, जबकि 5.01 लाख कॉमन सर्विस सेंटर (CSC) देशभर में डिजिटल सेवाएँ प्रदान कर रहे हैं। केंद्र सरकार डिजिटल इंडिया कार्यक्रम के तहत डिजिटल अवसंरचना और नागरिक-केन्द्रित सेवाओं के विस्तार को लगातार आगे बढ़ा रही है।

जुलाई 2015 में शुरू किया गया डिजिटल इंडिया कार्यक्रम डिजिटल अवसंरचना को मजबूत करने, सरकारी सेवाओं की इलेक्ट्रॉनिक डिलीवरी सुनिश्चित करने तथा डिजिटल साक्षरता और रोजगार के माध्यम से नागरिकों को सशक्त बनाने का लक्ष्य रखता है। सरकार ने कहा कि यह कार्यक्रम “संपूर्ण सरकार” (Whole-of-Government) दृष्टिकोण के तहत लागू किया जा रहा है ताकि डिजिटल सेवाओं को अधिक कुशल, पारदर्शी और सुलभ बनाया जा सके, विशेष रूप से ग्रामीण और दूरदराज क्षेत्रों में।

लोकसभा में लिखित उत्तर में जानकारी साझा करते हुए इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि इस कार्यक्रम ने देशभर में इंटरनेट कनेक्टिविटी, डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना, डिजिटल शासन और डिजिटल कौशल विकास का उल्लेखनीय विस्तार किया है।

इंटरनेट और ब्रॉडबैंड विस्तार पर फोकस

पिछले एक दशक में भारत में दूरसंचार और इंटरनेट की पहुँच में तीव्र वृद्धि हुई है। मार्च 2014 में कुल टेलीफोन कनेक्शनों की संख्या 93.3 करोड़ थी, जो मार्च 2026 तक बढ़कर 133 करोड़ से अधिक हो गई।

इंटरनेट ग्राहकों की संख्या मार्च 2014 में 25.15 करोड़ से बढ़कर मार्च 2026 में 109.27 करोड़ हो गई।

भारतनेट के तहत जून 2026 तक लगभग 2.21 लाख ग्राम पंचायतों को ग्रामीण भारत में उच्च गति ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी प्रदान करने के लिए सेवा-तैयार बनाया गया है।

तमिलनाडु में भारतनेट के तहत 9,280 ग्राम पंचायतें सेवा-तैयार हैं, जिनमें धर्मपुरी जिले की 210 ग्राम पंचायतें शामिल हैं।

सरकार ने यह भी बताया कि सरकार-वित्तपोषित 4जी सैचुरेशन परियोजना और अन्य मोबाइल कनेक्टिविटी पहलों के तहत तमिलनाडु में 257 मोबाइल टावर स्थापित किए जा चुके हैं।

30 जून 2026 तक डिजिटल भारत निधि (DBN) से वित्तपोषित मोबाइल योजना के तहत देशभर में 24,784 टावर स्थापित किए जा चुके हैं।

इस योजना के तहत तमिलनाडु में 445 गांवों को कवर करने के लिए 356 टावरों की योजना बनाई गई थी। इनमें से 257 टावर चालू हैं, जो 308 गांवों को कनेक्टिविटी प्रदान कर रहे हैं। धर्मपुरी जिले में 22 गांवों के लिए 14 टावरों की योजना बनाई गई थी, जिनमें से 11 टावर स्थापित हो चुके हैं और 19 गांवों को कनेक्टिविटी मिल रही है।

केंद्र ने तमिलनाडु में विभिन्न चल रही डिजिटल भारत निधि परियोजनाओं के तहत 1,886 करोड़ रुपये जारी किए हैं।

डिजिटल सार्वजनिक अवसंरचना का विस्तार

सरकार ने कहा कि किफायती मोबाइल डेटा, सहायक डिजिटल पहुँच केंद्रों और इंटर ऑपरेबल डिजिटल सार्वजनिक प्लेटफार्मों ने कल्याणकारी योजनाओं, डिजिटल भुगतान, शिक्षा और शासन तक पहुँच को बदल दिया है।

मोबाइल डेटा की कीमत 2014 में 269 रुपये प्रति जीबी से घटकर 2025-26 में लगभग 8-10 रुपये प्रति जीबी रह गई है, जिससे भारत दुनिया के सबसे किफायती डेटा बाजारों में शामिल हो गया है।

देशभर में 1.44 अरब से अधिक आधार नंबर जारी किए जा चुके हैं, जिनमें तमिलनाडु में 8.18 करोड़ से अधिक आधार शामिल हैं।

आधार-सक्षम प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (DBT) प्रणाली अब 56 मंत्रालयों द्वारा संचालित 318 योजनाओं को कवर करती है। सरकार के अनुसार, 52 लाख करोड़ रुपये से अधिक की राशि सीधे लाभार्थियों के बैंक खातों में हस्तांतरित की जा चुकी है।

यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (UPI) अब 55.49 करोड़ से अधिक उपयोगकर्ताओं, 6.5 करोड़ व्यापारियों और 731 बैंकों को सेवा प्रदान कर रहा है।

सरकार ने कहा कि UPI भारत के लगभग 85 प्रतिशत डिजिटल भुगतान लेन-देन और विश्व के लगभग 50 प्रतिशत रियल-टाइम डिजिटल भुगतानों का हिस्सा है।

डिजीलॉकर के 71.66 करोड़ से अधिक पंजीकृत उपयोगकर्ता हैं और 2,822 ऑनबोर्ड जारीकर्ताओं द्वारा 936.03 करोड़ से अधिक डिजिटल दस्तावेज जारी किए गए हैं। तमिलनाडु में डिजीलॉकर सेवाओं तक पहुँच के लिए 2.18 करोड़ से अधिक आधार-सक्षम पंजीकरण पूरे किए जा चुके हैं।

उमंग (UMANG) प्लेटफॉर्म एकल मोबाइल एप्लिकेशन के माध्यम से नागरिकों को 2,575 सरकारी सेवाओं तक पहुँच प्रदान करता है, जिनमें तमिलनाडु सरकार द्वारा एकीकृत 17 सेवाएँ भी शामिल हैं।

ई-संजीवनी टेलीमेडिसिन प्लेटफॉर्म ने देशभर में 48 करोड़ से अधिक मरीजों को स्वास्थ्य परामर्श प्रदान किया है, जिनमें तमिलनाडु में 4 करोड़ से अधिक परामर्श शामिल हैं।

सरकार ने राष्ट्रीय भाषा अनुवाद मिशन (भाषिणी) को भी रेखांकित किया और इसे एक सार्वजनिक डिजिटल मंच बताया जिसका उद्देश्य भाषा संबंधी बाधाओं को दूर करना और डिजिटल सेवाओं में भाषाई समावेशन को बढ़ावा देना है।

कॉमन सर्विस सेंटर को बढ़ावा

कॉमन सर्विस सेंटर नेटवर्क ग्राम स्तरीय उद्यमियों के माध्यम से डिजिटल सेवाओं की अंतिम छोर तक पहुँच सुनिश्चित कर रहा है।

वर्तमान में CSC के माध्यम से 800 से अधिक सरकारी और व्यावसायिक सेवाएँ उपलब्ध हैं।

मई 2026 तक देशभर में 5.01 लाख कार्यशील CSC थे, जिनमें 3.91 लाख ग्राम पंचायत स्तर पर संचालित हो रहे थे।

तमिलनाडु में 18,240 कार्यशील CSC हैं, जिनमें 12,112 ग्राम पंचायत स्तर पर हैं, जबकि धर्मपुरी जिले में 498 CSC हैं, जिनमें से 412 ग्रामीण ग्राम पंचायतों में स्थित हैं।

डिजिटल साक्षरता और कौशल विकास पर जोर

सरकार ने कहा कि डिजिटल इंडिया का ध्यान केवल तकनीक तक पहुँच बढ़ाने पर नहीं, बल्कि डिजिटल क्षमताओं के निर्माण पर भी है।

प्रधानमंत्री ग्रामीण डिजिटल साक्षरता अभियान (PMGDISHA), जो दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल साक्षरता कार्यक्रमों में से एक है, ने छह करोड़ के लक्ष्य के मुकाबले देशभर में 6.39 करोड़ से अधिक लोगों को प्रशिक्षित किया है। तमिलनाडु में इस योजना के तहत 14 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया गया, जिनमें धर्मपुरी जिले के 64,813 लोग शामिल हैं। यह कार्यक्रम 31 मार्च 2024 को समाप्त हो गया।

फ्यूचर स्किल्स प्राइम, जो सरकार और नैसकॉम (NASSCOM) की संयुक्त पहल है, में 34 लाख से अधिक उम्मीदवार पंजीकृत हैं, जिनमें से 23 लाख से अधिक उभरती प्रौद्योगिकी पाठ्यक्रमों में नामांकित या प्रशिक्षित किए जा चुके हैं। तमिलनाडु के 5.81 लाख से अधिक उम्मीदवारों ने इस कार्यक्रम में भाग लिया है।

राष्ट्रीय इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी संस्थान (NIELIT) ने अपने 56 केंद्रों और 9,000 से अधिक साझेदार संस्थानों के माध्यम से पिछले तीन वित्तीय वर्षों में 31.92 लाख से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया है।

NIELIT का एक केंद्र चेन्नई में है और तमिलनाडु में 35 से अधिक साझेदार संस्थान हैं। पिछले तीन वर्षों में राज्य में 37,500 से अधिक उम्मीदवारों को प्रशिक्षित किया गया है।

NIELIT डिजिटल यूनिवर्सिटी प्लेटफॉर्म, जो कृत्रिम बुद्धिमत्ता (AI) और साइबर सुरक्षा जैसे क्षेत्रों में ऑनलाइन एवं मिश्रित पाठ्यक्रम प्रदान करता है, पर 2.75 लाख से अधिक उम्मीदवार पंजीकृत हैं।

सरकार ने तमिलनाडु ई-सेवई (e-Sevai) पोर्टल को भी रेखांकित किया, जिसे तमिलनाडु ई-गवर्नेंस एजेंसी द्वारा विकसित किया गया है। यह नागरिक-केंद्रित सरकारी सेवाओं की एक विस्तृत श्रृंखला को बिना किसी मैनुअल हस्तक्षेप के पूर्णतः ऑनलाइन उपलब्ध कराता है।

बजट का प्रावधान

सरकार ने कहा कि डिजिटल इंडिया एक अम्ब्रेला कार्यक्रम है, जिसमें विभिन्न केंद्रीय मंत्रालयों, विभागों और राज्य सरकारों द्वारा संचालित परियोजनाएँ शामिल हैं, जिनके लिए अलग-अलग बजटीय प्रावधान हैं।

इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय इस कार्यक्रम के अंतर्गत आठ केन्द्रीय क्षेत्र उप-योजनाओं को लागू करता है और इन योजनाओं के लिए राज्यवार बजट आवंटन नहीं किया जाता।

यह जानकारी इलेक्ट्रॉनिक्स और सूचना प्रौद्योगिकी राज्य मंत्री जितिन प्रसाद ने 5 अगस्त को लोकसभा में लिखित उत्तर में साझा की।

(Input from DD News)

Sanjay Sharan

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